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Albela Khatri

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मेनका गांधी ने नरेन्द्र मोदी को शेर और राहुल गांधी को चिड़िया बताया है, ये बहुत गलत बात है


मेनका गांधी ने आज नरेन्द्र मोदी को शेर और राहुल गांधी को चिड़िया बताया है.  ये बहुत गलत बात है.  मुझे उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति है और मैं इस पर अपना क्रोधपूर्ण विरोध दर्ज़ करता हूँ  क्योंकि  चिड़िया तो मासूम होती है और दया की पात्र होती है जबकि कांग्रेस तो घाघ है, मक्कार है और चालाक है .  किसी कांग्रेसी को चिड़िया कहना चिड़िया पर अत्याचार करना है  ये बात मेनका गांधी को नहीं भूलना चाहिए

मेरी आँखों से देखा जाये तो मोदी अगर शेर है तो राहुल लोमड़  है,  मोदी हाथी है तो राहुल लक्कड़बग्घा है,  मोदी गरुड़  है तो राहुल सपोला है और मोदी अगर कप्तान  है तो राहुल चपरासी ………हा हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 




मैंने वज्रपुरुष नरेन्द्र मोदी को देखा है और जल्दी ही प्रधानमन्त्री बनते हुए भी देखूंगा


मुझे अफ़सोस है कि मैंने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को साक्षात् नहीं देखा, लेकिव मुझे आनन्द है कि मैंने वज्रपुरुष नरेन्द्र मोदी को देखा है और जल्दी ही प्रधानमन्त्री बनते हुए भी देखूंगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

hasyakavi albela khatri support narendra modi

स्वामी विवेकानन्दजी की जयन्ती पर आज उनके कुछ वचन साझा कर रहा हूँ

स्वामी विवेकानन्दजी की जयन्ती पर 
आज उनके कुछ वचन आप सब मित्रों से साझा कर रहा हूँ

1
दुष्टों के दोषों की चर्चा करने से अपना चित्त प्रक्षुब्ध ही होता है इसलिए उनके वर्तन की ओर लक्ष्य न दे कर, अथवा उनकी चर्चा करने न बैठ कर, उनकी उपेक्षा करना ही अपने लिए श्रेयस्कर है ।

2
धर्म को लेकर कभी विवाद न करो । धर्म सम्बन्धी सारे विवाद और झगड़े केवल यही दर्शाते हैं कि वहां आध्यात्मिकता का अभाव है । धर्म सम्बन्धी झगड़े सदैव खोखली और असार बातों पर ही होते हैं


3
एक मोची, जो कम से कम समय में बढ़िया और मजबूत जूतों की जोड़ी तैयार कर सकता है, अपने व्यवसाय में वह उस प्राध्यापक की अपेक्षा कहीं अधिक श्रेष्ठ है जो दिन भर थोथी बकवास ही करता रहता है

- स्वामी विवेकानंद

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है



नमस्कार प्यारे मित्रो !
ऐसा लगता है कि
चन्द महीनों बाद होने वाले अगले आमचुनाव  में :

कांग्रेस को अगर अपने कार्यकाल के महाघोटालों की कालिख धो धा कर, देश की जनता में पुनः लोकप्रियता और साख प्राप्त करते हुए फिर से सत्ता में आना है तो उसके पास एक ही, आखरी रास्ता है - पाकिस्तान पर आक्रमण,  हेमराज जैसे शहीदों का इन्तेक़ाम  और दुश्मन देश का सफ़ाया

भाजपा को अगर सरकार बनाने की अभिलाषा है  तो बहुमत प्राप्त करने के लिए  उसे सारे टीवी चैनल और अखबार खरीदने तथा पूरी तरह एकजुट होकर प्रयास करते हुए,  देश भर के   निष्कलंक और राष्ट्रभक्त लोगों को पार्टी में शामिल करना चाहिए  या अब पूरी तरह हिन्दूवादी हो जाना चाहिए,  भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की खुल्लमखुल्ला घोषणा और प्रतिज्ञा ही अब बहुसंख्यक वोट उसके खाते में डाल सकती है

आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



आजतक को अब अपना नाम बदल कर आपतक कर देना चाहिए

टीवी चैनल आजतक  को अब अपना नाम बदल कर 
आपतक  कर देना चाहिए, 
ऐसा मैं नहीं 
मेरा 11 साल का बेटा आलोक कहता है, 
क्या वोह ठीक कह रहा है ? 

