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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

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jab ek bhains bhi ilection 2014 ke liye khadi ho gayi


ye bhains bhi election 2014 ke liye abhi se khadi ho gayi hai . 

ek pressvaarta me isne bataya ki jab log gobar ganeshon ko 

vote de sakte hain to gobar ke ATM ko kyon nahin

jai hind !

23 july ko apne 50ven janmdin par main aap sabhi mitron ko hardik naman

23 july ko apne 50ven janmdin par main aap sabhi mitron ko 

hardik naman karta hun aur jane-anjane jo bhi bhool mujhse 

aapke prati ab tak hui ho, uske liye vinamra kshmaprarthi hoon. 

saath hi jin logon ne mere sath vishwasghat athva dhokhadhadi 

karke mera dil dukhaya hai, unhen unki sabhi galtiyon ke liye 

kshma karta hun JAI HIND !
50th birth day of albela khatri

ये सांप पूरे देश को डस जाएगा और तुम्हारी आचार संहिता खड़ी-खड़ी देखती रह जाएगी



'घर में नहीं दाने, पर अम्मा चली भुनाने' ये एक मुहावरा है और बड़ा प्यारा मुहावरा है। इसका रचयिता कौन था, इसका जन्म कहां और किन हालात में हुआ, इसकी मुझे न तो कोई जानकारी है तथा न ही मैं जानने को उत्सुक हूं। अपने को क्या लेना-देना यार, कोई भी हो, हमें क्या फ़र्क पड़ता है? हमें अपने ख़ुद  के दादाजी के दादाजी का नाम मालूम नहीं है तो दूसरों का इतिहास पढऩे का औचित्य ही क्या है। हां, इस मुहावरे का अर्थ अपन जानते हैं, इसलिए गाहे-ब-गाहे यूज .जरूर कर लेते हैं। आज भी करेंगे, क्योंकि चुनाव आयोग ने देश में एक आदर्श आचार संहिता लागू कर रखी है और ये संहिता उन लोगों के लिए लागू कर रखी है जिनका न तो कोई आदर्श है, न ही आचार। इसलिए ये आचार संहिता, लाचार संहिता बन चुकी है। रोज़-रोज़  इस संहिता का शीलभंग होता है, रोज़  मुकदमें दर्ज़  होते हैं, लेकिन साक्ष्य के अभाव में पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा। अब तो जैसे ''करत-करत अभ्यास  के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत-जात ते सिल पर परत निसान'' वाली स्थिति हो गई है। अब तो आचार संहिता को बार-बार भंग होने की आदत सी पड़ गई है, इसलिए इसे उतनी तकलीफ़ नहीं होती जितनी कि शुरू-शुरू में होती थी। लेकिन विषय चिन्ता का है और चिन्ता करनी चाहिए इसलिए कर लेते हैं क्योंकि अपने देश की चिन्ता अपने को ही करनी है, बराक ओबामा तो इस काम के लिए आएगा नहीं।


देखा जाए तो आचार संहिता से हमें कोई ख़ास ऐतराज़ नहीं है। आप लगाओ, .जरूर लगाओ, एक्सट्रा पड़ी हो, तो दो-चार एक साथ लगाओ लेकिन पहले कहीं आचार तो दिखाओ। कहीं तो दिखाओ, किसी के पास तो दिखाओ। अरे जब आचार ही नहीं है तो संहिता को क्या शहद लगाकर चाटें? बहुत हो गया नाटक, अब ये चूहे बिल्ली का तमाशा बन्द करो । जब आप किसी अपराधी को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य बता देते हैं तो वो अपनी लुगाई को मैदान में उतार देता है। आप 10 बजे लाउडस्पीकर बन्द करा देते हैं, तो टी.वी. पर विज्ञापन और भाषण शुरू हो जाते हैं जो रात भर चलते हैं। आप जनसभाओं की वीडियो शूटिंग करते हैं तो लोग उस फुटेज को डब किया हुआ तथा फ़र्जी बता देते हैं। क्या तीर मार लिया आचार संहिता ने ? सिवाय इसके कि जनता के सारे काम रुक गए। न कोई नया काम शुरू हो सकता है, न ही कोई घोषणा हो सकती है। इसलिए मैं कहता हूं ये आचार संहिता आचार संहिता नहीं, लाचार संहिता है। इसके पास कोई चारा नहीं। सारा चारा भाई लोगों के पेट में पहुंच चुका है और देश का भाईचारा अलगाव की लपेट में पहुंच चुका है।

