Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

माँ से बढ़ कर कौन सखी है बाबाजी


इस दुनिया में कौन सुखी है बाबाजी

जिसको देखो, वही दु:खी है बाबाजी



तुम तो केवल चखना लेकर आ जाओ


बोतल हमने खोल रखी है बाबाजी



इसकी चन्द्रमुखी है, उसकी सूर्यमुखी


मेरी ही क्यों  ज्वालमुखी है बाबाजी



रिश्वत की मदिरा फिर उससे न छूटी


जिसने भी इक बार चखी है बाबाजी



बाप से बढ़ कर कौन सखा हो सकता है


माँ से बढ़ कर कौन सखी है बाबाजी



काम अपना जी जान से करने वालों ने


अपनी किस्मत आप लिखी है बाबाजी



पथ के काँटे  क्या कर लेंगे 'अलबेला'


मैंने चप्पल पहन रखी है बाबाजी  







1 comments:

Rajesh Kumari June 25, 2012 at 4:55 PM  

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २६/६ १२ को राजेश कुमारी द्वारा
चर्चामंच पर की जायेगी

Post a Comment

My Blog List

myfreecopyright.com registered & protected
CG Blog
www.hamarivani.com
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

विजेट आपके ब्लॉग पर

Blog Archive