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Saturday, January 11, 2014
* कुछ लोग कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी को सबक सिखाने और हाशिये पर लाने के लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने जानबूझ कर केवल इसलिए उन्हें प्रधानमन्त्री का प्रत्याशी बनाया है ताकि गुजरात की मुख्यमन्त्री वाली कुर्सी उनके हाथ से निकल जाये -
जिस दिन मोदी मुख्यमन्त्री नहीं रहेंगे, उस दिन विभिन्न दलों के विरोध की आड़ ले कर, प्रधानमन्त्री का प्रत्याशी लालकृष्ण अडवाणी को बना दिया जायेगा - यानी ऐसी हालत कर दी जाएगी कि न तो दिल्ली के रहेंगे और न ही गुजरात के ----
** कुछ लोग कहते हैं कि कांग्रेस की परछाई पार्टी आआपा कांग्रेस को मिलने वाले उन सारे वोटों को अपनी ओर खींच लेगी जिनके दम पर भाजपा सरकार बनाने के ख्वाब देख रही है. परिणामतः झाड़ू +पंजा मिल कर बहुमत हासिल कर लेंगे और भाजपा, दिल्ली की ही तरह सबसे बड़ी विजेता पार्टी होकर भी सरकार नहीं बना पायेगी
***कुछ लोग कहते हैं _______अरे हटाओ, मुझे क्या करना है ये जान कर कि कौन क्या कहता है ? मुझे तो ये भरोसा है कि देश की जनता अब अपने मताधिकार का महत्व समझ गई है और ये भी जान चुकी है कि कौन उसके मत का सही पात्र है इसलिए कयास और अटकलों की ऐसी की तैसी, मुझे भरोसा है कि देश की जनता इस बार कांग्रेस का सफ़ाया करेगी, उसकी परछाई का भी सफ़ाया करेगी तथा भारत की उन्नति व प्रगति के लिए नरेन्द्र भाई मोदी को ही अपना आशीर्वाद और सम्बल देगी
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| namo namo bharat - congress mukt bharat |
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| hasyakavi albela khatri ki mehfil |
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Friday, January 10, 2014
नमस्कार प्यारे मित्रो !
ऐसा लगता है कि
चन्द महीनों बाद होने वाले अगले आमचुनाव में :
कांग्रेस को अगर अपने कार्यकाल के महाघोटालों की कालिख धो धा कर, देश की जनता में पुनः लोकप्रियता और साख प्राप्त करते हुए फिर से सत्ता में आना है तो उसके पास एक ही, आखरी रास्ता है - पाकिस्तान पर आक्रमण, हेमराज जैसे शहीदों का इन्तेक़ाम और दुश्मन देश का सफ़ाया
भाजपा को अगर सरकार बनाने की अभिलाषा है तो बहुमत प्राप्त करने के लिए उसे सारे टीवी चैनल और अखबार खरीदने तथा पूरी तरह एकजुट होकर प्रयास करते हुए, देश भर के निष्कलंक और राष्ट्रभक्त लोगों को पार्टी में शामिल करना चाहिए या अब पूरी तरह हिन्दूवादी हो जाना चाहिए, भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की खुल्लमखुल्ला घोषणा और प्रतिज्ञा ही अब बहुसंख्यक वोट उसके खाते में डाल सकती है
आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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टीवी चैनल आजतक को अब अपना नाम बदल कर
आपतक कर देना चाहिए,
ऐसा मैं
नहीं
मेरा 11 साल का बेटा आलोक कहता है,
क्या वोह ठीक कह रहा है ?
जय हिन्द !
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Monday, January 6, 2014
सावधान ! ख़बरदार !! होशियार !!!
दिल्ली के मन्त्रियों को भले ही सुरक्षा की ज़रूरत न हो, परन्तु दिल्ली के अवाम को तो अब अपने और अपने बच्चों के लिए सुरक्षा मांग ही लेनी चाहिए क्योंकि मज़ाक मज़ाक में उसने ऐसे लोगों को हुक्मरान बना दिया है जिनका कोई भरोसा नहीं कि कब, किस मासूम को खेलने के अपराध में जेल जाना पड़ जाए -
हा हा हा पता नहीं कब किस बाप को इसलिए जेल जाना पड़ जाए कि उसने ऐसी अपराधी औलाद पैदा की कि जो क्रिकेट खेलती है और अपनी गेन्द से मन्त्रीजी की गाड़ी के काँच तिड़का देती है
दिल्ली वालो! अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता
राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग
दो दिन में दिखला दिया, अपना असली रंग
अपना असली रंग, मुखौटा उतर गया है
आम होगया ख़ास, ज़ेहन तक असर गया है
पाई पहली बार, कार जब नौ-दस लाखी
भूल गई औक़ात, लाज खूंटी पर राखी
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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| राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग |
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Thursday, January 2, 2014
सियासत एक की दुल्हन नहीं कइयों की रानी है
ये है बदनामी मुन्नी की तो शीला की जवानी है
सियासी लोगों की आँखों में जो घड़ियाली आँसू हैं
इलेक्शन में तो मोती है, पर उसके बाद पानी है
शरम से दूर हो तुम भी, शरम से दूर हैं हम भी
नशे में चूर हो तुम भी, नशे में चूर हैं हम भी
तमाशातूर हो तुम भी, तमाशातूर हैं हम भी
अतः लंगूर हो तुम भी, अतः लंगूर हैं हम भी
सुअर कोई गन्दगी पर जो जा बैठा तो हंगामा
कुकुर कोई जो हड्डी को चबा बैठा तो हंगामा
था जिसके पास बरसों ताज दिल्ली की सियासत का
उसी पंजे को मैं झाड़ू थमा बैठा तो हंगामा
कोई चालाक कहता है, कोई आड़ू समझता है
मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है
वो उसके साथ कैसी है, वो उसके संग कैसा है ?