अगर आप बुरा न मानें तो एक बात कहूं? देश को अब आचार संहिता की नहीं, विचार संहिता की .जरूरत है। क्योंकि आचार तो एक क्रिया है और क्रिया करने से होती है अपने आप नहीं होती जबकि करने में अपन कितने आलसी हैं ये तो बताने की बात ही नहीं है, दुनिया जानती है। विचार जो है वो कारण है और हर क्रिया की जननी है। इसे करना भी नहीं पड़ता क्योंकि ये स्वयंभू है। समय साक्षी है, हमारे राजनीतिकों के आचार से ज्य़ादा विचार दूषित हैं। दूषित विचार से शुद्ध आचार का सृजन हो ही नहीं सकता इसलिए आचार संहिता का अचार डालो और विचार संहिता लागू करो क्योंकि अब देश में विचार विषैले हो गए हैं और बहुत ज्य़ादा विषैले हो गए हैं।


'एक सांप ने एक नेता को डसा, नेता मज़े में पर सांप चल बसा' क्योंकि आज का स्वार्थी और सत्तालोलुप नेता सांप से भी ज्य़ादा .जहरीला हो गया है, इतना हुआ कठोर कि पथरीला हो गया है। इसका इलाज करो, जैसे भी होता हो जिस तकनीक से भी होता हो करो, वर्ना ये सांप पूरे देश को डस जाएगा और तुम्हारी आचार संहिता खड़ी-खड़ी देखती रह जाएगी।

'सादा जीवन- उच्च विचार' इस देश की व देश के महान नेताओं की परंपरा रही है। इस परंपरा को बचाने के लिए विचार पर नियंत्रण करो। अन्यथा तुम कितनी भी पाबन्दियां लगाओ, कितनी भी शूटिंग कराओ और चाहे कितने ही मुकदमें दर्ज़  कराओ, नतीजा ठन-ठन गोपाल ही आने वाला है।

'तुम मुझे ख़ून दो- मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा'  एक विचार था, 'अहिंसा परमोधर्मः' भी विचार था, 'ग़ाजिय़ों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख्ते-लन्दन तक चलेगी तेग़ हिन्दोस्तान की' भी विचार था और 'जय जवान'-'जय किसान' के अलावा 'गरीबी हटाओ- देश बचाओ', 'तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें' इत्यादि विचारों ने हमारे राष्ट्र और जनमानस को देश प्रेम से सराबोर किया है जबकि आजकल 'तिलक-तराजू और तलवार-इनके मारो जूते चार' जैसे विषैले विचार देश में घृणा का वातावरण बनाये हुए हैं। कोई किसी को बुढिय़ा बता रहा है, कोई किसी के हाथ काटने की बात करता है, कोई उत्तर भारतीयों के पीछे लठ्ठ लेके पड़ा है और कोई मां जितनी उम्रदराज़  महिला (महिला भी ऐसी-वैसी नहीं सर्वांगशक्तिमान मुख्यमंत्री सुश्री मायावती) को सार्वजनिक रूप से पप्पी देने की बात करता है तो बड़ा खेद होता है विचारों के इस सामूहिक पतन पर।

रोको, विचारों को अश्लील, अभद्र और अमानवीय होने से रोको अगर रोक सकते हो। नहीं रोक सकते तो आचार संहिता के ढक़ोसले को ही रोक लो, भगवान तुम्हारा भला करेगा। क्योंकि इस आचार संहिता से नेता नहीं जनता परेशान है। बाकी तुम जानो और तुम्हारा सिस्टम जाने।

तुम्हारी ऐसी की तैसी

जय हिन्द !
-अलबेला खत्री
he hanuman bachalo - albela khatri

he hanuman bachalo - albela khatri

he hanuman bachalo - albela khatri

नरेन्द्र मोदी के मुंह से कुत्ता शब्द निकल गया तो शरीफ़ लोगों की तशरीफ़ में गूमड़ उग आये



धर्मेन्द्र जब कहते हैं,  "कुत्ते मैं तेरा ख़ून पी जाऊंगा" या "बसन्ती, इन कुत्तों के 


सामने मत नाचना"  तो किसी को  कोई तकलीफ़  नहीं होती, राजीव गाँधी जब 

राम जेठमलानी को कुत्ता कहते हैं तो किसी हरामखोर को  शर्म  नहीं आती  और 

तो और  पुरखों द्वारा बनाई गई कहावतों - कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती, 

धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का, कुत्ते की मौत मरना, तेरे नाम का कुत्ता पालूं, 

कुत्ते को हड्डी डालना और  हाथी चलते रहते हैं कुत्ते भोंकते रहते हैं इत्यादि से भी 

किसी के  पिछवाड़े में  कोई काँटा नहीं चुभता  परन्तु  नरेन्द्र मोदी के मुंह से कुत्ता 

शब्द निकल गया तो  कुछ शरीफ़ लोगों की तशरीफ़ में बड़े बड़े गूमड़ उग आये ......

