Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

Showing posts with label भजन. Show all posts
Showing posts with label भजन. Show all posts

मुम्बईकर हों या कि बिहारी, सब हैं हिन्दुस्तानी

न मैं मांगूं नोट आपसे, न मैं मांगूं वोट

मैं तो मांगूं गद्दारों के सिर पर गहरी चोट

ताकि मेरे प्यारे देश का हर संकट कट जाये

खिले उजाला चहुँओर, ये अन्धकार हट जाये

आओ आओ हनुमान

बचाओ हनुमान



हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, बौद्ध, पारसी, जैन

मिल के रहें आपस में तो आनन्दित हों दिन-रैन

तमिल, तेलगु ,गुजराती, पंजाबी, राजस्थानी

मुम्बईकर हों या कि बिहारी, सब हैं हिन्दुस्तानी

उसकी इससे,इसकी उससे अगर यहाँ पट जाये

खिले उजाला चहुँओर, ये अन्धकार हट जाये

आओ आओ हनुमान

बचाओ हनुमान



धर्म करें न करें, मगर हम पापमुक्त हो जाएँ

करुणा से भर जाएँ तो हम शापमुक्त हो जाएँ

स्वार्थ और लालच की ज्वाला से यदि छूटे नाता

तो फिर खुल कर मुस्काएगी अपनी भारत माता

सब आपस में भ्राता-भ्राता यदि हमको रट जाये

खिले उजाला चहुँओर, ये अन्धकार हट जाये

आओ आओ हनुमान

बचाओ हनुमान



-अलबेला खत्री

sensex,india,baba,albela khatri,rachnakaar,rachnakar,sahitya sansthan,surat,hasyakavi,hasya kavi sammelan,usa,mumbai,kavi in gujarat

छंटे छंटाये लोग आज लोगों को छाँट रहे हैं ......

क्या मुस्लिम,क्या सिक्ख, इसाई, क्या वैष्णव,क्या जैन

सब के सब हैरान यहाँ पर, सब के सब बेचैन

खादी वाले जनता का धन लूट रहे दिन-रैन

हाय ! लुटेरों के शासन में, भीगे सब के नैन


क्या होगा कल हाल देश का, सोच सोच घबराया

इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया

प्यारे अन्जनी के लाल !

हमें संकट से निकाल !



धर्म के ठेकेदार हमें टुकड़ों में बाँट रहे हैं

छंटे छंटाये लोग आज लोगों को छाँट रहे हैं

करुणा की काया को दीमक बन के चाट रहे हैं

मानवता के कल्पवृक्ष को जड़ से काट रहे हैं


खुदगर्ज़ी में इन्सां ने इन्सां का ख़ून बहाया

इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया

प्यारे अन्जनी के लाल !

हमें संकट से निकाल !



लालच में असली डॉक्टर भी नकली दवा चलाते

हलवाई नकली मावा से नकली बरफी बनाते

व्यापारी भी नकली मिर्च-मसाले हमें खिलाते

दूध-दही, फल-फ्रूट तो क्या हम सब्ज़ी नकली खाते


गद्दारों ने बैंकों तक में नकली नोट चलाया

इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया

प्यारे अन्जनी के लाल !

हमें संकट से निकाल !


kavi,kavita,poetry,bhajan,swabhiman,hasya hungama,albela khatri,india got tailent,big boss, lado,sensex,xxx neta,kavi sammelan,rachnakar,rachnakaar,rachnakaar sahitya manch surat

अर्ज़ हमारी मान लो वरना हम अनशन कर देंगे - हम तो टेन्शन में हैं, तुमको भी टेन्शन कर देंगे





हे बजरंग बली ! भारत से भ्रष्टाचार मिटा दो

और अगर ये वश में नहीं तो साफ़ साफ़ बतला दो

कब तक यों खामोश रहोगे ? हनुमत कुछ तो बोलो

लाल लंगोटे वाले बाबा ! अब अपना मुँह खोलो

तेरी आस है हमें

विश्वास है हमें



तेरे दर को छोड़ के बाबा, किस दरवाज़े जाएँ ?


