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पहली पहली बार का मज़ा,,,,,,,,,,
कवियों को पहली पहली बार किसी जगह कवि-सम्मेलन करने का जो आनन्द आता है वह अनूठा होता है, अविस्मरणीय होता है और आत्मतुष्टिदायक भी होता है . यह मेरा सौभाग्य व माँ शारदा की अनुकम्पा ही है कि ऐसा आनन्द लूटने का अवसर मुझे अनेक बार मिला है, बार-बार मिला है . देश - विदेश में ऐसे कई संयोग बने जहाँ आयोजन करने वालों को यह भी पता नहीं था कि कवि सम्मेलन होता क्या है ? क्या कोई ड्रामा, नौटंकी, तमाशा या आर्केस्ट्रा जैसा होता है या शास्त्रीय संगीत जैसा ,,,,,,,,,,किष्किन्धा के गंगावती, कोलार गोल्ड फ़ील्ड, केरला के रमाडा, आंध्र के चिवपल्ली, कोंकण के एलोन इत्यादि जगहों पर तो आयोजकों ने विकल्प के तौर पर कवि गण के साथ साथ वहाँ के मिमिक्री या लोकल गायकों को भी बुला रखा था ताकि कवि सम्मेलन यदि न जमे तो दर्शकों को अन्य कलाओं से खुश किया जा सके - परन्तु कमाल है कि सभी जगह शानदार आयोजन हुए और तीन घंटों की जगह पांच पांच घंटे तक चले
खैर, ये सब तो अहिन्दी भाषी क्षेत्र थे, मज़ा तो ये है कि हिन्दी भाषी हरियाणा में दिल्ली के समीपवर्ती सांपला में भी पहली पहली बार योगेन्द्र मौदगिल के संयोजन में हमने ही कवि सम्मेलन किया था जो आज हर साल होता है
इसी शृंखला में ताज़ा नाम जुड़ा है गुजरात में वलसाड के पास पारडी का ,,,,,,,गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी की शाम वहाँ नगर पालिका द्वारा पहली पहली बार एक भव्य हिन्दी हास्य कवि सम्मेलन हुआ जिसमें दर्शकों से खचाखच भरा पण्डाल देर रात तक ठहाकों से गूंजता रहा और नरेंद्र बंजारा के मंच संचालन में सुदीप भोला, गोविन्द राठी, अलबेला खत्री व डॉ कार्तिक भद्रा की कविताओं ने महफ़िल लूट ली
मुख्या मेहमान धारासभ्य कनु भाई एम देसाई सिर्फ़ 10 मिनट के लिए आये थे, परन्तु ऐसे बैठे कि चार घंटे तक हिले भी नहीं, इसी प्रकार पालिका प्रमुख शरद एम देसाई तथा उप प्रमुख अनीता के पटेल समेत सभी माननीय पार्षद और अधिकारी भी आखिर तक जमे रहे - कविगण का भव्य सत्कार भी किया गया और उनकी कला को वाहवाही भी खूब मिली --और क्या चाहिए ?
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| hindi hasya kavi sammelan in pardi gujarat |
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| hindi hasyakavi sammelan in ahmedabad |
अपनेराम ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली
लो जी, "जब प्यार किया तो डरना क्या" वाले इस्टाइल में आज अपनेराम ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, भावी प्रधानमन्त्री के लिए सहयोग राशि भर दी, पार्टी फण्ड के लिए डोनेशन भी दे दिया और विभिन्न मदों में 1675 रूपया भी भर दिया
अब ये नहीं बताऊंगा कि किस पार्टी की सदस्यता के लिए ऑनलाइन फ़ॉर्म और पैसा भरा है -बताने की ज़रूरत भी क्या है, आपको सब मालूम ही है … हा हा
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ
aam aadmi nahin hoon main
मैं आज अपना सीना ठोक के कहता हूं कि मैं भारत गणतंत्र का नागरिक हूं। नागरिक इसलिए हूं क्योंकि नगर में रहता हूं और सीना इसलिए ठोक रहा हूं क्यूंकि एक तो इससे वक्ता की बात में वजन आ जाता है, दूसरे सीना भी अपना है और ठोकने वाले भी अपन ही हैं इसलिए किसी दूसरे की आचार संहिता भंग होने का डर नहीं है। हालांकि मैं सीने के बजाय पीठ भी ठोक सकता हूं, लेकिन ठोकूंगा नहीं, क्यूंकि एक तो वहां तक मेरा हाथ ठीक से नहीं पहुंचता, दूसरे ज्यादा ठुकाई होने से पीठ में दर्द हो सकता है और तीसरे मैं एक कलाकार हूं यार, कोई झाड़ूवाल टाइप नेता थोड़े न हूं जो अपने ही हाथों अपनी पीठ ठोकता रहूं।
सरकारी और गैर सरकारी सूत्र मुझे आम आदमी कह कर चिढ़ाते हैं जबकि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मैं कोई आम-वाम नहीं हूं। आम क्या, आलू बुखारा भी नहीं हूं, हां चाहो तो आलू समझ सकते हो क्योंकि एक तो मैं जमीन से जुड़ा हुआ हूं। दूसरे मेरी खाल इतनी पतली है कि कोई भी उधेड़ सकता है, तीसरे गरीब से गरीब और अमीर से अमीर, सभी मुझे एन्जॉय कर सकते हैं और चौथे हर मौसम में, हर हाल में सेवा के लिए मैं उपलब्ध रहता हूं। न मुझे गर्मी मार सकती है न सर्दी, लेकिन मुझे आलू नहीं, आम कहा जाता है और इसलिए आम कहा जाता है ताकि मेरे रक्त को रस की तरह पिया जा सके। हालांकि ये रक्त पिपासु भी कोई बाहर वाले नहीं हैं, अपने ही हैं, बाहर वाले तो जितना पी सकते थे, पीकर पतली गली से निकल लिए, अब अपने वाले बचाखुचा सुड़कने में लगे हैं। मजे की बात ये है कि बाहर वाले तो कुछ छोड़ भी गए, अपने वाले पठ्ठे तो एक-एक बून्द निचोड़ लेने की जुगत में है।