....है न हैरानी की बात .........


वे लोग कहते हैं - कुत्ते का नाम क्यों लिया ?  बकरी का ले लेते, बिल्ली का ले लेते . 


अरे भाई,  नरेन्द्र मोदी ने कुछ गलत नहीं कहा . जो कहा ठीक कहा . ये और कोई 

जाने या न जाने, मैं भली भान्ति जानता हूँ . और अगली पोस्ट में बताऊंगा भी 

लेकिन पहले मैं आप सब मित्रों की राय जानना चाहता  हूँ  कि  मोदी जी ने  बिल्ली 

और बकरी का नाम न  लेकर कुत्ते का नाम ही क्यों लिया .  आइये, फटाफट बताइए .....


-अलबेला खत्री 



खुजली है भाई खुजली है


खुजली है भाई खुजली है 

खुजली है भाई खुजली है 

ये like से घटती है 

ये comment  से मिटती है 

खुजली है भाई खुजली है 

face book वाली खुजली है

जय हिन्द

पत्ते - पत्ते में भरा है रंग तेरे प्यार का, तेरे मुस्कुराने से है मौसम बहार का




प्रकृति में मानव की माता का आभास है

प्रकृति में प्रभु के सृजन की सुवास है  




प्रकृति के आँचल में अमृत के धारे हैं 

नदी-नहरों में इसी  दूध के फौव्वारे हैं
 

प्राकृतिक ममता की मीठी-मीठी छाँव में 

 झांझर सी बजती है पवन के पाँव में

छोटे बड़े ऊँचे नीचे सभी तुझे प्यारे माँ

 हम सारे मानव  तेरी आँखों के तारे माँ 

भेद-भाव नहीं करती किसी के साथ रे 

सभी के सरों पे तेरा एक जैसा हाथ रे 

गैन्दे में गुलाब में चमेली में चिनार में 

पीपल बबूल नीम आम देवदार में 

पत्ते - पत्ते में भरा है रंग तेरे प्यार का 

तेरे मुस्कुराने से है मौसम बहार का 

झरनों में माता तेरी ममता का जल है 

सागरों की लहरों में तेरी हलचल है

वादियों में माता तेरे रूप का नज़ारा है 

कलियों का खिलखिलाना तेरा ही इशारा है


तूने जो दिया है वो दिया है बेहिसाब माँ 

हुआ है न होगा कभी, तोहरा जवाब माँ


तेरी महिमा का मैया नहीं कोई पार रे 

तेरी गोद में खेले हैं सारे अवतार रे


सोना चाँदी ताम्बा लोहा कांसी की तू खान माँ 

हीरों- पन्नों का दिया है तूने वरदान माँ 

तेरे ही क़रम से हैं सारे पकवान माँ 

कैसे हम चुकाएंगे तेरे एहसान माँ 

तेरी धानी चूनर की शान है निराली रे 

दशों ही दिशाओं में फैली है हरियाली रे 

केसर और चन्दन की देह में जो बन्द है 

मैया तेरी काया की ही पावन सुगन्ध है 

यीशु पे मोहम्मद पे मीरा पे कबीर पे 

नानक पे बुद्ध पे दया पे महावीर पे 

सभी महापुरुषों पे तेरे उपकार माँ 

सभी ने पाया है तेरे आँचल का प्यार माँ 

पन्छियों के चहचहाने में है तेरी आरती 

भोर में हवाएं तेरा आँगन बुहारती 

सभी के लबों पे माता तेरा गुणगान है 

जगत जननी तू महान है महान है


वे जो तेरी काया पे कुल्हाडियाँ चलाते हैं 

हरे भरे जंगलों को सहरा बनाते हैं

ऐसे शैतानों पे भी न आया तुझे क्रोध माँ 

तूने नहीं किया किसी चोट का विरोध माँ 

मद्धम पड़े न कभी आभा तेरे तन की

लगे न नज़र तुझे किसी दुश्मन की

मालिक से मांगते हैं यही दिन रात माँ

यूँ ही हँसती गाती रहे सारी कायनात माँ

चम्बे की तराइयों में तू ही मुस्कुराती है

