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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

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दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर .......


जीवन के दोहे 

छोटी सी यह ज़िन्दगी, छोटा सा संसार 

छोटे हो कर देखिये, मिलता कितना प्यार 



अपनों की परवाह तो करते हैं सब लोग 


ग़ैरों की ख़िदमत करो, ये है सच्चा योग 



मेरे घर के सामने,  रहती है  इक हूर


दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर 



पुरखे अपने चल दिए, करके अच्छे  काम


अपनी यह कटिबद्धता, नाम न हो बदनाम 



तेरी मेरी क्या करूँ,  क्या है इसमें सार 


कोशिश है बाँटा करूँ, सबको अविरल प्यार 


- अलबेला खत्री 

hasyakavi albela khatri in ahmadabad

ये रचना मुझे सुन्दर लगी और प्यारी भी, आपको पसंद आये तो बताना ........प्लीज़



उत्तराखंड की महा आपदा पर एक घनाक्षरी अलबेला खत्री की



बुढ़ापे में पीली हो जाती है और मौत पर काली हो जाती है


न तो पेट भर पाता है सदा के लिए, 

न ही पेट के नीचे की आग बुझा पाता है

 

देह की गंध

एक सी नहीं रहती

बदलती रहती है रंग

बदलते समय के संग

शैशव की गंध श्वेत होती है

किशोरवय में गुलाबी और यौवन में सुर्ख़ होती है

जो

अधेड़ावस्था में जोगिया होती हुई

बुढ़ापे में पीली हो जाती है

और

मौत पर काली हो जाती है

काली पड़ चुकी गंध में कोई और रंग चढ़ नहीं सकता

इसीलिए तो मानव  का वय-रथ आगे बढ़ नहीं सकता

योनिद्वार से निकल कर

हरिद्वार तक की यात्रा करने वाला मनुष्य

पेट के नीचे से  जन्म लेता है

और

जीवन भर पेट व  पेट के नीचे की क्षुधा

भरने का प्रयास करता है

मगर अफ़सोस !

न तो पेट भर पाता है सदा के  लिए

न ही पेट के नीचे की आग बुझा पाता है

घर्षण से लेकर स्खलन तक

अर्थात 

सम्भोग से ले  समाधि तक

तमाम रंग उभरते हैं उभारों की तरह

और

जलाते हैं मनुष्य को अंगारों की तरह

देह जब तक  जीवित रहती, वासना में जलती है

इक  धधकती आग हरदम तहे-दिल में पलती है

ये गाड़ी ज़ीस्त की ऐसे चलती है, ऐसे ही चलती है

-अलबेला खत्री 

 

चन्दा केवल एक है, अनगिन यहाँ चकोर, सभी ताकते चाँद को हो कर भाव विभोर



चाँद : दो कुंडलिया

कविता लिख दूँ चाँद पर, यदि तुम करो पसन्द
मेरा तो इक लक्ष्य है, उर उमड़े आनन्द
उर उमड़े आनन्द, सुरतिया खिल खिल जाये
काश ! किसी उर्वशी  से अपना  उर मिल जाये
जीवन के मरुथल में बह जाये रस सरिता
करूँ समर्पित मैं तुमको  अपनी हर कविता


चन्दा केवल एक है,  अनगिन यहाँ चकोर
सभी ताकते चाँद को हो कर भाव विभोर
हो कर भाव विभोर, इश्क़ में मर जाते हैं
पर  दीदारे-यार वो मन भर कर जाते हैं
हाय मोहब्बत ही बन जाती है इक  फन्दा
कितने आशिक जीम गया यह ज़ालिम चन्दा

जय हिन्द
-अलबेला खत्री 






माननीय नरेन्द्र भाई मोदी भारत के प्रधान मंत्री बन चुके हैं और समूचे देश में उन्नति की एक लहर चल रही है




कहते हैं प्रातः काल में देखा हुआ सपना सिर्फ़  सपना नहीं बल्कि 


भविष्य में आने वाला सच होता है . यदि यह बात सही है,  तब तो 

हिन्दुस्तान के लिए बहुत ही शुभ समाचार है मेरे पास ............

सवासौ करोड़ भारतीयों को आज  एडवांस में मुंह मीठा कर लेना चाहिए . 

क्योंकि आज सुबह  मैंने सपना देखा है कि  अपने लोकलाड़ले छोटे 

सरदार  अर्थात  माननीय नरेन्द्र भाई मोदी  भारत के प्रधान मंत्री बन 

 चुके हैं  और  समूचे देश में  उन्नति की एक लहर चल  रही है .



