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Albela Khatri

स्विस बंकां म्ह पड़ी संजीवन, थे भारत म्ह ल्याओ

अब कस कै बांध लंगोटो

अर हाथ म्ह ले ले घोटो

बाबा बजरंगी हनुमान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान



म्हे शरण मैं आया थारी

थे हरल्यो विपदा म्हारी

बळ दिखलाओ बलवान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान



दीमक बण कै चाट रिया है देस नै खादीधारी


रक्षक ही भक्षक बण बैठ्या, बाड़ खेत नै खारी

राजा, मन्त्री, दरबारी

सगळा ही भ्रष्टाचारी

सब का सब बे-ईमान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान



देर करो मत हनुमत अब थे, बेगा बेगा आओ


स्विस बंकां म्ह पड़ी संजीवन, थे भारत म्ह ल्याओ

गास्यां तेरा गुणगान

अर मानांगा एहसान

दुःखभंजक दयानिधान, संकट म्ह है हिन्दुस्तान


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7 comments:

निर्मला कपिला June 29, 2011 at 10:04 AM  

रुकिये वो भी आयेगा वत्स, पहले इन बाबाओं की सम्पति तो सरकारी खजाने मे आये। शुरूआत घर से हो तो अच्छा है।

शिखा कौशिक June 29, 2011 at 4:34 PM  

n keval neta balki janta bhi lagi hai mal kamane me .he hanuman !sabko do nirmal buddhi ka vardan .tabhi bachega hindustan .sarthak rachna .

ब्लॉ.ललित शर्मा June 29, 2011 at 5:47 PM  

देर करो मत हनुमत अब थे, बेगा बेगा आओ
स्विस बंकां म्ह पड़ी संजीवन, थे भारत म्ह ल्या

थे बिनती सुन लो अलबेली
थे हो हनुमान म्हारा बेली

जय बजरंग बली की.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi June 29, 2011 at 7:09 PM  

खूबसूरत!

योगेन्द्र मौदगिल June 29, 2011 at 10:11 PM  

nirmla didi se sahmat hoon.........

jai hanumaan gyan-gun saagar...
wah Albela Kapeesh kripadhar....

Ratan Singh Shekhawat June 30, 2011 at 7:10 AM  

भौत बढ़िया लिख्यो भाईजी | पण आ सरकार तो आपणी ईं मायड़ भाषा में अजै ताईं मान्यता ही नीं दे री है |
ऊपर बाबा को को धन जब्त करण की मांग करण वाला नै साथ म चर्च रो धन रो नाम लेतां शर्म आवै है कै ? या आनै भी सेकुलरता रो पट्टो चाहै |
आं बेवकूफा क आ समझ क्यूँ कोनी आवै क बाबा लोगों ने धन जो दान म मिलै है बो सरकार कानून रे मुताबिक ही मिलै है | तो सरकार इण तरह का कानून ख़त्म क्यों ना कर रही है |

Ratan Singh Shekhawat June 30, 2011 at 7:14 AM  

जद आदमी भौत दुखी हुवे या भौत खुश हुवे जद वो मायड़ भाषा बोले |
आज आपरी ईं रचना सूं आपरी देश रे प्रति आपरै मनड़ा री पीड़ा झलक री है |

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