हिमालय की चोटियों में तू ही खिलखिलाती है

तुझ जैसा जग में न दानी कोई दूजा रे

मैया तेरे चरणों की करें हम पूजा रे

बच्चे-बच्ची बूढे-बूढी हों या छोरे-छोरियां

सभी को सुनाई देती माता तेरी लोरियां 

तेरे अधरों से कान्हा मुरली बजाता है

तुझे देखने से माता वो भी याद आता है 

तुझ से ही जन्मे हैं ,तुझी में समायेंगे

तुझ से बिछुड़ के मानव  कहाँ जायेंगे 

तेरी गोद सा सहारा कहाँ कोई और माँ

तेरे बिना मानव  को कहाँ कोई ठौर माँ 

ग़ालिब की ग़ज़लें ,खैयाम की रुबाइयाँ

पद्य सूरदास के व तुलसी की चौपाइयां 

तेरी प्रेरणा से ही तो रचे सारे ग्रन्थ हैं

तूने जगमगाया माता साहित्य का पन्थ है


मानव की मिट्टी में मिलाओ अब प्यार माँ


जल रहा है नफ़रतों में आज संसार माँ  



-अलबेला खत्री 




इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया


क्या मुस्लिम,क्या सिक्ख, इसाई, क्या वैष्णव,क्या जैन

सब के सब हैरान यहाँ पर, सब के सब बेचैन


खादी वाले जनता का  धन लूट रहे  दिन-रैन


हाय !  लुटेरों के शासन में, भीगे सब के  नैन


क्या होगा कल हाल देश का, सोच सोच घबराया


इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया


प्यारे अन्जनी के लाल !


हमें संकट से निकाल !




धर्म के ठेकेदार  हमें टुकड़ों में बाँट रहे हैं


छंटे छंटाये लोग आज लोगों को छाँट रहे हैं


करुणा की काया को दीमक बन के चाट रहे हैं


मानवता के कल्पवृक्ष को जड़ से काट रहे हैं


खुदगर्ज़ी में इन्सां  ने इन्सां का ख़ून बहाया


इसीलिए हे पवनपुत्र !  मैं तेरी शरण में आया


प्यारे अन्जनी के लाल !


हमें संकट से निकाल !




लालच में असली डॉक्टर भी नकली दवा चलाते


हलवाई नकली  मावा  से नकली  माल   बनाते


व्यापारी भी नकली  मिर्च-मसाले हमें  खिलाते


दूध-दही, फल-फ्रूट, साग-सब्ज़ी भी नकली आते


गद्दारों ने बैंकों  तक में  नकली नोट चलाया


इसीलिए हे पवनपुत्र !  मैं तेरी शरण में आया


प्यारे अन्जनी के लाल !


हमें संकट से निकाल !



जय हिन्द


-अलबेला खत्री 







urgently wanted actor / actress for albelakhatri's TUMHARI YAAD AATI HAI

urgently wanted actor / actress  

for  albelakhatri's new creation 

tikammusic bank presents

TUMHARI  YAAD  AATI  HAI 







जगतजननी आदिशक्ति राजराजेश्वरी माँ हिंगुलाज की नवीन आरती

जगतजननी आदिशक्ति राजराजेश्वरी माँ हिंगुलाज की नवीन  आरती

क्या अदा, क्या जलवे तेरे रचना ! तू तो नहीं मिली पर मेरा काम तो हो गया




 गुमशुदा रचना की तलाश में  अपने मुख्य ब्लॉग पर  कल एक पोस्ट  मैंने 


किसलिए लगाईं थी, यह तो मैं ख़ुद नहीं जानता, लेकिन परिणाम बड़ा अच्छा 

आया, ये मैं जानता हूँ .  जिस ब्लॉग पर रक्तदान जैसे संवेदनात्मक  विषय पर  

पाठकों की संख्या केवल  तीन अंकों में थी,  मेरी रचना  का जादू ऐसा चला  

कि  पाठक संख्या सीधे चार अंकों में पहुँच गयी .


