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Albela Khatri

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अपनेराम ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली


लो जी,  "जब प्यार किया तो डरना क्या" वाले इस्टाइल में आज अपनेराम  ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, भावी प्रधानमन्त्री के लिए सहयोग राशि भर दी, पार्टी फण्ड के लिए डोनेशन भी दे दिया और विभिन्न मदों में 1675 रूपया भी भर दिया

अब ये नहीं बताऊंगा कि किस पार्टी की सदस्यता के लिए ऑनलाइन फ़ॉर्म और पैसा भरा है -बताने की ज़रूरत भी क्या है, आपको सब मालूम ही है … हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


वे न केवल अशिष्ट और अमर्यादित होते हैं बल्कि समाज के लिए घातक भी होते हैं



कुछ लोगों के मन में दूसरों पर चढ़ कर या उन्हें कूद फाँद कर आगे बढ़ने की ज़बरदस्त हवस होती है इसलिए वे न केवल अशिष्ट और अमर्यादित होते हैं बल्कि  समाज के लिए घातक भी होते हैं.  यहाँ प्रस्तुत चित्र 5 फ़रवरी 2011 को सिंगापोर में हुए कार्यक्रम "हँसना मना है" का है  इसमें आप देख सकते हैं कि अपने क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण और वरिष्ठ लोगों को जोकर दिखा कर चौथा व्यक्ति अपने आप को कैसे नायक की छवि में प्रस्तुत कर रहा है

ख़ास बात ये है कि ये डिज़ायन सिंगापोर के आयोजक ने नहीं बनाया बल्कि इसी चौथे व्यक्ति ने बना कर वहाँ भेजा था
hasyakavi albela khatri in singapore at hasna mana hai

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the song dedicated to my best friend d v patel nashville tn



प्रिय मित्र  डी वी पटेल नैशविल टैनिसी को समर्पित गीत


तर्ज़ : कहो न प्यार है

नयनों से नेह झलके,  वाणी में रसधार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

भारत की है ये रौनक, अमेरिका की बहार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

सूरत, नवसारी,वलसाड के गांव-गांव से आये
संग अपने,  गुजराती माटी की ख़ुशबू लाये
आ कर ख़ूनपसीने  से यहाँ वैभव के फूल खिलाये
मेहनत के ये पुजारी, संस्कृति से इन्हें प्यार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

हॉटेल और मॉटेल के बिजनैस को दिल से अपनाया
अतिथि देवो भवः की कहावत का निजधर्म निभाया
काम किया है जान लगा कर, तब ये रंग है आया
अब इनके हाथों में ये पूरा कारोबार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

एलपीएस ऑफ़ यूएसए सीनियर सिटिजन्स का प्यारा
विमेन्स डेवलेपमेन्ट और यूथ पावर का देखो नज़ारा
स्कॉलरशिप और मेट्रो-मोनियल  की बहती है धारा
मीटिंग्स में है मधुरता, कन्वेन्शन चमकदार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

शंकर, सीएम, नट्टू, रमण संग धनसुख की बलिहारी
अमृत, भग्गू, मुकेश, भरत, हसमुख ने शान सँवारी
किरीट, समीर ने रंग जमाया, आगे  सुनील की पारी
नैशविल के डाह्याभाई सेवा में लगातार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

-अलबेला खत्री
c m patel, albela khatri, naranji patel & d v patel





wotch & enjoy super hero narendra modi as prime minister in up coming film


हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा राष्ट्रहित में प्रचारित व प्रसारित



इसलिए लोग कहते हैं कि गरजने वाले बरसते नहीं हैं.........



गरजना
बादल की उकताई और चिल्लाहट है

बरसनाबादल का मदमाना और मुसकाहट है

बादलजब तक बादलों से टकराता है,
बेचारा बोर होता है

लेकिन
बादल जब बादली से मिलता है
तो भाव विभोर होता है

बादल का बादल से घर्षण
दोनों को ही क्या आकर्षण
कितना भी कर लें संघर्षण
किन्तु नहीं हो सकता वर्षण

बादल जब तक आपस में टकराते हैं
केवल बिजलियाँ ही पैदा कर पाते हैं
वे कामाग्नि में दग्ध हो, चिल्लाते हैं
गरज गरज कर अपना रोष दिखाते हैं

तड़प तड़प कर
बिलख बिलख कर
हाहाकार मचाते हैं

भड़क भड़क कर
कड़क कड़क कर
बिजली ख़ूब गिराते हैं

लेकिन जब बादल बादली से मिलता है
तभी हृदय में प्रेम का शतदल खिलता है

चिल्लाना बन्द हो जाता है
बिजली गिरना रुक जाता है
रौद्ररूप को त्याग वो झटपट
विनय भाव से झुक जाता है