जय हिन्द ! 



आदरणीय मोदीजी, यह अभी नहीं तो कभी नहीं का खेल है, जो जीता वही सिकन्दर होगा


सम्मान्य श्री नरेन्द्र मोदीजी,
मुख्यमन्त्री,
गुजरात शासन

प्रसंग   : लोकसभा चुनाव में हानिकारक परिणाम की चेतावनी
सन्दर्भ : येदुरप्पा जैसे भ्रष्ट ( अगर वे सचमुच दोषी हैं तो ) लोगों का समर्थन

आदरणीय मोदीजी,
ये दौर आपका है, आने वाला समय आपका है  और आप ही हैं जो माँ भारती  के आंसू पोंछ सकते हैं  इसलिए पूरा देश आपके साथ है और आपके नेतृत्व में भारत विश्व की महाशक्ति बनने का सपना  देख रहा है - कोई बड़ी बात नहीं कि इस बार आपको व आपकी पार्टी को 300 से भी अधिक सीटों के साथ सत्ता का सिंहासन प्राप्त हो, लेकिन सावधानी हटी तो दुर्घटना  घटने का खतरा भी याद रखना होगा

मैं यह तो नहीं जानता कि आपकी पार्टी  यानी भाजपा की  क्या लाचारी अथवा विवशता है जो  येदुरप्पा जैसे तथाकथित रूप से भ्रष्ट लोगों को पुनः पार्टी में शामिल कर रही है लेकिन मैं यह ज़रूर जानता हूँ कि ऐसे लोग न अपने देश के हित में हुए  हैं न ही अपनी पार्टी के हित में रहेंगे लिहाज़ा अगर आपको सचमुच देश का भला करने के लिए  प्रधानमन्त्री बनने का ख्याल आया है तो सर्वप्रथम ऐसे लोगों को चिमटी से पकड़ पकड़ कर पार्टी से बाहर निकालिये जिनकी छवि खराब है  और जो दागी कहलाते हैं तथा अच्छे लोगों को ढूंढ़ ढूंढ़ कर पार्टी में सम्मिलित कीजिये ताकि आपका रथ रास्ते में पंक्चर नहीं हो


जब आपके पास अपनी ख़ुद की उज्ज्वल छवि है,  शक्ति है, सामर्थ्य है और अपार लोकप्रियता के साथ साथ गुजरात में किये गए अप्रतिम विकास के प्रमाण-पत्र हैं तो इन नामुरादों की ज़रूरत ही क्या है आपको ?

यह पत्र मैं आपको इसलिए मेल कर रहा हूँ क्योंकि  आप इस समय अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं एवं उपलब्धियों की सीढ़ी के अन्तिम डण्डे पर खड़े हैं - यदि एक सीढ़ी और चढ़ गए तो  छत पर पहुँच जायेंगे, यानी मन्ज़िल पा लेंगे परन्तु भगवान् न करे, अगर आखरी डंडे से भी फ़िसले, तो सीधे ज़मीन पर नज़र आयेंगे - रास्ते में कोई रोकने वाला नहीं मिलेगा और सच पूछो तो भ्रष्ट सदस्य किसी भी संगठन के लिए फ़िसलन ही पैदा करते हैं - आप गिरें, उठें, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि मुझे तो अन्य बड़े कवियों की तरह  सरकार से न तो प्लॉट, फ़्लैट अथवा कोई एजेन्सी चाहिए, न ही किसी प्रकोष्ठ की अध्यक्षी, पद अथवा  राजकीय पुरस्कार की अभीप्सा है, परन्तु  देश की जनता आपसे आस लगाए बैठी है, अगर आप अपने मिशन में कामयाब न हुए तो जनता के अरमान आँसुओं में बह जाएंगे -

आदरणीय, यह अभी नहीं तो कभी नहीं का खेल है, जो जीता वही सिकन्दर होगा, हारने वाले की हालत तो सद्दाम हुसैन जैसी होने वाली है, यह अभी से  दीख रहा है क्योंकि राजनैतिक स्वार्थ अब इतने अधिक हावी हो गए हैं हरेक पार्टी पर कि  विरोधी विचारधारा का प्रत्येक व्यक्ति अब दुश्मन नज़र आने लगा है - यह दुर्भाग्यपूर्ण है परन्तु सच है