पहले मैं समझता  था कि  लोग ज़्यादातर केवल  जापानी तेल, सेक्स, सविता 


भाभी, जवानी और छाती से छाती मिली जैसी  शब्दावलियाँ  ही बांचते हैं . लेकिन 

आज मुझे एहसास  होगया  कि  यहाँ  मेरी रचना  भी काफी हॉट है . लिहाज़ा  

मैंने निर्णय कर लिया है  कि  मैं भी  अब अपने ब्लॉग पर  फिर से लिखना शुरू  करूँगा 

 .....और अन्य ब्लोग्गर बन्धुओं  की रचनाएं बांच कर उन्हें  लगातार  टिप्पणियां 

भी दूंगा . इससे दो फ़ायदे एक साथ होंगे,  एक तो ये कि  मुझे नई  नई  रचनाओं  

को पढने का अवसर मिलेगा, दूसरा  मैं जिन्हें टिप्पणियां  दूंगा, वे भी  ब्लॉग पर आयेंगे 

मेरी रचना का आनंद लेने के लिए ............

जय हिन्द ! 



हास्यकवि अलबेला खत्री की नवीनतम रचना आज रात सब टीवी पर वाह वाह क्या बात है में ...


प्यारे मित्रो ! 

लीजिये एक बार फिर आप से रूबरू  होने का  अवसर आया है .

 कोलाहल के राज में कविता भले ही आज हाशिये पर चली गयी है 

फिर भी कविता के नाम पर  जो कुछ अच्छा हो रहा है उसमें  एक 

काम  सब टीवी पर वाह वाह क्या बात है  कार्यक्रम भी है . इस 

चर्चित प्रोग्राम में  एक बार फिर मैं आ रहा हूँ  अपनी कुछ नवीनतम  

हास्य रचनाओं के साथ ...........देखना  न भूलें ......


तो फिर आज रात दस बजे ...........




जय हिन्द ! 
-अलबेला खत्री 



अहमदाबादी रसियाओं द्वारा गुजरात के आँगन में पंजाब के पुत्तरों का ज़ोरदार अभिनन्दन




गरमी तो बहुत थी उस दिन ....  आग बरस रही थी आकाश से ....परन्तु 


अहमदाबाद - गांधीनगर के मध्य स्थित  नारायणी रिसोर्ट में 2 7 मई  की

 दोपहर 2 बजे और इस्कोन मेगा मॉल में शाम 6 बजे जो कुछ देखने को 

मिला वह  अद्भुत और अभिनव था ही नयनो को शीतलता  प्रदान करने वाला 

भी था .


Lux  Cozi  द्वारा अपने वितरकों और विक्रेता बंधुओं के लिए  आयोजित इन 


शानदार आयोजनों में फ़िल्म यमला   दीवाना 2 के तमाम सितारे मौजूद रहे 

और उन्होंने  लोगों को   मस्ती बांटी . खासकर सन्नी दयोल और बॉबी दयोल 

ने गुजराती में  और रशियन अभिनेत्री  क्रिस्टीना ने हिंदी में  बोल कर तो गज़ब 

ही ढा  दिया . नेहा शर्मा  की  मृदुल मुस्कान पर  फ़िदा अहमदाबादी  इन सितारों 

से मिल कर, उनसे बात करके,  फोटो  खिंचवाके और  सन्नी के हाथों  

एप्रिशिएशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर के  मंत्रमुग्ध हो गए .


इन भव्य समारोहों का  मंच सञ्चालन मैंने किया  और खूब जम  कर किया . 


हँसा हँसा के लोटपोट कर दिया सब को ....हालांकि मेरे मित्र  राजकुमार भक्कड़ 

 ने भी माइक पर आ कर खूब चुटकियाँ ली . जबकि  lux cozi के  प्रबंध निदेशक 

अशोक तोदी ने अपने सारगर्भित सम्बोधन में  बहुत सी अच्छी  बातें कहीं .


जय हिन्द ! 













 