हे भगवान्  यह सपना सच ही कर देना ....क्योंकि यह सपना केवल 


अलबेला खत्री का नहीं,  बल्कि  पूरे देश का है, देश के भविष्य का  है ...

जय हिन्द ! 


पाकिस्तानी दर्शकों ने भी सर आँखों पर सराहा भारत के हास्यकवि अलबेला खत्री को



अमेरिका में  टेक्सास प्रान्त के डल्लास शहर में शायरी और हास्य-व्यंग्य में 

भीनी वह रात बहुत रंगीन और ख़ुशनुमा थी . भारत से सात समंदर पार 

हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के लोग एक साथ हँस रहे थे और एक साथ  

शायरी का मज़ा ले रहे थे . 


शीराज़ मिठानी द्वारा आयोजित इस हास्य समारोह में अपनी प्रस्तुति के पहले मैं  

थोड़ा  सा चिन्तित था अपने परफोर्मेंस को ले कर ........क्योंकि आयोजकों ने 

साफ़ कह दिया था कि  ऑडियंस में केवल पाकिस्तानी लोग रहेंगे  जिन्हें  भारत 

की राजनीति, गुजरात के विकास, भ्रष्टाचार अथवा नरेन्द्र मोदी जैसे विषयों  से 

कोई लगाव नहीं है . लिहाज़ा इन विषयों से हट कर  परफ़ॉर्म  करना है . मेरे लिए 

यह थोड़ा चुनौती भरा काम था . लेकिन शुक्र है  माँ सरस्वती का जिन्होंने मेरी 

राह सरल कर दी . 


मज़े की बात ये है कि  अढाई घंटे चलने वाला प्रोग्राम साढ़े तीन  घंटे चला  और  

इस्माइली समाज के सभी पाकिस्तानी बन्धु  इतने लोटपोट हो गए हँस हँस कर 

कि  समूचा वातावरण  ठहाकों और तालियों से गूंज उठा .  मेरे लिए और भी ख़ुशी 

की बात यह थी कि  वहां के लोगों ने माइक पर आ कर स्वीकार किया  कि  प्रोग्राम 

तो वे पहले भी सैकड़ों देख चुके हैं  लेकिन  अलबेला खत्री का हास्य हंगामा  उन्हें  

अनेक वर्षों तक याद रहेगा . 


वैसे  आपको ये भी बता दूँ कि  जब मैंने गुजरात वाला गीत सुनाया तो पूरा गीत 

लोगों ने मेरे साथ साथ गाया .....है न कमाल की बात  और आनंद की बात 

जय हिन्द !

-अलबेला खत्री 







हिन्दी हास्य कवि-सम्मेलन का विज्ञापन अंग्रेजी में क्यों ?

क्योंकि  यह सब को समझ में आता है 
और दुनिया भर में चल जाता है 



तुझको मीठा होना ही था, बाप तेरा हलवाई है ....

.
 


लस्सी पीने वालों ने  अब  व्हिस्की मुँह लगाई है

तन-मन के दुःख दूर हुए, ज़ेहन पर मस्ती छाई है



बड़भागी वे नर हैं जिनको रोज़ नई सप्लाई  है


अपनी फूटी किस्मत में तो केवल एक लुगाई है



तेरे गालों के गड्ढे में गिर कर ही दम टूट गया


पूछे कौन समन्दर से तुझमे कितनी गहराई है



हाँ भई हाँ, हम तो कड़वे हैं, खारे हैं और खट्टे भी


तुझको मीठा होना ही था, बाप तेरा  हलवाई है



पाकिस्तानी मलिक हो चाहे, हिन्दुस्तानी मलिका हो


जिसने जितना जिस्म दिखाया, उतनी शोहरत पाई है



घर के सब बच्चे ख़ुश होकर लगे नाचने आँगन में


मैंने पूछा- क्या लफड़ा है, बोले- बिजली आई है



महानगर की ये विडम्बना हमने देखी 'अलबेला'