ये तो जिह्वा समझती है या बस लाड़ू समझता है
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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Wednesday, September 4, 2013
जहाँ देखो वहीँ बलात्कारी खड़े हुए हैं, हर अख़बार, हर चैनल बलात्कार के समाचारों से भरा पड़ा है .
आजकल बलात्कार, विशेष रूप से गैंगरेप कुछ ज़्यादा ही होने लगे हैं जो कि समाज के लिए शर्म और दुःख की बात है . कहीं नाबालिग के साथ दुष्कर्म हो रहा है तो कहीं नाबालिग के द्वारा दुष्कर्म हो रहा है ..........क्या हो गया है भाई ? कहाँ जा रहा है समाज ?
ये इतने सारे स्कूल , कालेज, गुरूकुल, इतने सारे साधू संतों के प्रवचन, ये इतने सारे धार्मिक ग्रन्थ और इतने सारे क़ानून मिल कर भी कोई रोकथाम नहीं कर पा रहे हैं ...........हैरत है !
अरे हरामखोरो ! तुम्हें फूल ही सूंघना है तो गुलफ़रोश से खरीद कर सूंघ लो, कौन रोकता है ? जगह जगह एक से बढ़ कर एक दुकान सजी है फूलों की ..........पैसा फैंकों और अपना शौक पूरा कर लो .........ये ज़बरदस्ती किसी के बगीचे में घुस कर फूल तोड़ने की ज़रूरत ही क्या है ?
जय हिन्द !
परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार
https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan
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Tuesday, September 3, 2013
आसाराम अगर लीपापोती न करते और कानून से मुंह न छिपाते बल्कि पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज़ कराने का पता चलते ही ख़ुद चल कर पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण कर देते यह कहते हुए कि
" मेरी पोती समान एक मासूम बच्ची ने मुझ पर देहशोषण का इतना घिनौना आरोप लगाया है कि सिर्फ़ मैं नहीं बल्कि मेरे कारण पूरा संत समाज कलंकित हो गया है इसलिए मुझे अब संत कहलाने और संसार में जीवित रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है . लिहाज़ा मैं स्वयं को कानून के सुपुर्द करते हुए प्रार्थना करता हूँ कि मुझे कठोर से कठोर दंड देते हुए कम से कम दो बार फाँसी पर लटकाया जाये, एक बार मेरे तथाकथित अपराध के लिए और दूसरी बार मेरे करोड़ों जिज्ञासु शिष्यों को होने वाली आत्मिक पीड़ा के लिए .......मुझे अपने ऊपर लगे आरोप पर सफ़ाई में कुछ नहीं कहना है . एक साधु पर इतना बड़ा आरोप लग जाना ही पर्याप्त है .......लिहाज़ा या तो एक महीने के भीतर भीतर कानून अपने विधिविधान से मेरे प्राण ले ले अन्यथा मैं स्वयं ही अपने आश्रम में जीवित समाधि ले लूँगा . इतना बड़ा बोझ ले कर न मैं अब जी सकता हूँ और न ही साधना कर सकता हूँ
मेरी मृत्यु के समय मेरे तमाम शिष्य पूरी तरह शांति बनाये रखें और हरी ॐ का जाप करते रहें . भगवान् उन भले लोगों का भी भला ही करे जिन्होंने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के लिए मुझ पर यह कालिख पोतने में सफलता प्राप्त कर ली . हमेशा की तरह मैं उनका यह अपराध क्षमा भी करता हूँ साथ ही उस नन्ही बिटिया को उसके सुखी जीवन की कामना करते हुए अपनी ओर से सवा करोड़ रूपये की रकम भी भेंट करने का आदेश अपने आश्रम के प्रबंधकों को देता हूँ ....हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ "
अन्य नौटंकी करने के बजाय आसाराम ऐसा करते तो न केवल शिष्यों और साधु समाज की बल्कि आम जनता और पुलिस की भी पूर्ण सहानुभूति उन्हें मिल जाती . क्योंकि हमारा देश पढ़े लिखे गंवारों का देश है जहाँ किसी के समर्थन या विरोध में भीड़ इकठ्ठा होते हुए देर नहीं लगती .