दोनों बदन उत्तेजित होते
दोनों मन ऊर्जस्वित होते

चरमबिन्दु पर पहुंचे मिलन जब
बान्ध तोड़, होता है स्खलन जब

बदली तृप्ति से खिल जाती
बादल को तुष्टि मिल जाती

मन भर जाता, भारी हो कर नम हो जाता है
तब आन्सू का क़तरा भी शबनम हो जाता है

बादल-बदली की रूहें
जब हर्षा जाती हैतब वर्षा आती है
तब वर्षा आती है
तब वर्षा आती है


बदरा जब तक बदली से मिलता नहीं है
उसके मन का मोगरा खिलता नहीं है

ये बादल बड़े हठीले हैं
जब तक स्वयं सरसते नहीं हैं

बाहर कितना भी गरजें
पर भीतर से ये बरसते नहीं हैं

इसलिए लोग कहते हैं कि गरजने वाले
बरसते नहीं हैं

बरसते नहीं हैं
बरसते नहीं हैं

-अलबेला खत्री


 

हमें एक योद्धा कप्तान की ज़रूरत है, वयोवृद्ध और लाचार शासक की नहीं .


मेरे प्यारे देश वासियों

आप किसी भी राजनैतिक  विचारधारा अथवा दल के समर्थक क्यों न हों, एक 


बात तो माननी ही पड़ेगी  कि  सारे दल और दलगत  निष्ठाएं  तभी तक कारगर 

हैं जब तक कि देश सुरक्षित है .  देश की क़ीमत पर किसी भी दल या विचारधारा 

को सहन नहीं किया जा सकता .


दुर्भाग्य से  सोनिया भाभी  द्वारा संचालित वर्तमान सरकार ने  देश को  इतना  


पीछे धकेल दिया है  कि  हर तरफ अँधेरा  नज़र आने  लगा  है .  ऐसे में यदि कोई 

आशा का  कोई सूर्य  हमारे  पास है जो  भारत के सम्मान और स्वाभिमान  को 

पूरे वैभव के साथ पुनः स्थापित  कर सके तो वो सिर्फ़ और सिर्फ़  नरेन्द्र भाई मोदी 

है .इसलिए  सभी जागरूक  और  देशभक्त नागरिकों को चाहिए कि वे दलगत 

राजनीति से ऊपर उठ कर  अब राष्ट्रहित में श्री मोदी को  बहुमत से मुल्क़ की 

बागडोर सौंपे .


परन्तु  नरेन्द्र मोदी को देश बचाने व चलाने की ज़िम्मेदारी  देनी है तो अभी  


दीजिये,  यही  समय है  उसको अवसर देने का . इतना विलम्ब न करें जितना 

अटल बिहारी वाजपेयी के लिए कर दिया था . शेर के  बूढा होने का इन्तेज़ार मत 

कीजिये,,,,,,,,,,,,,,, हमें एक योद्धा कप्तान की ज़रूरत है, वयोवृद्ध और लाचार 

शासक की नहीं .

जय हिन्द 



इंग्लैण्ड को उसके घर में रौंद कर, भारत ने किया चैम्पियन ट्रॉफी पर कब्ज़ा .. बधाई बधाई बधाई


सृष्टि के स्टेडियम में, 

धरती की पिच पर, 


श्वास श्वास ओवर है, प्राण का विकेट है  



काल गेंदबाज़ और 


देह बल्लेबाज़ है जी, 


अम्पायर धर्मराज,  कर्म रन  रेट है  



फ़ील्डिंग बीमारियों ने, 


रखी है सम्हाल और 


विकेट कीपिंग पर यमराज सेट है 



एक  दिन गिल्लियों का, 


उड़ना सुनिश्चित है,  


ऐसा लगता है मानो जीवन  क्रिकेट है 



-अलबेला खत्री


जय हिन्द 



चलो रक्तदान करें ....... आज 14 जून अर्थात विश्व रक्तदान दिवस है





अहमदाबादी रसियाओं द्वारा गुजरात के आँगन में पंजाब के पुत्तरों का ज़ोरदार अभिनन्दन




गरमी तो बहुत थी उस दिन ....  आग बरस रही थी आकाश से ....परन्तु 


अहमदाबाद - गांधीनगर के मध्य स्थित  नारायणी रिसोर्ट में 2 7 मई  की

 दोपहर 2 बजे और इस्कोन मेगा मॉल में शाम 6 बजे जो कुछ देखने को 

मिला वह  अद्भुत और अभिनव था ही नयनो को शीतलता  प्रदान करने वाला 

भी था .