कल रात एक भूतपूर्व सांसद से मुलाकात हो गई। हालांकि वे भूतपूर्व होना नहीं चाहते थे लेकिन होना पड़ा क्योंकि भूतकाल में उन्होंने एक अभूतपूर्व काम कर किया था। (लोगों से रुपया लेकर संसद में सवाल पूछने का) जिसके चलते वे एक स्टिंग आप्रेशन की चपेट में आ गए और भूत हो गए। मैंने पूछा, 'भूतनाथजी, ये नेता लोग जनता को आम जनता क्यों कहते हैं? वो बोले, वैसे तो बहुत से कारण हैं लेकिन मोटा-मोटी यूं समझो कि आम जो है, वो फलों का राजा है और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही असली राजा होती है, शासक तो बेचारा सेवक होता है। दूसरा कारण ये है कि आम का सीजन, आम चुनाव की तरह कुछ ही दिन चलता है, बाकी समय तो बेचारा लापता ही रहता है, लेकिन तीसरा और सबसे खास कारण ये है कि आम स्वादिष्ट बहुत होता है। इसे खाने में मजा बहुत आता है, चाहे किसी प्रान्त का हो, किसी जात का हो, किसी रंग का हो अथवा किसी भी साइज का हो।
आम के आम और गुठलियों के दाम तो आपने सुना ही होगा, जनता को आम कहने का एक कारण ये भी है कि इसे खाने में कोई खतरा नहीं क्यूंकि न तो इनमें कीड़े पड़ते है, न इसकी गुठली में कांटे होते हैं और न ही इनसे अजीर्ण होता है, अरे भाई आम तो ऐसी चीज है कि लंगड़ा हो, तो भी चलता है। मैंने कहा, नेताजी आप एक बात तो बताना भूल ही गए कि आम हर उम्र में उपयोगी होता है।
कच्चा हो तो अचार डालने के काम आता है, पका हुआ रसीला हो तो काट-काट के खाया जा सकता है और बूढ़ा, कमजोर व पिलपिला हो तो चूसने के काम आता है लेकिन सावधान विश्वासघाती नेताजी..अब आदमी को आम आम उसका रक्त पीना छोड़ दो, क्योंकि वो अब तुम्हारी कुटिलता को समझ गया है। जिस दिन नरेन्द्र मोदी जैसा कोई दबंग बन्दा राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए दिल्ली में आ जाएगा उस दिन आप जैसे स्वार्थी, मक्कार और दुष्ट नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम, किरिया क्रम में बदल जाएगा। इसलिए सुधर जाओ, अब भी मौका है।
उसने मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरा। मैंने कहा, घूरते क्या हो? समय बदल चुका है। जिस जनता को तुम पांव की जूती समझते थे वो अब जूते चलाना सीख गई है। इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ वरना ऐसी ऑफ लाइन पर डाल दिए जाओगे जहां से आगे कोई रास्ता नहीं होगा आपके पास। विश्र्वास नहीं होता तो जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को ही देख लो जो अब घर बैठ गए हैं। नेताजी मेरी बातों से उखड़ गए और चलते बने। मैं भी अपने काम में व्यस्त हो गया, लेकिन मेरे मन में एक विजेता जैसी सन्तुष्टि है। मैंने सिद्ध कर दिया कि मैं कोई आम नहीं हूं।
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
मैं आज अपना सीना ठोक के कहता हूं कि मैं भारत गणतंत्र का नागरिक हूं। नागरिक इसलिए हूं क्योंकि नगर में रहता हूं और सीना इसलिए ठोक रहा हूं क्यूंकि एक तो इससे वक्ता की बात में वजन आ जाता है, दूसरे सीना भी अपना है और ठोकने वाले भी अपन ही हैं इसलिए किसी दूसरे की आचार संहिता भंग होने का डर नहीं है। हालांकि मैं सीने के बजाय पीठ भी ठोक सकता हूं, लेकिन ठोकूंगा नहीं, क्यूंकि एक तो वहां तक मेरा हाथ ठीक से नहीं पहुंचता, दूसरे ज्यादा ठुकाई होने से पीठ में दर्द हो सकता है और तीसरे मैं एक कलाकार हूं यार, कोई झाड़ूवाल टाइप नेता थोड़े न हूं जो अपने ही हाथों अपनी पीठ ठोकता रहूं।
सरकारी और गैर सरकारी सूत्र मुझे आम आदमी कह कर चिढ़ाते हैं जबकि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मैं कोई आम-वाम नहीं हूं। आम क्या, आलू बुखारा भी नहीं हूं, हां चाहो तो आलू समझ सकते हो क्योंकि एक तो मैं जमीन से जुड़ा हुआ हूं। दूसरे मेरी खाल इतनी पतली है कि कोई भी उधेड़ सकता है, तीसरे गरीब से गरीब और अमीर से अमीर, सभी मुझे एन्जॉय कर सकते हैं और चौथे हर मौसम में, हर हाल में सेवा के लिए मैं उपलब्ध रहता हूं। न मुझे गर्मी मार सकती है न सर्दी, लेकिन मुझे आलू नहीं, आम कहा जाता है और इसलिए आम कहा जाता है ताकि मेरे रक्त को रस की तरह पिया जा सके। हालांकि ये रक्त पिपासु भी कोई बाहर वाले नहीं हैं, अपने ही हैं, बाहर वाले तो जितना पी सकते थे, पीकर पतली गली से निकल लिए, अब अपने वाले बचाखुचा सुड़कने में लगे हैं। मजे की बात ये है कि बाहर वाले तो कुछ छोड़ भी गए, अपने वाले पठ्ठे तो एक-एक बून्द निचोड़ लेने की जुगत में है।
कल रात एक भूतपूर्व सांसद से मुलाकात हो गई। हालांकि वे भूतपूर्व होना नहीं चाहते थे लेकिन होना पड़ा क्योंकि भूतकाल में उन्होंने एक अभूतपूर्व काम कर किया था। (लोगों से रुपया लेकर संसद में सवाल पूछने का) जिसके चलते वे एक स्टिंग आप्रेशन की चपेट में आ गए और भूत हो गए। मैंने पूछा, 'भूतनाथजी, ये नेता लोग जनता को आम जनता क्यों कहते हैं? वो बोले, वैसे तो बहुत से कारण हैं लेकिन मोटा-मोटी यूं समझो कि आम जो है, वो फलों का राजा है और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही असली राजा होती है, शासक तो बेचारा सेवक होता है। दूसरा कारण ये है कि आम का सीजन, आम चुनाव की तरह कुछ ही दिन चलता है, बाकी समय तो बेचारा लापता ही रहता है, लेकिन तीसरा और सबसे खास कारण ये है कि आम स्वादिष्ट बहुत होता है। इसे खाने में मजा बहुत आता है, चाहे किसी प्रान्त का हो, किसी जात का हो, किसी रंग का हो अथवा किसी भी साइज का हो।