आपका प्रशंसक, समर्थक  और प्रबल हितेच्छु होने के नाते आपको सावधान कर रहा हूँ - चुनाव में जीत हो या  हार, कोई फ़र्क नहीं पड़ता - अपनी कथनी और करनी को एक रखते हुए हार भी मिले तो भी उसमें नैतिक जीत महकती है परन्तु  अपने ज़मीर को दाँव पर  लगा कर जीत भी मिले तो उसमें आत्मिक हार की बदबू आती है

एक मुख्यमन्त्री के रूप में आपने बेहतरीन  काम कर के जो वैश्विक यश अर्जित किया है वह तो कई लोगों को प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति बन कर भी नहीं मिलता ,,,,,आपसे प्रार्थना है कि इतने वर्षों में अर्जित किया हुआ यश चन्द सीटों की कीमत पर मत बेचिए …… आगे आपकी मर्ज़ी, मैं कौन होता हूँ आपकी खीर में अपना चम्मच चलाने वाला

आप विजयी हों,यशस्वी हों, दीर्घायु हों और भारत के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हों, ऐसी शुभकामना

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


आप विजयी हों,यशस्वी हों, दीर्घायु हों और भारत के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हों


मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है : अलबेला खत्री


सियासत एक की दुल्हन नहीं कइयों की रानी है

ये है बदनामी मुन्नी की तो शीला की जवानी है

सियासी लोगों की आँखों में जो घड़ियाली आँसू हैं

इलेक्शन में तो मोती है, पर उसके बाद पानी है


शरम से दूर हो तुम भी, शरम से दूर हैं हम भी

नशे में चूर हो तुम भी, नशे में चूर हैं हम भी

तमाशातूर हो तुम भी, तमाशातूर हैं हम भी

अतः लंगूर हो तुम भी, अतः लंगूर हैं हम भी



सुअर कोई गन्दगी पर जो जा बैठा तो हंगामा

कुकुर कोई जो हड्डी को चबा बैठा तो हंगामा

था जिसके पास बरसों ताज दिल्ली की सियासत का

उसी पंजे को मैं झाड़ू थमा बैठा तो हंगामा



कोई चालाक कहता है, कोई आड़ू समझता है

मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है

वो उसके साथ कैसी है, वो उसके संग कैसा है ?

ये तो जिह्वा समझती है या बस लाड़ू समझता है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
 







आने वाले समय में हमारे बच्चे इतिहास की किताबों में ये भी पढेंगे


आज़ादी के बाद वह भारतवर्ष के लिए  सबसे कठिन और  काला समय था जब वैश्विक बाज़ार में भारतीय रुपया लगातार  गश खा कर गिर रहा था  और अमेरिकी डॉलर उसकी छाती पर चढ़ कर nude dance कर रहा था. सब्जी से ले कर सोना तक हर वस्तु इत्ती महंगी हो गई थी कि आम तो आम, ख़ास लोग भी त्राहि त्राहि  कर उठे थे . यहाँ तक कि भारत सरकार ( अगर कहीं थी )  ने अपना  जेबखर्च चलाने के लिए एक बार फिर देश का सोना गिरवी रखने  का मन बना लिया था .

सब बावली बूच की तरह एक दूसरे को देख रहे थे . किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि जब सरकार के पिछवाड़े में इतना दम ही  नहीं था कि अपना नाश्ता पानी का खर्च भी उठा  सके तो उसने करोड़ों लोगों को सस्ता अनाज देने का हवाई फ़ायर किया ही क्यों ?  और फ़ायर भी ऐसा फुस्सू कि  जिसमे बुलेट तो चला ही नहीं  और  तमन्ची की पतलून गीली के साथ साथ  पीली भी हो गयी .  आम जनता अपने को ठगी हुई महसूस कर रही थी  क्योंकि  उसके पास इतना सोना भी नहीं था की गिरवी रख कर प्याज़ और अनाज ले सके . सब रो रहे थे, परन्तु सरकार में शामिल कुछ हरामखोर कांग्रेसी लोग ऐसे भी थे जो उस विपत्ति में भी ठहाके लगा रहे थे, जलसा कर रहे थे और मस्ती में  भांगड़ा कर रहे थे क्योंकि  उनकी साज़िश  कामयाब हो चुकी  थी.