कितने साल घिसा है ख़ुद को, तब ये दौलत पाई है




सूनापन है,   सन्नाटा है,   तल्खी है,   तन्हाई है


ऐसे में क्या ख़बर कहाँ से ग़ज़ल उतर कर आई है



उमड़ रहा पुरज़ोर तलातुम जब मुर्शद के प्याले में 


पूछे कौन समन्दर से तुझमे कितनी गहराई है



महल तो है पर सपनों का है, घोड़े हैं पर ख़्वाबों के


चन्द तालियाँ, वाहवाहियां, अपनी असल  कमाई है



औरों ने कितना सरमाया जोड़ लिया है  बैंकों में


हमने  तो बस झख मारी है,  केवल धूल उड़ाई है



लाल किला लगता है गोया  महबूबा की लाली सा


ताजमहल भी किसी हसीना की कातिल अंगड़ाई है



सर पे चिट्टे बाल देख कर, काहे को शरमाऊं मैं


कितने साल घिसा है ख़ुद को, तब ये दौलत पाई है



प्यार-मोहब्बत, यारी-वारी, अपने बस की बात नहीं


जब भी कोशिश की "अलबेला" चोट करारी खाई है



____जय हिन्द !


गुटखा ले लेगा उसकी जान, कर दो सभी को सावधान



गुटखा ये पाउच वाला,


जिसने भी मुँह में डाला


गुटखा ले लेगा उसकी जान, कर दो सभी को सावधान



कितने ही मर गये इससे,


कितने ही मिट गये इससे


बूढ़े, बालक, नौजवान,  कर दो सभी को सावधान



संतूर, तुलसी, चुटकी, जे पी, दरबार कोई


मानिकचंद, मूलचंद हों या अनुराग कोई


हो चाहे रजनीगन्धा, पानपराग कोई


सबके सब हैं ज़हरीले, कत्थई, भूरे या पीले


सबके सब हैं एक समान, कर दो सभी को सावधान ......




सड़ियल सुपारी डाली, सस्ता ज़र्दा मिलाया


लौंग, इलायची, ख़ुशबू, ठंडक, किवाम दिखलाया


बाकी बस खड़िया मिट्टी, कोरा चूना लगाया


चमड़ी छिपकलियों वाली, सांपों की हड्डियाँ डालीं


नशा है या मौत का सामान, कर दो सभी को सावधान ........




तिल्ली को खा जाता है, पत्थरी, अल्सर देता है


किडनी का दुश्मन है ये  कैन्सर  भी कर देता है


खाने वाले का जीवन बर्बाद कर देता है


सबसे गन्दी बीमारी, चालू रहती पिचकारी


दफ़्तर हो, घर हो या दूकान , कर दो सभी को सावधान ..........

-हास्यकवि अलबेला खत्री 


श्री मुछाला महावीर जी यात्रा संघ के अंतिम चरण में  संघपति श्रीमती  मोहिनी बाई  देवराजजी खांटेड़ के सान्निध्य  में यह गीत तीर्थयात्रियों के लिए  घाणेराव में प्रस्तुत किया गया 


संघपति श्रीमती मोहिनी बाई देवराजजी खांटेड़ ( जैन ) चेन्नई 

यह मेरे जीवन का अब तक का सबसे अभिनव सृजन है



सभी प्यारे मित्रो, पाठकों एवं शुभचिन्तकों को जताते हुए प्रसन्नता है 

कि आदिशक्ति माँ हिंगुलाज की अपार अनुकम्पा से  'जय माँ हिंगुलाज' 

वीडियो एल्बम का काम पूरा हो चुका है और अतिशीघ्र  यह आप लोगों 

तक पहुँच जाएगा . इस मेगा प्रोजेक्ट में मुझे  जिन महानुभावों ने तन, 

मन, धन से सहयोग किया है  वे सर्वश्री  विजय एस ठाकुर - पुणे, 

भंवरलाल छूंछा - मुंबई, ओम प्रकाश छूंछा - मुंबई,  शंकरलाल कीरी - डीसा, 

दिलीप जगड़ - पुणे, पंकज वार्डे - सूरत, हुकमीचंद भूत - सूरत, गोरधन छूंछा 

- सूरत, राजकुमार भक्कड़ - अहमदाबाद, चुन्नीलाल कीरी - रानीवाड़ा,  

अमीलाल कीरी - सूरत, बाबूलाल छूंछा - जोधपुर,  मदनगोपाल  धनदे  - 

जयपुर  इत्यादि स्नेही स्वजन मेरा धन्यवाद स्वीकार करें . साथ ही अन्य 

सभी समर्थ स्वजनों और हिंगुलाज भक्तों से मेरा करबद्ध  निवेदन है कि  इस  

अनुपम रचना को घर-घर पहुँचाने में मेरा  सहयोग करें.


यह मेरे जीवन का अब तक का सबसे अभिनव सृजन है .  इसे लोकप्रिय करने 


के लिए अधिकाधिक संख्या में इसका वितरण अनिवार्य  है .  सभी  से मेरा 

अनुरोध है कि  चाहे डीवीडी  खरीद कर बांटें, चाहे  वीडियो में  विज्ञापनीय  

सहयोग करें............लेकिन  अपना योगदान अवश्य  दें .

धन्यवाद

- अलबेला खत्री 


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जय माँ हिंगुलाज के लोकार्पण समारोह पर प्रस्तुत रंगारंग नृत्य में डिम्पल डेप्युटी

समस्त प्यारे मित्रों 

और उनके परिवारजन को विजयादशमी की हार्दिक बधाई !