आम के आम और गुठलियों के दाम तो आपने सुना ही होगा, जनता को आम कहने का एक कारण ये भी है कि इसे खाने में कोई खतरा नहीं क्यूंकि न तो इनमें कीड़े पड़ते है, न इसकी गुठली में कांटे होते हैं और न ही इनसे अजीर्ण होता है, अरे भाई आम तो ऐसी चीज है कि लंगड़ा हो, तो भी चलता है। मैंने कहा, नेताजी आप एक बात तो बताना भूल ही गए कि आम हर उम्र में उपयोगी होता है।
कच्चा हो तो अचार डालने के काम आता है, पका हुआ रसीला हो तो काट-काट के खाया जा सकता है और बूढ़ा, कमजोर व पिलपिला हो तो चूसने के काम आता है लेकिन सावधान विश्वासघाती नेताजी..अब आदमी को आम आम उसका रक्त पीना छोड़ दो, क्योंकि वो अब तुम्हारी कुटिलता को समझ गया है। जिस दिन नरेन्द्र मोदी जैसा कोई दबंग बन्दा राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए दिल्ली में आ जाएगा उस दिन आप जैसे स्वार्थी, मक्कार और दुष्ट नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम, किरिया क्रम में बदल जाएगा। इसलिए सुधर जाओ, अब भी मौका है।
उसने मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरा। मैंने कहा, घूरते क्या हो? समय बदल चुका है। जिस जनता को तुम पांव की जूती समझते थे वो अब जूते चलाना सीख गई है। इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ वरना ऐसी ऑफ लाइन पर डाल दिए जाओगे जहां से आगे कोई रास्ता नहीं होगा आपके पास। विश्र्वास नहीं होता तो जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को ही देख लो जो अब घर बैठ गए हैं। नेताजी मेरी बातों से उखड़ गए और चलते बने। मैं भी अपने काम में व्यस्त हो गया, लेकिन मेरे मन में एक विजेता जैसी सन्तुष्टि है। मैंने सिद्ध कर दिया कि मैं कोई आम नहीं हूं।
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| hasya kavi sammelan ahmedabad with albela khatri |
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| hasya kavi sammelan ahmedabad with albela khatri |
शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी
काश !
गणतन्त्र दिवस समारोह में आज इन झाँकियों का प्रदर्शन भी होता :
# अमर शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी
# 26 -01 -2001 के प्रलयंकारी भूकम्प से लहूलुहान हो चुके गुजरात को अपने पुरुषार्थ से उन्नति के अभिनव शिखर तक पहुंचाते हुए नरेन्द्र मोदी के अथक परिश्रम की झाँकी
# 2 G, DLF, CWG, कोयला इत्यादि के महाघोटालों से भारत की जनता को लूटते हुए कांग्रेसियों के काले चेहरों की झाँकी
# दिल्ली में रातदिन हो रहे सामूहिक बलात्कारों और हत्याकाण्डों की झाँकी
# मुजफ्फरनगर के दंगों पर बेशर्मी का नंगा नाच करती यूपी सरकार द्वारा आयोजित सैफई के रासरंगों की झाँकी
____आपका क्या ख्याल है ?
अलबेला खत्री
मेनका गांधी ने नरेन्द्र मोदी को शेर और राहुल गांधी को चिड़िया बताया है, ये बहुत गलत बात है
मेनका गांधी ने आज नरेन्द्र मोदी को शेर और राहुल गांधी को चिड़िया बताया है. ये बहुत गलत बात है. मुझे उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति है और मैं इस पर अपना क्रोधपूर्ण विरोध दर्ज़ करता हूँ क्योंकि चिड़िया तो मासूम होती है और दया की पात्र होती है जबकि कांग्रेस तो घाघ है, मक्कार है और चालाक है . किसी कांग्रेसी को चिड़िया कहना चिड़िया पर अत्याचार करना है ये बात मेनका गांधी को नहीं भूलना चाहिए
मेरी आँखों से देखा जाये तो मोदी अगर शेर है तो राहुल लोमड़ है, मोदी हाथी है तो राहुल लक्कड़बग्घा है, मोदी गरुड़ है तो राहुल सपोला है और मोदी अगर कप्तान है तो राहुल चपरासी ………हा हा हा
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
भारतीय जनता पार्टी में अनुभवी और ईमानदार राजनेताओं की कार्यकुशल कतार है
--------आइये, एक आंकलन करें :
भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण अडवाणी, नरेन्द्र मोदी, शिवराजसिंह चौहान, डॉ रमन सिंह, वसुन्धरा राजे सिन्धिया, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू, रविशंकर प्रसाद, मुख़्तार अब्बास नक़वी, कल्याण सिंह, जसवंतसिंह, राजीव प्रताप रूड़ी, शाहनवाज़ हुसैन, नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर, अनंत कुमार, गोपीनाथ मुण्डे, किरीट सौमैया, उमा भारती, यशवंत सिन्हा, नवजोतसिंह सिद्धू, कीर्ति आज़ाद, स्मृति ईरानी, रामदास अग्रवाल, सत्यनारायण जटिया, कलराज मिश्र, लालजी टंडन, अमित शाह, विनय कटियार, बलबीर पुंज एवं नज़मा हेपतुल्ला जैसे अनुभवी और ईमानदार राजनेताओं की कार्यकुशल कतार है
कांग्रेस में भी सोनिया गांधी के पीछे अनेक अनुभवी, कार्यकुशल और लोकप्रिय नेताओं के साथ साथ कई ऐसे घाघ लोगों की लम्बी फ़ौज है जो राज हथिया सकते हैं, चला सकते हैं और जैसे तैसे ये भ्रम बनाये रख सकते हैं कि देश में सरकार नाम की भी कोई चीज़ है
लेकिन आआपा के पास क्या है ?