दरअसल जनता जिसे  मन्दी समझ रही थी वह मन्दी नहीं, बल्कि  एक गन्दी चाल थी  जिसके ज़रिये नेताओं ने खुद को मालामाल और राष्ट्रकोष को कंगाल बना डाला क्योंकि कांग्रेस पार्टी जान चुकी थी कि नरेन्द्र मोदी  की लोकलहर में उसका राज अब डूबने वाला है और दोबारा कभी आने वाला भी नहीं तो क्यों न  ऐसे कुकर्म करें कि  डॉलर व सोने का भाव चढ़ जाए ताकि स्विस बैंकों में रखा अपना कालाधन अपने आप बढ़ जाये . ज़ाहिर है  भ्रष्ट नेताओं का जो धन स्विस बैंकों में था  वह डॉलर और सोने के रूप में ही था  और रूपये की हत्या होने का सीधा लाभ उन्हीं को  और उनके चन्द चहेते उद्योगपतियों  व पूँजी बाज़ार के खिलाड़ियों को ही मिलने वाला था . अतः सोच समझ कर धीरे धीरे देश को गर्त में धकेला  गया ताकि  कांग्रेस के  बाद जो भी सरकार  आये, उसके पास बजाने के लिए घण्टा भी न बचे . परन्तु होनी को कुछ और ही मन्ज़ूर था .

जैसे ही पब्लिक को इसकी भनक लगी, उन्होंने उन कुचमादियों को घेर लिया और मार मार कर भुरता  बना  डाला इससे घबराकर कुछ षड्यन्त्रकारी  इटली भाग गए, कुछ  अन्य  देशों में जा छुपे और जनता ने भारी बहुमत से भाजपा को जिता कर वज्रपुरूष नरेन्द्र मोदी  को प्रधानमंत्री बना दिया  जिनके सत्ता सम्हालते ही  सी बी आई और आयकर विभाग ने तमाम भगौड़ों को जा दबोचा  और  उन्हें  जूते मार मार कर सारा छुपा धन वसूल कर लिया .  मोदीजी के एक ही फोन पर  स्विस बैंकों ने  भारतीयों का सारा कालाधन खुद अपने ही विमानों में भर कर दिल्ली  पहुंचा दिया तथा  भारत की इस परमविजय के सम्मान में मुद्राबाज़ार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत सिर्फ़ एक रूपया रह गई .

जय हिन्द !

आने वाले समय में हमारे बच्चे इतिहास की किताबों में  ये भी पढेंगे






सैकड़ों लाशें देखकर भी जिसका दिल नहीं पसीजा, उसे आप मजबूत नहीं मान रहे?




क्या हो रहा है भाई, ये क्या चल रहा है इस देश में? जिसे देखो वही हमारे प्रधानमन्त्री का मज़ाक उड़ा रहा है और उन्हें मैडम के हाथों की कठपुतली बता रहा है। न कोई आव देख रहा है न ताव, सब के सब लठ्ठ लेकर पीछे पड़े हैं और एक ही बात सिद्घ करने पर तुले हैं कि मनमोहनजी कमज़ोर हैं, मजबूत नहीं हैं। पहले इस प्रकार की बातें सिर्फ भाजपा वाले ही कर रहे थे, अब तो यूपीए के कुछ सदस्यों ने भी इसे बाहरी समर्थन देना शुरु कर दिया है। हालांकि सोनिया भाभी, राहुल बाबा और प्रियंका बेबी के साथ-साथ सिब्बल, संघवी और शर्मा जैसे महारथी बारम्बार देश को भरोसा दिला रहे हैं कि चिन्ता की कोई बात नहीं, सिंह साहब पर्याप्त मजबूत हैं, लेकिन लोग हैं कि टस से मस नहीं हो रहे, बस एक ही गाना गा रहे हैं कि देश को मजबूत प्रधानमन्त्री चाहिए इसलिए लौहपुरूष लालकृष्ण अडवाणी या नरेन्द्र मोदी ही चाहिए।