आइये, देखिये यह चित्र  जिसमे "जय माँ हिंगुलाज"  के लोकार्पण समारोह 


पर प्रस्तुत  रंगारंग नृत्य  में  डिम्पल डेप्युटी  और उनकी  शिष्याओं ने 

कैसी छटा बिखेरी .............

dimple deputy dancing with her group on lokarpan samaroh of   hasyakavi albela khatri,s JAI MAA HINGULAJ at surat     

dimple deputy dancing with her group on lokarpan samaroh of   hasyakavi albela khatri,s JAI MAA HINGULAJ at surat     

dimple deputy dancing with her group on lokarpan samaroh of   hasyakavi albela khatri,s JAI MAA HINGULAJ at surat     





dimple deputy dancing with her group on lokarpan samaroh of   hasyakavi albela khatri,s JAI MAA HINGULAJ at surat       




माँ हिंगुलाज की प्रेरणा और अनुकम्पा से ही मैं यह बना पाया हूँ.

प्यारे साथियों !
आज मैं बहुत खुश हूँ........बहुत बोले तो बहुत ही ख़ुश हूँ . उतना ही ख़ुश हूँ......जितना कोई माँ ख़ुश होती है अपने शिशु को जन्म दे कर.  जिस प्रकार नौ महीने तक गर्भ में रख कर कोई माँ अपने  अजन्मे बच्चे के  जन्म का इन्तेज़ार करती है उसी प्रकार पिछले कई महीनों से मैं भी अपने नये और महत्वपूर्ण एलबम "जय माँ हिंगुलाज"  के तैयार होने का मुन्तजिर था . आज मेरा वह सपना  पूरा हो गया है जो मैंने पूरे होशो-हवास में देखा था .  बाधाएं बहुत सी आयीं, परन्तु भगवती के प्रताप से  उलटे पांव लौट गईं .

देश के दिग्गज  गायकों द्वारा  स्वरबद्ध होने के बाद मेरे शब्दों  और  धुनों में ऐसी खिलावट आ गई है कि बदन के ख़ून में हीमोग्लोबिन  बढ़ता हुआ प्रतीत होता है . सचमुच आज के दिन मुझसे ज़्यादा खुशकिस्मत कोई नहीं.........


मित्रो !  "जय माँ हिंगुलाज"  का निर्माण इसलिए किया गया क्योंकि  माँ की ऐसी ही इच्छा  थी कि  इसके निर्माण का श्रेय मुझे मिले ..वरना  क्या कारण है कि आदिशक्ति  होने के बावजूद  और बावन शक्तिपीठों में  सबसे प्रथम  स्थान पर सुशोभित  हिंगुलाज के  लिए  आज तक किसी ने  न कोई भजन का एलबम बनाया और न ही कोई नयी आरती रची..........ऋषि दधीचि द्वारा  प्रदत्त  सिद्धमंत्र तक  से लोग पूरी तरह वाकिफ नहीं मिले.........अष्टक/स्तोत्र  को कैसे गाना है,  इसका भान और ज्ञान भी बहुत कम लोगों में मिला . जबकि हिंगुलाज माँ  उनकी कुलदेवी है  जिनका  काम ही  सतत बुद्धि से चलता है . साहित्य  में सर्वोपरि  सृजनकरता कहलाने वाले चारण, भावसार, भानुशाली, ब्रह्मखत्री या ब्रह्मक्षत्रिय के अलावा सोनी  इत्यादि अनेक समुदायों में  हिंगुलाज  को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है . बस.......मुख्य स्थान अथवा शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलोचिस्तान में होने के कारण  बहुत से लोग  इस  देवी से अनजान  हैं .

हालांकि राजस्थान,गुजरात,महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में  हिंगुलाज मन्दिर बहुतायत में हैं . खैर.............


मित्रो ! बना तो मैंने लिया, पर मेरा काम यहाँ ख़त्म नहीं होता . अब मुझे काम करना है इसे घर घर तक पहुंचाने का . सो  मैं इस आलेख के माध्यम से  तमाम तमाम हिंगुलाज भक्तों  से विनम्र प्रार्थना करता हूँ  कि आओ और खुले मन से मेरा साथ दो.........मैं इस cd /dvd  को बाज़ार में बेचना नहीं चाहता  बल्कि ये चाहता हूँ कि  लोग इन्हें खरीद कर मुफ़्त वितरण करें.