ले दे के एक चेहरा है अरविन्द केजरीवाल और दूसरा है मनीष सिसोदिया
दिल्ली में तो जनादेश के विरुद्ध जा कर कांग्रेस से ठग़बन्धन कर लिया और सरकार बना ली लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए 700 लीटर पानी से मुंह धोने वालो ! पूरा देश दिल्ली नहीं है जो तुम्हारे झांसे में आ जाएगा . आज तुम कितना भी दिग्भ्रमित कर दो युवा वर्ग को, लेकिन जिस दिन इनको आपकी असलियत समझ में आएगी, तुम्हारा झाड़ू तिनके तिनके बिखर जाएगा
लोकतंत्र के महोत्सव में जिस देव की पूजा होती है वो है वोट, हमारा वोट ! इस वोट को सोच समझ कर काम में लें और इस बार सिर्फ और सिर्फ देश के हित में नरेन्द्र भाई मोदी को दिल्ली की बागडोर सौंपें
जय हिन्द !
रमेश लोहिया

भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण अडवाणी, नरेन्द्र मोदी, शिवराजसिंह चौहान, डॉ रमन सिंह, वसुन्धरा राजे सिन्धिया, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू, रविशंकर प्रसाद, मुख़्तार अब्बास नक़वी, कल्याण सिंह, जसवंतसिंह, राजीव प्रताप रूड़ी, शाहनवाज़ हुसैन, नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर, अनंत कुमार, गोपीनाथ मुण्डे, किरीट सौमैया, उमा भारती, यशवंत सिन्हा, नवजोतसिंह सिद्धू, कीर्ति आज़ाद, स्मृति ईरानी, रामदास अग्रवाल, सत्यनारायण जटिया, कलराज मिश्र, लालजी टंडन, अमित शाह, विनय कटियार, बलबीर पुंज एवं नज़मा हेपतुल्ला जैसे अनुभवी और ईमानदार राजनेताओं की कार्यकुशल कतार है
कांग्रेस में भी सोनिया गांधी के पीछे अनेक अनुभवी, कार्यकुशल और लोकप्रिय नेताओं के साथ साथ कई ऐसे घाघ लोगों की लम्बी फ़ौज है जो राज हथिया सकते हैं, चला सकते हैं और जैसे तैसे ये भ्रम बनाये रख सकते हैं कि देश में सरकार नाम की भी कोई चीज़ है
लेकिन आआपा के पास क्या है ?
ले दे के एक चेहरा है अरविन्द केजरीवाल और दूसरा है मनीष सिसोदिया
दिल्ली में तो जनादेश के विरुद्ध जा कर कांग्रेस से ठग़बन्धन कर लिया और सरकार बना ली लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए 700 लीटर पानी से मुंह धोने वालो ! पूरा देश दिल्ली नहीं है जो तुम्हारे झांसे में आ जाएगा . आज तुम कितना भी दिग्भ्रमित कर दो युवा वर्ग को, लेकिन जिस दिन इनको आपकी असलियत समझ में आएगी, तुम्हारा झाड़ू तिनके तिनके बिखर जाएगा
लोकतंत्र के महोत्सव में जिस देव की पूजा होती है वो है वोट, हमारा वोट ! इस वोट को सोच समझ कर काम में लें और इस बार सिर्फ और सिर्फ देश के हित में नरेन्द्र भाई मोदी को दिल्ली की बागडोर सौंपें
जय हिन्द !