अब अडवाणीजी या मोदीजी लौहपुरूष हैं या नहीं ? और हैं तो कितने बड़े लौहपुरूष हैं अथवा  कितना लोहा उनसे यह देश निकाल पायेगा इस मसले पर माथाफोड़ी करने का यह सही समय नहीं है। अभी तो चर्चा के हीरो डॉ. मनमोहन सिंह हैं। जो कि बाइपास सर्जरी के बावजूद जगह-जगह घूमकर देश-विदेश में भाषण  दे रहे हैं तथा  रात-दिन देश की चिन्ता में दुबले हुये जा रहे हैं जबकि  विरोधी लोग हैं कि उन्हें मजबूत ही नहीं मान रहे हैं। भई कमाल है। ये तो सरासर ज़्यादती है, ज़्यादती ही नहीं ज़ुल्म है।

अरे जिस आदमी के राज में कभी बनारस, कभी जयपुर, कभी असम, कभी अहमदाबाद, कभी मालेगांव तो कभी मोडासा में बम फूटते रहे लेकिन सैकड़ों लाशें देखकर भी जिसका दिल नहीं पसीजा, उसे आप मजबूत नहीं मान रहे?

सूरत में तापी, बिहार में कोसी, असम में ब्रहमपुत्र और यूपी में गंगा नदियों के कहर ने जो कोहराम मचाया था उससे न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की आँखें नम हो गयी थी। हजारों लोग मरे, लाखों मवेशी और पक्षी मरे, लाखों करोड़ रूपये का नुकसान हुआ लेकिन सिंह साहब और उनकी मण्डली का ध्यान सेंसेक्स में ही रमा रहा। इस तबाही पर भी जिसकी आँखें नहीं भीगी, उसे आप कमज़ोर बता रहे हैं ?  केदारनाथ की जिस लोमहर्षक विभीषिका पर पहाड़ों के पथरीले सीने भी फट पड़े........रब की आँखें भी हज़ारों शव एक साथ  देख भीग गयी होंगी ... वहां मरने वालों के अन्तिम संस्कार तक की प्रक्रिया को भी जिस व्यक्ति के राज में क्रूरता और अमानवीयता के साथ किया गया, उसे आप कमज़ोर मान रहे हैं ?


कुछ दिन पहले  पाकिस्तानियों ने हमारे जवानों के सिर काट डाले थे, कल रात को फिर  पाकिस्तानियों ने हमारे 5  जवान मौत के घाट उतार दिए जिस पर किसी तरह की जवाबी कार्रवाही अभी तक नहीं की गई, चीन हमारे इलाके में घुसा चला जा रहा है लेकिन मौनी बाबा का मौन व्रत कायम है .  दामिनी के साथ जो दरिन्दगी हुई या छतीसगढ़ में जो रक्तपात हो रहा है उसे देख कर जो बन्दा तनिक भी विचलित नहीं है  और लगातार वैश्विक स्तर पर भारत व भारतीय रूपये की वाट लगाने में जुटा हुआ है, उसे  कमज़ोर कहना उचित नहीं .......अरे यह तो हीरा है हीरा ...बल्कि उससे भी कहीं ज़्यादा कठोर . 

मुंबई में इतना बड़ा आतंकवादी हमला हुआ। पूरा देश जाग गया और पाकिस्तान के विरूद्घ कार्यवाई की मांग करने लगा, लेकिन इनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी, तब भी आप इनको कमज़ोर बता रहे हो। अरे पाकिस्तान के रास्ते तालिबानी हत्यारे लगातार हमारे लिए खतरा बने हुये हैं और सारी सुरक्षा एजेन्सियां व गुप्तचर संस्थाएं सतर्कता बरतने की हिदायत दे रही हैं इसके बावजूद वे चुनाव प्रचार में जुटे हुये हैं। जिस आदमी को डर और भय नाम की चीज नहीं है, उसे आप मजबूत नहीं समझते? और तो और, आम आदमी आमतौर पर एक ही महिला से परेशान हो जाता है जबकि ये भला मानस घर में तो जो सहता है वो सहता है, घर से बाहर भी दिनभर एक महिला के इशारों पर नाचता है फिर भी आप उसे मजबूत नहीं कहते। अटल बिहारी वाजपेयी कुंवारे थे इसके बावजूद उनके घुटने खराब हो गये थे, इस आदमी का सामर्थ्य तो देखो, शादीशुदा है और इस उम्र में भी जनपथ पर उठक-बैठक लगाता है, लेकिन अभी तक उसके घुटने सही सलामत हैं...बोलो...और कितना मजबूत प्रधानमन्त्री चाहिए ?

