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Albela Khatri

नारी न होगी जगत में तो जल जायेगा संसार




क्षिति,जल,पावक,गगन,समीरा, पंच तत्त्व कहलाते हैं

इन्हीं पाँच से परमपिता प्रभु सुन्दर सृष्टि सजाते हैं


दो धुरियों पर टिकी हुई है कालचक्र की गतिविधि सारी

एक धुरी है नर नारायण, दूजी धुरी है भगवती नारी


नर-नारी के मधुर मिलन से सारी दुनिया चलती है

पैदा होती, पल्लवित होती, फूलती है और फलती है


फिर क्यों सारी दुनिया करती केवल नर की अगवानी

क्यों नारी के आँचल में है पीड़ा और आँखों में पानी


यह पानी यदि नारी-हृदय से लावा बन कर फूट पड़ेगा

फट कर रह जायेगी वसुधा, सारा अम्बर टूट पड़ेगा


जल,थल,अनल व गगन,पवन,सब उगलेंगे अंगार

नारी न होगी जगत में तो जल जायेगा संसार


-अलबेला खत्री



प्यारे ब्लोगर मित्रो !
सादर नमस्कार

पिछले कुछ दिनों से लेखनीय और मंचीय व्यस्तता इतनी बढ़ गई है न तो नींद पूरी हो रही है न आराम, लेकिन काम तो काम है और हर हाल में करना है, परन्तु इस चक्कर में मैं किसी भी ब्लॉग को बाँच नहीं पा रहा हूँ..............जैसे ही ज़रा फुर्सत मिलेगी, एक साथ सबको पढ़ के टिप्पणी के साथ हाज़िर होऊंगा . मेरे मित्र कृपया मेरी विवशता समझेंगे और स्नेह बनाए रखेंगे

-अलबेला खत्री


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11 comments:

ललित शर्मा January 11, 2011 at 6:43 PM  

जय हो

nilesh mathur January 11, 2011 at 8:58 PM  

क्या बात है, बहुत सुन्दर!

arora om January 11, 2011 at 9:33 PM  

ati sundar rachna

aapko man se badhaai aur aashirvad

aise hi likhte raho aur baar bar dikhte raho

-om

Dr Gautam bang January 11, 2011 at 9:34 PM  

wah albela ji

sundar aur saral rachna

thanks

राज भाटिय़ा January 11, 2011 at 11:11 PM  

यादि नारी ना इस जगत मे तो , कुछ भी ना हो जी, बहुत सुंदर रचना रची आप ने धन्यवाद

Sunil Kumar January 12, 2011 at 8:10 AM  

क्या बात है, बहुत सुन्दर

Sunil Kumar January 12, 2011 at 8:11 AM  

क्या बात है, बहुत सुन्दर रचना....

Mithilesh dubey January 12, 2011 at 11:17 AM  

क्या बात है, बहुत सुन्दर!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " January 12, 2011 at 3:19 PM  

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता है बड़े भाई !

योगेन्द्र मौदगिल January 12, 2011 at 4:41 PM  

wah.....wahwa....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" January 13, 2011 at 8:10 AM  

लाजवाब कविता!
लोहड़ी की बधाई हो!

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