रमेश लोहिया

सिल्कसिटी सूरत की कद्दावर हस्ती रमेश लोहिया
सिल्कसिटी सूरत की कद्दावर हस्ती रमेश लोहिया
एक तरफ जहाँ राजनैतिक स्तर पर चारों तरफ लूट मची है, ऐसे भीषण समय में भी समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने देश और समाज के उत्थान में जुटे हुए हैं तथा तन मन धन से कार्य कर रहे हैं - ऐसे ही एक ज़बरदस्त व्यक्तित्व हैं सूरत के प्रतिष्ठित व्यापारी व समाजसेवी श्री रमेश लोहिया जो वैश्य समाज की राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर की अनेक संस्थाओं के माध्यम से लगातार काम कर रहे हैं . इनकी संगठन शक्ति और हर काम में कौशल दिखाने का जज़बा कमाल है
सूरत निवासी वरिष्ठ एवं सक्रिय समाजसेवी रमेश लोहिया के विराट व्यक्तित्व व कृतित्व तथा सामयिक गतिविधियों को रेखांकित करने के लिए मैंने यह नया ब्लॉग आरम्भ किया है,
http://rameshlohia.blogspot.in/2014/01/blog-post.html
आशा है मेरे तमाम पाठक मित्र इनके उर्जस्वित व्यक्तित्व को देखेंगे, परखेंगे, सराहेंगे और प्रेरणा प्राप्त करेंगे
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| ramesh lohia in action with antar-rashtriy vaish maha sammelan surat |
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| ramesh lohiya in surat with his family |
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| ramesh lohia on mice at the gateway hotel surat |
आदरणीय मोदीजी, यह अभी नहीं तो कभी नहीं का खेल है, जो जीता वही सिकन्दर होगा
सम्मान्य श्री नरेन्द्र मोदीजी,
मुख्यमन्त्री,
गुजरात शासन
प्रसंग : लोकसभा चुनाव में हानिकारक परिणाम की चेतावनी
सन्दर्भ : येदुरप्पा जैसे भ्रष्ट ( अगर वे सचमुच दोषी हैं तो ) लोगों का समर्थन
आदरणीय मोदीजी,
ये दौर आपका है, आने वाला समय आपका है और आप ही हैं जो माँ भारती के आंसू पोंछ सकते हैं इसलिए पूरा देश आपके साथ है और आपके नेतृत्व में भारत विश्व की महाशक्ति बनने का सपना देख रहा है - कोई बड़ी बात नहीं कि इस बार आपको व आपकी पार्टी को 300 से भी अधिक सीटों के साथ सत्ता का सिंहासन प्राप्त हो, लेकिन सावधानी हटी तो दुर्घटना घटने का खतरा भी याद रखना होगा
मैं यह तो नहीं जानता कि आपकी पार्टी यानी भाजपा की क्या लाचारी अथवा विवशता है जो येदुरप्पा जैसे तथाकथित रूप से भ्रष्ट लोगों को पुनः पार्टी में शामिल कर रही है लेकिन मैं यह ज़रूर जानता हूँ कि ऐसे लोग न अपने देश के हित में हुए हैं न ही अपनी पार्टी के हित में रहेंगे लिहाज़ा अगर आपको सचमुच देश का भला करने के लिए प्रधानमन्त्री बनने का ख्याल आया है तो सर्वप्रथम ऐसे लोगों को चिमटी से पकड़ पकड़ कर पार्टी से बाहर निकालिये जिनकी छवि खराब है और जो दागी कहलाते हैं तथा अच्छे लोगों को ढूंढ़ ढूंढ़ कर पार्टी में सम्मिलित कीजिये ताकि आपका रथ रास्ते में पंक्चर नहीं हो
जब आपके पास अपनी ख़ुद की उज्ज्वल छवि है, शक्ति है, सामर्थ्य है और अपार लोकप्रियता के साथ साथ गुजरात में किये गए अप्रतिम विकास के प्रमाण-पत्र हैं तो इन नामुरादों की ज़रूरत ही क्या है आपको ?
यह पत्र मैं आपको इसलिए मेल कर रहा हूँ क्योंकि आप इस समय अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं एवं उपलब्धियों की सीढ़ी के अन्तिम डण्डे पर खड़े हैं - यदि एक सीढ़ी और चढ़ गए तो छत पर पहुँच जायेंगे, यानी मन्ज़िल पा लेंगे परन्तु भगवान् न करे, अगर आखरी डंडे से भी फ़िसले, तो सीधे ज़मीन पर नज़र आयेंगे - रास्ते में कोई रोकने वाला नहीं मिलेगा और सच पूछो तो भ्रष्ट सदस्य किसी भी संगठन के लिए फ़िसलन ही पैदा करते हैं - आप गिरें, उठें, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि मुझे तो अन्य बड़े कवियों की तरह सरकार से न तो प्लॉट, फ़्लैट अथवा कोई एजेन्सी चाहिए, न ही किसी प्रकोष्ठ की अध्यक्षी, पद अथवा राजकीय पुरस्कार की अभीप्सा है, परन्तु देश की जनता आपसे आस लगाए बैठी है, अगर आप अपने मिशन में कामयाब न हुए तो जनता के अरमान आँसुओं में बह जाएंगे -
आदरणीय, यह अभी नहीं तो कभी नहीं का खेल है, जो जीता वही सिकन्दर होगा, हारने वाले की हालत तो सद्दाम हुसैन जैसी होने वाली है, यह अभी से दीख रहा है क्योंकि राजनैतिक स्वार्थ अब इतने अधिक हावी हो गए हैं हरेक पार्टी पर कि विरोधी विचारधारा का प्रत्येक व्यक्ति अब दुश्मन नज़र आने लगा है - यह दुर्भाग्यपूर्ण है परन्तु सच है
आपका प्रशंसक, समर्थक और प्रबल हितेच्छु होने के नाते आपको सावधान कर रहा हूँ - चुनाव में जीत हो या हार, कोई फ़र्क नहीं पड़ता - अपनी कथनी और करनी को एक रखते हुए हार भी मिले तो भी उसमें नैतिक जीत महकती है परन्तु अपने ज़मीर को दाँव पर लगा कर जीत भी मिले तो उसमें आत्मिक हार की बदबू आती है
एक मुख्यमन्त्री के रूप में आपने बेहतरीन काम कर के जो वैश्विक यश अर्जित किया है वह तो कई लोगों को प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति बन कर भी नहीं मिलता ,,,,,आपसे प्रार्थना है कि इतने वर्षों में अर्जित किया हुआ यश चन्द सीटों की कीमत पर मत बेचिए …… आगे आपकी मर्ज़ी, मैं कौन होता हूँ आपकी खीर में अपना चम्मच चलाने वाला
आप विजयी हों,यशस्वी हों, दीर्घायु हों और भारत के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हों, ऐसी शुभकामना
जय हिन्द !
अलबेला खत्री

| आप विजयी हों,यशस्वी हों, दीर्घायु हों और भारत के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हों |
दिल्ली वालो! अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता
सावधान ! ख़बरदार !! होशियार !!!