कल से video का  काम शुरू हो रहा है . हिन्दुस्तान की एक ऐसी  हस्ती जिसे नृत्य के लिए  दुनिया भर में अनेकानेक सम्मान मिले हैं  ने यह प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेकर मुझे बड़ा उत्साह दिया है . निसन्देह इसका video शानदार बनेगा .


इस एलबम में आर्थिक सहयोग करके आप मुझे  और काम को प्रोत्साहित करेंगे तो  अच्छा लगेगा . सहयोग दो प्रकार से कर सकते हैं..........एक - cd /dvd   खरीद कर और दो- एलबम में विज्ञापन दे कर.......


परम पावन शारदीय नवरात्रि के पहले ही यह वितरित हो जाये, ऐसा मेरा प्रयास है. नौ भजन,  एक नयी आरती,  महा अष्टक और  मूलमंत्र सहित  भारत के समस्त हिंगुलाज मंदिरों के दर्शन कराने वाला यह एलबम  मेरे जीवन का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वकांक्षी  सृजन  है.  माँ हिंगुलाज की प्रेरणा और अनुकम्पा से  ही  मैं यह बना पाया हूँ.  अब आपके आशीर्वाद और सहयोग की तत्काल ज़रूरत महसूस कर रहा हूँ .

आपके सहयोग की प्रतीक्षा  रहेगी


जय माँ हिंगुलाज

-अलबेला खत्री 

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ऊर्जा का अथाह भण्डार : कीर्तिदान गढ़वी


प्यारे मित्रो ! पिछले कुछ दिनों में 'जय माँ हिंगुलाज' की निर्माण प्रक्रिया में  
कुछ ऐसे अनुभव हुए  जिन्होंने  मन को आनन्द से भर दिया . इन ख़ुशनुमा  
एहसासों को मैं आपके साथ  बांटना चाहता हूँ . जिन लोगों के साथ भी काम 
किया, सभी ने इतना मृदुल व्यवहार किया कि  यह विश्वास और ज़्यादा मजबूत 
हो गया कि  सरस्वती के सच्चे  साधक  चाहे कितने ही ऊँचे शिखर पर क्यों न 
जा बैठें...अपनी विनम्रता नहीं छोड़ते.........


ऊर्जा का अथाह भण्डार : कीर्तिदान गढ़वी


गुजराती लोक संगीत के सुप्रसिद्ध  कलाकार  कीर्तिदान गढ़वी  से जब हमने दो 

रचनाएं गाने के लिए कहा तो पहले तो उन्होंने  यह कह कर मना कर दिया कि 
वे समयाभाव के कारण इतनी दूर नहीं आ सकते.......लिहाज़ा हम उदास हो गये 
क्योंकि  उन दो गानों को  हमने बनाया ही कीर्ति भाई के लिए था . इसलिए 
किसी और का स्वर लेने के बजाय हमने गीत ही छोड़ने का मन बना लिया लेकिन  
मुम्बई रवाना होने  के ठीक एक दिन पहले ख़ुद उन्होंने  फोन किया कि मैं सापुतारा 
आ रहा हूँ........अगर चाहो तो  रास्ते में आपकी  रेकॉर्डिंग करते हुए  निकाल 
जाऊँगा . ये सुन कर पारस सोनी ( संगीत संयोजक) और मेरी ख़ुशी का ठिकाना 
न रहा .


कीर्तिदान गढ़वी आये....गायन किया और ऐसा ज़बरदस्त किया कि   मन आनन्द 

से झूम उठा. स्वर मन्दिर स्टूडियो सूरत  का कोना कोना नाच उठा, ऐसा एहसास 
हुआ..........उल्लेखनीय  है कि कीर्तिदान जी ने न केवल अपने ऊर्जस्वित व्यक्तित्व  
से हमें दीवाना कर दिया बल्कि माँ हिंगुलाज में श्रद्धा के कारण पारिश्रमिक  भी बहुत 
कम लिया . मुझे भरोसा है कि  कीर्तिदान  का आगमन  सिर्फ़ और सिर्फ़  माँ 
हिंगुलाज  की  अनुकम्पा  से हुआ . कदाचित माँ हिंगुला ख़ुद चाहती थीं कि  कीर्ति 
भाई आये और उनकी महिमा गाये ...........

धन्यवाद कीर्तिदान !  जय हो माँ हिंगुला !

-अलबेला खत्री


अगली पोस्ट  में.............भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा   ( जारी )

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