तुम्हें बताया दर्दे-दिल अब और किसे बतलाएं ?

हमने तो ली ओट तुम्हारी, निशदिन तुझे मनायें

तेरी आरती, तेरा चालीसा, भजन भी तेरे गायें


दुःख की बाढ़ से घिरे भवन में सुख की खिड़की खोलो

लाल लंगोटे वाले बाबा ! अब अपना मुँह खोलो

तेरी आस है हमें

विश्वास है हमें



अर्ज़ हमारी मान लो वरना हम अनशन कर देंगे


हम तो टेन्शन में हैं, तुमको भी टेन्शन कर देंगे

धमकी नहीं है, सचमुच हम ये आयोजन कर देंगे

मुल्क पे न्यौछावर हम अपना तन मन धन कर देंगे


अन्धकार में भटक रहे हम, कोई किरण टटोलो

लाल लंगोटे वाले बाबा ! अब अपना मुँह खोलो

तेरी आस है हमें

विश्वास है हमें


-अलबेला खत्री


jai bajarangbali,kavi,kavita,hasya,sammelan,hasyakavi,sensex,fun,funny poem,kavi in india,indian poetry, bhajan,hanumaan



















स्विस बंकां म्ह पड़ी संजीवन, थे भारत म्ह ल्याओ

अब कस कै बांध लंगोटो

अर हाथ म्ह ले ले घोटो

बाबा बजरंगी हनुमान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान



म्हे शरण मैं आया थारी

थे हरल्यो विपदा म्हारी

बळ दिखलाओ बलवान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान



दीमक बण कै चाट रिया है देस नै खादीधारी


रक्षक ही भक्षक बण बैठ्या, बाड़ खेत नै खारी

राजा, मन्त्री, दरबारी

सगळा ही भ्रष्टाचारी

सब का सब बे-ईमान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान



देर करो मत हनुमत अब थे, बेगा बेगा आओ


स्विस बंकां म्ह पड़ी संजीवन, थे भारत म्ह ल्याओ

गास्यां तेरा गुणगान

अर मानांगा एहसान

दुःखभंजक दयानिधान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान


bajarang bali,kavi,kavita,hasya,sammelan,in india,save india, sensex, no porn,no nude dance, albela khatri,vsp,bjp,congress,swis bank,kaladhan,anna,baba,diggi

उसको वन में रहने से क्या लाभ हो सकता है ?




जिसने इच्छा का त्याग किया

उसको घर छोड़ने की क्या आवश्यकता है

और जो इच्छा का बन्धुआ है,

उसको वन में रहने से क्या लाभ हो सकता है ?

सच्चा त्यागी

जहाँ रहे

वहीँ वन और वहीँ भजन-कन्दरा है


-महाभारत


गुरूदेव हमारा....गुरूदेव हमारा....

अपना तो बस एक सहारा

गुरूदेव हमारा

गुरूदेव हमारा


कितना सुन्दर कितना प्यारा

गुरूदेव हमारा

गुरूदेव हमारा


युग-युग का हर ले अन्धियारा

पल भर में करता उजियारा

अपना तो बस............


ओमकार आधार तुम्ही में

अक्षरब्रह्म का द्वार तुम्ही में

सब धर्मों का सार तुम्ही में

निराकार साकार तुम्ही में ....निराकार साकार तुम्ही में

अपना तो बस एक सहारा

गुरूदेव हमारा

गुरूदेव हमारा


मक्का में एहसास तुम्हारा

पुष्कर में आभास तुम्हारा

ब्यास में डेरा ख़ास तुम्हारा

घट-घट में है वास तुम्हारा ....घट-घट में है वास तुम्हारा

अपना तो बस एक सहारा

गुरूदेव हमारा

गुरूदेव हमारा


युग-युग का हर ले अन्धियारा,पल भर में करता उजियारा

अपना तो बस......................