दिल्ली के मन्त्रियों को भले ही सुरक्षा की ज़रूरत न हो, परन्तु दिल्ली के अवाम को तो अब अपने और अपने बच्चों के लिए सुरक्षा मांग ही लेनी चाहिए क्योंकि मज़ाक मज़ाक में उसने ऐसे लोगों को हुक्मरान बना दिया है जिनका कोई भरोसा नहीं कि कब, किस मासूम को खेलने के अपराध में जेल जाना पड़ जाए -
हा हा हा पता नहीं कब किस बाप को इसलिए जेल जाना पड़ जाए कि उसने ऐसी अपराधी औलाद पैदा की कि जो क्रिकेट खेलती है और अपनी गेन्द से मन्त्रीजी की गाड़ी के काँच तिड़का देती है
दिल्ली वालो! अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता
राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग
दो दिन में दिखला दिया, अपना असली रंग
अपना असली रंग, मुखौटा उतर गया है
आम होगया ख़ास, ज़ेहन तक असर गया है
पाई पहली बार, कार जब नौ-दस लाखी
भूल गई औक़ात, लाज खूंटी पर राखी
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग |
अन्ना हज़ारे अपनी समाजसेवी धोती उतार कर कांग्रेस या आआपा का पायजामा पहन लेंगे
आने वाले दिनों में हम ऐसे दृश्य देखेंगे :
# बाबा रामदेव समेत अनेक साधू संत देशहित में नरेंद्र मोदी के लिए वोट मांगेंगे
# अन्ना हज़ारे अपनी समाजसेवी धोती उतार कर कांग्रेस या आआपा का पायजामा पहन लेंगे और देश भर में इनके समर्थन में वोट मांगेंगे + हो सकता है कांग्रेस के इशारे पर वे सभी पार्टियों को भाजपा के विरुद्ध एकजुट होने के लिए रामलीला मैदान में आमरण अनशन भी करदें
# जामा मस्जिद से सभी मोमिनों के नाम एक फतवा जारी होगा कि वे अपना वोट चाहे जिसे दें लेकिन नरेन्द्र मोदी एंड पार्टी को न दें क्योंकि भाजपा को वोट देना हराम है
# अरविन्द केजरीवाल एंड पार्टी को अनामी फोन आयेंगे जिसमे उन्हें तथाकथित रूप से धमकियाँ दी जाएंगी - आम आदमी के हित में, मजबूर हो कर दिल्ली के सभी मन्त्री सुरक्षा स्वीकार कर लेंगे
# राजीव गांधी फाउंडेशन का प्रियदर्शिनी अवार्ड अरविन्द केजरीवाल को मिलेगा
# रांकांपा के कई नेता भाजपा में शामिल हो जायेंगे और नरेन्द्र मोदी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे
# मुलायम सिंह पूर्णतः कठोर हो जायेंगे व तीसरा मोर्चा बना कर अल्पसंख्यकों के सारे वोट खींच लेंगे, बाद में जो भी अच्छी कीमत देगा उसे बेच देंगे
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
इसरो एवं भारत के वैज्ञानिकों ने आज देश का मस्तक और ऊंचा कर दिया
इसरो एवं भारत के वैज्ञानिकों ने आज देश का मस्तक और ऊंचा कर दिया - GSLV -D5 के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत ने पूर्ण स्वाभिमान से यह घोषणा कर दी है कि भारत अब इतना आगे बढ़ गया है कि स्वनिर्मित क्रायोजेनिक इन्जिन से न केवल GSLV जैसे अपने बड़े रॉकेट लॉन्च कर सकता है बल्कि अन्य देशों के लिए भी मदद कर सकता है
इधर चैनल वाले सास बहू की साज़िशें दिखाते रहे, भाजपा, इनका और आआपा वाले अपने विरोधियों को गरियाते रहे, उधर देश के सुपूत देश की ध्वजा को आकाश में फहराते रहे ,,,
सलामी सलामी सलामी हमारे वैज्ञानिकों को
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
कम से कम भारतीय जनमानस को ज़लील तो न करते विदेशी भाषा बोल कर - आपको ज़रा भी शर्म नहीं आयी हिंदी का जवाब अंग्रेजी में देते हुए ?
प्रति,
श्री श्री डॉ मनमोहन सिंहजी,
माननीय प्रधानमन्त्री,
भारत सरकार
प्रसंग : हार्दिक शर्म व आत्मिक दुःख की अभिव्यक्ति
सन्दर्भ : आज का आपका संवाददाता सम्मेलन
महोदय,
एक भारतीय होने के नाते मेरे लिए अत्यन्त शर्म एवं गहरी पीड़ा का विषय है कि आप जैसा झूठा और बनावटी व्यक्ति मेरे देश का प्रधानमंत्री है. बचपन से ही सरदारों के मोहल्ले में रहने के कारण मैं भली भान्ति जानता हूँ कि सरदार कितने सच्चे, दिलेर और देशभक्त होते हैं लेकिन आपने तो सरदारों के वैश्विक यश को ही दाव पर लगा दिया सरदारजी ! आपने दिल्ली में कांग्रेसियों द्वारा कराये गए सिखों के क़त्लेआम पर आज गर्व से कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए बहुत कुछ किया गया है और उनसे माफ़ी भी मांग ली गयी है.