चारों तरफ मौत नाच रही है। गुजरात में हीरा कारीगरों के परिवार आत्महत्याएं कर रहे हैं, महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, बिहार में नक्सलवादी हत्याएं कर रहे हैं, पूंजी बाज़ार की गिरावट न जाने कितनी जानें ले चुकी है, उड़ीसा में अकाल और भुखमरी का ताण्डव हो रहा है और ऐसे में भी जो प्रधानमन्त्री पब्लिक के आंसू पोंछने के बजाय मुद्रास्फीति में कमी पर खुश हो रहा है और जीडीपी में वृद्घि बता-बताकर स्वयं ही अपनी पीठ ठोंक रहा है,

इतना मजबूत प्रधानमन्त्री मैंने तो आजतक नहीं देखा। भारत की क्या, पूरी दुनिया में नहीं देखा। इसलिए मेरा मानना है कि देश का नेता मजबूत नहीं चाहिए, अब तो जनता मजबूत चाहिए। नेता तो कमज़ोर ही चाहिए कमज़ोर यानी कम-ज़ोर अर्थात जो पब्लिक पर ज़ोर कम करे, ज़ुल्म कम करे, प्रधानमन्त्री ऐसा लाओ। कहीं ऐसा न हो, सरकार तो मजबूत बन जाए और जनता निर्बल बनी रहे।


प्लीज... जनता मजबूत बनाओ और अगली बार नरेन्द्र मोदी जैसा कोई ढंग का आदमी दिल्ली पहुँचाओ ताकि  ये देश बचा रहे ...देश की अस्मिता बची रहे  और देश की एकता व अखंडता बची रहे .

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 








जिस देश के समृद्ध किसान सिर्फ़ इसलिए आत्महत्याएं कर रहे हैं ताकि स्वर्ग में जा कर रम्भा का नृत्य देख सकें


"मेरी भावना का लोकतन्त्र वह है 

जिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति की आवाज़ को भी 

उतना ही महत्व मिले 

जितना एक समूह की आवाज़ को" - महात्मा गांधी


हाय बापू !

औपचारिक प्रणाम ।

समाचार ये है कि आपको कोई टेन्शन लेने की ज़रूरत नहीं है ।

आप वहां आराम से अपनी बकरी का दूध पीजिये और स्वर्ग का

मज़ा लीजिये, यहाँ सब ठीक चल रहा है । लोकतन्त्र बिलकुल

आपकी भावनाओं को समझ रहा है इसलिए मन्त्री लोगों के

छोटे से छोटे रिश्तेदार को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है

जितना कि बड़े बड़े जन समूह को दिया जाना चाहिए । ख़ासकर

10 जनपथ से तो अगर कोई कुत्ता भी आ जाये सूंघते हुए तो

अच्छे अच्छे अधिकारियों और कर्मचारियों की पतलूनें गीली हो

जाती हैं



बापू ,

अब हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली में कोई ऊंच नीच नहीं है, सब नीच

ही नीच है इसलिए चिन्ता की कोई बात नहीं है । देश बहुत तरक्की

कर चुका है । आप ख़ुद ही सोचो जिस देश में 20 रूपये लीटर पानी

बिक रहा है, जिस देश के समृद्ध किसान सिर्फ़ इसलिए आत्महत्याएं

कर रहे हैं ताकि स्वर्ग में जा कर रम्भा का नृत्य देख सकें क्योंकि

मुम्बई में आजकल डान्स बार बन्द हैं और किसान व मज़दूर इतने

रईस हो गये हैं कि बिना अय्याशी किये रह ही नहीं सकते उस देश

की ख़ुशहाली के क्या कहने ।



ख़बरें अभी और भी हैं लेकिन मुझे शाम के लिए बाटली का इन्तज़ाम

करना है इसलिए नमस्कार आज तक - इन्तज़ार कीजिये अगली

बार तक. . .

जय हिन्द



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