जय राम जी की बोलना पड़ेगा .
परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार
https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan?ref=hl
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| albela khatri on aasaram bapu |
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Wednesday, August 28, 2013
आज़ादी के बाद वह भारतवर्ष के लिए सबसे कठिन और काला समय था जब वैश्विक बाज़ार में भारतीय रुपया लगातार गश खा कर गिर रहा था और अमेरिकी डॉलर उसकी छाती पर चढ़ कर nude dance कर रहा था. सब्जी से ले कर सोना तक हर वस्तु इत्ती महंगी हो गई थी कि आम तो आम, ख़ास लोग भी त्राहि त्राहि कर उठे थे . यहाँ तक कि भारत सरकार ( अगर कहीं थी ) ने अपना जेबखर्च चलाने के लिए एक बार फिर देश का सोना गिरवी रखने का मन बना लिया था .
सब बावली बूच की तरह एक दूसरे को देख रहे थे . किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि जब सरकार के पिछवाड़े में इतना दम ही नहीं था कि अपना नाश्ता पानी का खर्च भी उठा सके तो उसने करोड़ों लोगों को सस्ता अनाज देने का हवाई फ़ायर किया ही क्यों ? और फ़ायर भी ऐसा फुस्सू कि जिसमे बुलेट तो चला ही नहीं और तमन्ची की पतलून गीली के साथ साथ पीली भी हो गयी . आम जनता अपने को ठगी हुई महसूस कर रही थी क्योंकि उसके पास इतना सोना भी नहीं था की गिरवी रख कर प्याज़ और अनाज ले सके . सब रो रहे थे, परन्तु सरकार में शामिल कुछ हरामखोर कांग्रेसी लोग ऐसे भी थे जो उस विपत्ति में भी ठहाके लगा रहे थे, जलसा कर रहे थे और मस्ती में भांगड़ा कर रहे थे क्योंकि उनकी साज़िश कामयाब हो चुकी थी.
दरअसल जनता जिसे मन्दी समझ रही थी वह मन्दी नहीं, बल्कि एक गन्दी चाल थी जिसके ज़रिये नेताओं ने खुद को मालामाल और राष्ट्रकोष को कंगाल बना डाला क्योंकि कांग्रेस पार्टी जान चुकी थी कि नरेन्द्र मोदी की लोकलहर में उसका राज अब डूबने वाला है और दोबारा कभी आने वाला भी नहीं तो क्यों न ऐसे कुकर्म करें कि डॉलर व सोने का भाव चढ़ जाए ताकि स्विस बैंकों में रखा अपना कालाधन अपने आप बढ़ जाये . ज़ाहिर है भ्रष्ट नेताओं का जो धन स्विस बैंकों में था वह डॉलर और सोने के रूप में ही था और रूपये की हत्या होने का सीधा लाभ उन्हीं को और उनके चन्द चहेते उद्योगपतियों व पूँजी बाज़ार के खिलाड़ियों को ही मिलने वाला था . अतः सोच समझ कर धीरे धीरे देश को गर्त में धकेला गया ताकि कांग्रेस के बाद जो भी सरकार आये, उसके पास बजाने के लिए घण्टा भी न बचे . परन्तु होनी को कुछ और ही मन्ज़ूर था .
जैसे ही पब्लिक को इसकी भनक लगी, उन्होंने उन कुचमादियों को घेर लिया और मार मार कर भुरता बना डाला इससे घबराकर कुछ षड्यन्त्रकारी इटली भाग गए, कुछ अन्य देशों में जा छुपे और जनता ने भारी बहुमत से भाजपा को जिता कर वज्रपुरूष नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया जिनके सत्ता सम्हालते ही सी बी आई और आयकर विभाग ने तमाम भगौड़ों को जा दबोचा और उन्हें जूते मार मार कर सारा छुपा धन वसूल कर लिया . मोदीजी के एक ही फोन पर स्विस बैंकों ने भारतीयों का सारा कालाधन खुद अपने ही विमानों में भर कर दिल्ली पहुंचा दिया तथा भारत की इस परमविजय के सम्मान में मुद्राबाज़ार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत सिर्फ़ एक रूपया रह गई .
जय हिन्द !
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आने वाले समय में हमारे बच्चे इतिहास की किताबों में ये भी पढेंगे |
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Monday, July 29, 2013