हुज़ूर, और किस किस से माफ़ी मांग ली है आपने ? भोपाल गैस काण्ड के लाखों पीड़ितों से मांग ली या उसके लिए ज़िम्मेदार यूनियन कार्बाइड से मांग ली ? मुम्बई पर पाकिस्तानी हमले में मारे गए लोगों से मांग ली या मुजफ्फरनगर में घर से बेघर हुए दंगापीड़ितों से मांग ली ? सरहद पर जिनका सर काट कर लोग पाकिस्तान ले गए उनके परिवारों से मांग ली या रोज़ाना लाखों की संख्या में काटे जा रहे गौवंश से माफ़ी मांग ली ? और जनाब, क्या माफ़ी मांग लेने से पीड़ित परिवारों के कलेजे की जलन शांत हो गयी होगी ? माना कि आप प्रधानमन्त्री हैं लेकिन कुछ तो इन्सानियत आप में भी होगी, आज थोड़ा उसका प्रदर्शन भी कर देते
आप से जो सवाल हिन्दी में पूछे गए, उनके भी जवाब आपने अंग्रेज़ी में दिए - इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गुलाम की अपनी कोई भाषा नहीं होती - जैसा सिखाया जाता है वैसा ही बोलना पड़ता है - अरे हिन्दी नहीं आती तो उर्दू में दे देते, पंजाबी में दे देते, कम से कम भारतीय जनमानस को ज़लील तो न करते विदेशी भाषा बोल कर - आपको ज़रा भी शर्म नहीं आयी हिंदी का जवाब अंग्रेजी में देते हुए ? अफ़सोस है, बहुत अफ़सोस है, एक तरफ अटल बिहारी वाजपेयी संयुक्त राष्ट्र संघ में भी हिन्दी भाषी रहे और एक तरफ आप …शेम शेम शेम
आपने प्रलाप किया कि नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमन्त्री बन गए तो देश का विनाश हो जायेगा ---बहुत अच्छे -- क्या कहने ! जिस मुख्यमन्त्री ने अपने शासन में विकास और उन्नति के गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित कर दिए उसके प्रधानमन्त्री बनने से देश का विनाश हो जाएगा और आप व आप जैसे अन्य लोगों ने भ्रष्टाचार, अनाचार, महंगाई व अमानवीय कृत्यों के जो गंदे नाले बहाये हैं उससे देश का विकास होगा ?
नरेन्द्र मोदी कोई सगे सम्बन्धी नहीं है मेरे, जो उनका गौरवगान करूँ लेकिन मैंने उनके राज में गुजरात को बदलते हुए देखा है इसलिए डंके की चोट पर कह सकता हूँ कि वो अगर एक बार प्रधानमन्त्री बन गए तो पूरा देश चमक उठेगा - चहक उठेगा
आप गाय से ज़यादा गे के अधिकारों की चिन्ता करते हैं, आपको महंगाई घटाने के बजाय सेंसेक्स को बढ़ाने की फिक्र लगी रहती है - ये अच्छी बात नहीं है
आपने जनता को रुलाया है सरदारजी, अगर देश की रोती-बिलखती जनता की बददुआओं में ज़रा भी असर हुआ तो ऊपर वाला आपको रुलाएगा और ऐसा रुलाएगा कि आंसू पोंछने वाला भी कोई न होगा
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे
सामग्री
बच्चा : एक राज अनैतिक पार्टी
दादा : दूसरी राज अनैतिक पार्टी
बादाम : विधायक
दांत : आत्मविश्वास
आंत : नीयत
जेब : दल की साख
बच्चा : दादाजी दादाजी, क्या आप बादाम खायेंगे ?
दादाजी : नहीं बच्चा, मैं तो बादाम खा ही नहीं सकता, मेरे दांत नहीं हैं
बच्चा : तब तो ठीक है, ये रखो मेरे आठ बादाम, बाद में वापिस ले लूँगा
दादाजी : लेकिन मुझे क्यों दे रहा है, जब वापिस ही लेने हैं तो अपने पास ही रख …
बच्चा : दादाजी, आपको इसलिए दे रहा हूँ, क्योंकि मेरी जेब फटी हुई है, कहीं गिर गए तो कोई और उठा लेगा, आपके पास रहेंगे तो मुझे ही वापिस मिलेंगे
दादाजी : लेकिन अगर मेरा मन मचल गया और मैं इन्हें कूट कूट कर खा गया तो ?
बच्चा : आप नहीं खाओगे, मैं जानता हूँ, क्योंकि आप सिर्फ़ दांतों से ही नहीं, आँतों से भी कमज़ोर हैं …किसी
तरह खा भी लिए तो हज़म नहीं कर पाओगे
_________दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे
_________और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे
क्या नाटकीय दृश्य का पात्र-परिचय लिखने की ज़रूरत है या आप समझ गए ?
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
बन्दर के हाथों में जो आया उस्तरा, अपना ही काम ये तमाम करेगा
साहित्यिक वेबसाइट ओ बी ओ बुक्स ऑन लाइन्स पर शानदार सृजन के साथ सम्पन्न 38 वें लाइव महा उत्सव में इस बार का प्रदत्त विषय था "पापा कहते हैं, बड़ा नाम करेगा" अन्तिम क्षणों में मैं भी इसमें शामिल हुआ और प्रदत्त विषय पर निम्नांकित सामयिक तुकबन्दी प्रस्तुत की :
पापा कहते हैं बड़ा काम करेगा
लंगड़ी गुठली को चौसा आम करेगा
हाथों में झाड़ू लिए घूम रहा है
अब ये सफ़ाई सुबहो-शाम करेगा
बन्दर के हाथों में जो आया उस्तरा
अपना ही काम ये तमाम करेगा
चेला गुरु की धोती खींच रहा है
अस्मत ये खादी की नीलाम करेगा
औरों के दीयों से जो तेल चुराये
वो क्या बिजली के सस्ते दाम करेगा
'अलबेला' गर इसे अभी रोक न दिया
जीना ये सबका हराम करेगा
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
ये उनका पराक्रम नहीं बल्कि मज़बूरी है, ऐसा करना उनके लिए निहायत ज़रूरी है
वो न खुद बनाएंगे न दूसरों की चलने देंगे
न तो खुद खेलेंगे, न दूसरों को खेलने देंगे
वे तो घुच्ची में मूत कर खेल ख़राब करेंगे
ये उनका पराक्रम नहीं
बल्कि मज़बूरी है
ऐसा करना उनके लिए
निहायत ज़रूरी है
क्योंकि वे लोग हरम के हिजड़े हैं
अर्थात रनिवास में रहने वाले किन्नर हैं
जो जानते तो हैं कि वो सब कैसे किया जाता है
लेकिन कर कुछ नहीं सकते
___अफ़सोस
___अफ़सोस
वोट लुटा तो दिल्ली के वोटर को आया चेत
अब पछताए होत है क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत
कोई रन फॉर यूनिटी में दौड़, देश को जोड़ रहा है
कोई अपने अहंकार में, ऊँची ऊँची छोड़ रहा है
झाड़ू वालों के झाँसे में आकर, दिल्ली का मतदाता
कमज़र्फ़ों को वोट थमा कर, अपना माथा फोड़ रहा है
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| narendra modi,narendra modi,narendra modi,narendra modi,narendra modi |
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| narendra modi,narendra modi,narendra modi,narendra modi,narendra modi |
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| sunny deol with albela khatri |
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| albela khatri in action |
हमारा लक्ष्य गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे
डिस्क्लेमर : इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं तथा इनका किसी भी जीवित अथवा मुर्दा व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है.