जय माता दी !

मैयाजी हम आये

तुम्हारे दरबार

मन में लगा कर ध्यान तुम्हारा

बोलें जय

मैयाजी हम ........



हम सब तेरे बालक मैया, तू सबकी महतारी

तेरी एक झलक पे माता ये जीवन बलिहारी

इन नैनों की प्यास बुझाजा

मैया पल भर को ही आ जा

तेरे लाड़ले करें पुकार ................मैयाजी हम



आज तलक तेरे द्वारे से भक्त गया न

उस पर कोई आंच न आये जिसकी तू हो वाली

तेरी महिमा सब से न्यारी

तेरी आरती जिसने उतारी

उसका हो गया बेड़ा पार .............मैयाजी हम



जगदम्बे ! तेरे चरण कमल से फूटे नेह के धारे

भले-बुरे, धनवंते-निर्धन सब हैं तुझ को प्यारे

माता तू ममता की मूरत

बड़ा शुभ है आज मुहूरत

आ जा ...सिंह पे हो के सवार .......



मैयाजी हम आये

तुम्हारे दरबार

मन में लगा कर ध्यान तुम्हारा

बोलें जय जयकार

मेरे मन की मीरा रोई .......................

कन्हैया ______एक झलक दिखला दे
कन्हैया __________________


जनम जनम से तरस रही हूँ
नयनों के रस्ते बरस रही हूँ
अब तो दरस करा दे
प्रेम का परस करा दे
_________________कन्हैया____ एक झलक दिखला दे


तन में अगन इक ख़ास लगी है
मन में मिलन की प्यास जगी है
आकर प्यास बुझा दे
धुन मुरली की बजा दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे


पन्थ न जानूँ , कर्म न जानूँ
मैं पूजन का मर्म न जानूँ
नेह का धर्म निभा दे
प्रीत का गीत सुना दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे


मैं दु:खियारी, विरहिन नारी
कृष्ण मुरारी, हे बनवारी
म्हारी पीर मिटा दे
सुख की घटा बरसा दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे


कौन जतन करूँ , कौन उपाय रे
कैसे पुकारूँ समझ न आय रे
तू ही राह दिखा दे
अपनी राय बता दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे
_________________कन्हैया ________________
_________________कन्हैया ________________

मैं तेरा अपराधी .........

मैं तेरा अपराधी दाता
मैं तेरा अपराधी

तूने बख्शा नूर हृदय में लेकिन मैंने चुनी सियाही
तूने सैर चमन की बख्शी लेकिन मैंने कीचड़ चाही
सौ सौ क़समें खायीं लेकिन एक क़सम भी नहीं निबाही
मैं तेरा अपराधी दाता
मैं तेरा अपराधी

मालिक ! तेरी एक झलक में लाखों सूर समाये हैं
ऐसी एक झलक के दर्शन ख़ुद मैंने भी पाये हैं
लेकिन मैं वो ज्योत कि जिस पर तम के गहरे साये हैं
मैं तेरा अपराधी दाता
मैं तेरा अपराधी

तू है दयालु ,परम कृपालु , तेरे क़रम का अन्त नहीं
मैं छोटा ,मेरे पाप भी छोटे ,दोष की सूचि अनन्त नहीं
सत्य में शक्ति, शक्ति में भक्ति ,झूठ कभी बलवन्त नहीं
मैं तेरा अपराधी दाता
मैं तेरा अपराधी

एक बार फ़िर अवसर बख्शो ,बख्शो प्रेम पियाला
तम हो जायें दूर जगत के ,घट में होय उजाला
तन की सारी चाहो-हवस का कर डालो मुंह कला
मैं तेरा अपराधी दाता
मैं तेरा अपराधी

My Blog List

myfreecopyright.com registered & protected
CG Blog
www.hamarivani.com
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

विजेट आपके ब्लॉग पर

Blog Archive