भीतर बहना बदन बेचती,  बाहर बैठा भाई है 



 जय हिन्द !
 -अलबेला खत्री 
 

कितने साल घिसा है ख़ुद को, तब ये दौलत पाई है




सूनापन है,   सन्नाटा है,   तल्खी है,   तन्हाई है


ऐसे में क्या ख़बर कहाँ से ग़ज़ल उतर कर आई है



उमड़ रहा पुरज़ोर तलातुम जब मुर्शद के प्याले में 


पूछे कौन समन्दर से तुझमे कितनी गहराई है



महल तो है पर सपनों का है, घोड़े हैं पर ख़्वाबों के


चन्द तालियाँ, वाहवाहियां, अपनी असल  कमाई है



औरों ने कितना सरमाया जोड़ लिया है  बैंकों में


हमने  तो बस झख मारी है,  केवल धूल उड़ाई है



लाल किला लगता है गोया  महबूबा की लाली सा


ताजमहल भी किसी हसीना की कातिल अंगड़ाई है



सर पे चिट्टे बाल देख कर, काहे को शरमाऊं मैं


कितने साल घिसा है ख़ुद को, तब ये दौलत पाई है



प्यार-मोहब्बत, यारी-वारी, अपने बस की बात नहीं


जब भी कोशिश की "अलबेला" चोट करारी खाई है



____जय हिन्द !


मत दिखलाना घाव किसी को, लोग नमक घिसने लगते हैं




रिश्ते जब रिसने लगते हैं 

तब परिजन पिसने लगते हैं 

मत दिखलाना घाव किसी को 

लोग नमक घिसने लगते हैं 

-अलबेला खत्री 

संघ के हाथ तले, मोदी का राज चले ...........


albela khatri live on stage in surat at event of jai jawan


ख़बरदार ! आज की तुकबन्दियाँ केवल वयस्कों के लिए हैं फेसबुकिया मूड में रचित इन मुक्तकों को कच्ची उम्र के लोग न पढ़ें



एक उम्र का साथ नहीं, ये जनम - जनम का साथ है

हम और तुम जो मिले हैं इसमें भी कुदरत का हाथ है


ये अनुपम सम्बन्ध हमारा दुनिया में मिसाल बनेगा


अपनी मोहब्बत, अपनी चाहत, ईश्वर  की  सौगात है 




ये बिन्दू बिन्दू  दीप सजाये लगते हैं


मुझको ये  सब तेरे ही साये लगते हैं


लफ्ज़ जहाँ पर चुप्पी साध लिया करते


वहाँ आपने  अधर हिलाये लगते हैं


ये तड़प स्वयं बतलाती है, तुम  उतर चुकी हो सागर में


तुम मीरा से कान्हा बन कर आई हो नेह  की गागर में


तुम देह नहीं हो देह्तर हो, तुम नाद हो बंशी वाले का 



दुनिया उसकी दीवानी है, जो दीवाना  उस ग्वाले का 




काम भले कितना  मुश्किल हो, किन्तु सरल हो जाएगा


तुम चाहो तो शाम को मिलना भी पोसिबल  हो जायेगा


तुम कहती धूप - छाँव  तक मुँह से कुछ  नहीं  कहती है


मैं कहता हूँ, कह कर देखो, हर लफ़्ज़  ग़ज़ल हो जायेगा



ख्याले यार में गुम वो जानेमन रहता  क्यों नहीं है


मेरी तरह  मस्ती के दरिया  में बहता क्यों नहीं है


हया कैसी मोहब्बत में उसे, डर कैसा बदनामी का


वो मुझसे प्यार करता है तो फिर कहता क्यों नहीं है 




नख से ले शिख तक तुम  प्रेम में पगी हो


इसलिए हे नेहवती ! तुम सबकी  सगी हो


कृष्ण तुम्हारे, तुम कृष्णा की जग जाहिर है 



जब भी देखा मैंने तुमको मीरा सी ही लगी हो 




ह्रदय समर्पित कर तुमको  मैंने नन्हा  उपहार दिया


भला करे भगवान आपका, तुमने इसे स्वीकार किया


कौन पूछता है जग में, किसने किसको कितना चाहा


पर एक बात तो पक्की है कि मैंने तुम से प्यार किया


_____सुप्रभात


_____उर्जस्वित दिवस .......


जय हिन्द !



Rajkot me albela khatri ke audio NAMAN MAHIMA  ka lokarpan samaroh


जो मज़ा संन्यास में है, वो कहाँ सहवास में.....

जो मज़ा ऐश्वर्य में है, वो कहाँ सन्त्रास में

जो मज़ा है तृप्तियों में, वो कहाँ है प्यास में


योगरथ को छोड़ कर क्यों रोगपथ पर मैं चलूँ ?

जो मज़ा संन्यास में है, वो कहाँ सहवास में.....




-अलबेला खत्री 

अलबेला खत्री की कवितायेँ

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