एक गरीब लोकतांत्रिक गाँव में भज्जू और कंगू नाम के दो अमीर पहलवान रहते थे. देश भर में जब भी उनका कहीं मुकाबला होता, हज़ारों लोग टिकट खरीद उसे देखते और अखाड़े में अपने अपने पसन्दीदा पहलवान का हौसला बढ़ाते. 50 साल तक ये खेल चलता रहा, दोनों पहलवान बूढ़े हो गए लेकिन मुकाबला बंद नहीं किया क्योंकि अब वे पहलवानी दिखाने के लिए नहीं बल्कि धन कमाने के लिए लड़ते थे . वैसे अंदर की बात यह है कि वे लड़ते तो केवल दिखावे मात्र के लिए थे - अन्दर ही अन्दर दोनों की मिलिभगत थी … एक बार यह जीतेगा तो दूसरी बार वह
इस बात का पता जब गाँव के एक पुलिस वाले खजलू को लगा कि दोनों मिले हुए हैं और मुकाबले के बहाने लोगों को चूतिया बना रहे हैं तो उसने इसका लाभ लेने की युक्ति लगाईं . उसने अगले ही दिन पुलिस की नौकरी छोड़ दी और गांव के सभी जेबकतरों को बुला कर बताया कि उन्हें क्या करना है . इसके बाद उसने गाँव के सब निठल्ले और मवाली किस्म के लोगों का ऑडिशन ले कर उनमे से 2 लोगों को चुन लिया व उन्हें अपनी जेब से कुछ रुपये दे कर पहलवानी के गुर सीखने के लिए कहा - साथ ही गांव में पूरी पंचायत के सामने ढिंढोरा पीट दिया कि दोनों पहलवान आपस में मिले हुए हैं और गाँव को बेवकूफ बना रहे है - तब एक पहलवान कंगू ने रोष में आ कर कहा कि खजलू, तुझे ज़यादा खुजली है तो तू मुकाबला कर ले - पता लग जाएगा कि पहलवानी किसे कहते हैं . यह सुन कर खजलू ने चुनौती तो स्वीकार ली और दावा भी किया कि वह और सिस्सू - विस्सू नाम वाले उसके दो साथी मिल कर इन दोनों को धूल चटा देंगे लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके लिए मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है, खजलू की बात सुन कर गाँव वालों ने उसे खूब चंदा देने की पेशकश की और देखते ही देखते खूब धन भी जमा हो गया . प्रसन्न मुद्रा में खजलू घर गया और मुकाबले की नियत तारीख का इंतज़ार करने लगा .
मुकाबले की पूर्व संध्या पर सभी जेबकतरों को बुला कर खजलू ने हिदायत दे दी कि जैसे ही मुकाबला शुरू हो तथा लोगों का ध्यान कुश्ती में लग जाए, सभी की जेब काट डालना ................... उधर सिस्सू - विस्सू को जापानी तेल की दो दो बोतलें थमा कर निर्देश दिया कि कल मुकाबले से पहले पूरे शरीर को चौपड़ लेना
मुकाबला हुआ और खूब हुआ और जापानी तेल की रपटन के चलते खजलू, सिस्सु और विस्सू के आगे भज्जू और कंगू जैसे पहलवान का एक भी दाव न चला, लिहाज़ा न कोई जीता, न कोई हारा - मुकाबला बराबरी पर ख़त्म हुआ
शाम को जेबकतरों से उगाही करते हुए खजलू ने सिस्सू - विस्सू से कहा कि यह मुकाबला तो केवल बोहनी भर थी.......... हमारा लक्ष्य गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे और सभी जगह के दर्शकों की जेब काटेंगे
सभी ने हर्षध्वनि की और पटाखे छोड़ते हुए अपने अपने घर कू चले गए
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| dedicated to gurumaa anandmurti by albela khatri at ambheti |
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| dedicated to gurumaa anandmurti by albela khatri at ambheti |
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| hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya |
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| hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya |
बीन से लेकिन भैंस बजाना महंगा पड़ता है
दिल की बात ज़ुबाँ पर लाना महँगा पड़ता है
लाख के घर में जोत जगाना महंगा पड़ता है
सर से जब लोहू निकला तो बात समझ में आई
दीवारों से सर टकराना महंगा पड़ता है
कविताओं की चोरी हो या हो दैहिक गठबन्धन
चलने दो, आवाज़ उठाना महंगा पड़ता है
ग़ज़लें गर लिखवाई हैं, तारीखें भी लिखवाओ
शंखधरों को शंख बजाना महंगा पड़ता है
आम आम की माला जप कर वो जो ख़ास हुआ है
उसको फिर से आम बनाना महंगा पड़ता है
भैंस के आगे बीन बजाना चल जाता 'अलबेला'
बीन से लेकिन भैंस बजाना महंगा पड़ता है
जय हिन्द !
अलबेला खत्री





















