Lux  Cozi  द्वारा अपने वितरकों और विक्रेता बंधुओं के लिए  आयोजित इन 


शानदार आयोजनों में फ़िल्म यमला   दीवाना 2 के तमाम सितारे मौजूद रहे 

और उन्होंने  लोगों को   मस्ती बांटी . खासकर सन्नी दयोल और बॉबी दयोल 

ने गुजराती में  और रशियन अभिनेत्री  क्रिस्टीना ने हिंदी में  बोल कर तो गज़ब 

ही ढा  दिया . नेहा शर्मा  की  मृदुल मुस्कान पर  फ़िदा अहमदाबादी  इन सितारों 

से मिल कर, उनसे बात करके,  फोटो  खिंचवाके और  सन्नी के हाथों  

एप्रिशिएशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर के  मंत्रमुग्ध हो गए .


इन भव्य समारोहों का  मंच सञ्चालन मैंने किया  और खूब जम  कर किया . 


हँसा हँसा के लोटपोट कर दिया सब को ....हालांकि मेरे मित्र  राजकुमार भक्कड़ 

 ने भी माइक पर आ कर खूब चुटकियाँ ली . जबकि  lux cozi के  प्रबंध निदेशक 

अशोक तोदी ने अपने सारगर्भित सम्बोधन में  बहुत सी अच्छी  बातें कहीं .


जय हिन्द ! 













 

अब तो सारी दुनिया ने माना, हिन्दुस्तान है मोदी का दीवाना - हास्य कवि अलबेला खत्री


अब तो सारी दुनिया ने माना, हिन्दुस्तान है मोदी का दीवाना - हास्य कवि अलबेला खत्री


मातृ दिवस पर हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा जगतमाता आदिशक्ति हिंगुलाज को श्री हिंगुलाज चालीसा की संगीतमय भेन्ट ....




मातृ दिवस के इस पावन प्रात में  अपनी माता समेत समस्त माताओं को सादर

प्रणाम निवेदित करता हूँ  और कामना करता हूँ कि मेरी वजह से उन्हें कभी किसी

भी प्रकार का किंचित भी कष्ट न पहुंचे . उनके जीवन में सदा सुख का सरस  उजाला

और  आत्मिक आनंद  का बोलबाला  रहे .


आज के मधुर अवसर पर ही  समस्त जगत की माता और अपनी कुलदेवी आदिशक्ति

माँ हिंगुलाज के चालीसा निर्माण का काम भी आरम्भ कर रहा हूँ . आशा है  माँ को

और जगत माँ को मेरा प्रयास पसंद आएगा .

सभी मित्रों को हार्दिक प्रणाम

जय माँ हिंगुलाज



चालीस दिन के अमेरिका को अहमदाबाद के दिनों ने धो डाला ......


बहुत दिनों बाद आप सभी ब्लोगर बन्धुओं को नमस्कार करने का अवसर 

मिला है आज तो इसे व्यर्थ नहीं जाने दूंगा .....आप सभी को हार्दिक हार्दिक 

स्नेह स्मरण करके रहूँगा .


पिछले 40 दिनों से अमेरिका की यात्रा पर था और वहां बहुत सारे कार्यक्रमों 

के अलावा लम्बी यात्राओं, दोस्तों से मेलजोल  और मौजमस्ती  में अति व्यस्त 

होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ पाया लेकिन आज एक ऐसी घटना घटी कि  

"आना ही पड़ा सजना ....ज़ालिम है दिल की लगी ....." गाते हुए आ गया हूँ  


कहना ये चाहता हूँ कि  हमारे देश का कोई मुकाबला नहीं . "यहाँ के बन्दे 

अल्ला अल्ला, यहाँ का मौसम राम राम" 


40  दिन तक अमेरिका  में ठन्डे मौसम और प्रदूषण रहित वातावरण में रहने 

के कारण मेरे तन-बदन पर एक उजली सी चमक की परत चढ़ गयी थी . रंग 

गोरा सा हो गया था और त्वचा एक दम साफ़ हो गयी थी . ऐसा परिवर्तन अपनी 

देह में देख कर  मैं खुश था ...खुश क्या था, बल्लियों उछल रहा था . लेकिन 

अपना देश तो अपना देश है न भाई ! वह पराई चमक कब तक बर्दाश्त करता  

और क्यों करता ?  लिहाज़ा किराये के एक फ्लैट की तलाश में दो दिन तक ऑटो 

रिक्शा में बैठ कर अहमदाबाद  शहर में घूमा तो बाहरी मुल्लमा झट से उतर 

गया और फट से अपन अपने उसी रंग में आ गए ....हा हा हा हा 


ऐसी गरमी और ऐसी आग बरसाती धूप से सामना हुआ  कि रोम रोम से 

एक ही आवाज़ आई ....जय हिन्द ! 


-अलबेला खत्री 



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