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Albela Khatri

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आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है



नमस्कार प्यारे मित्रो !
ऐसा लगता है कि
चन्द महीनों बाद होने वाले अगले आमचुनाव  में :

कांग्रेस को अगर अपने कार्यकाल के महाघोटालों की कालिख धो धा कर, देश की जनता में पुनः लोकप्रियता और साख प्राप्त करते हुए फिर से सत्ता में आना है तो उसके पास एक ही, आखरी रास्ता है - पाकिस्तान पर आक्रमण,  हेमराज जैसे शहीदों का इन्तेक़ाम  और दुश्मन देश का सफ़ाया

भाजपा को अगर सरकार बनाने की अभिलाषा है  तो बहुमत प्राप्त करने के लिए  उसे सारे टीवी चैनल और अखबार खरीदने तथा पूरी तरह एकजुट होकर प्रयास करते हुए,  देश भर के   निष्कलंक और राष्ट्रभक्त लोगों को पार्टी में शामिल करना चाहिए  या अब पूरी तरह हिन्दूवादी हो जाना चाहिए,  भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की खुल्लमखुल्ला घोषणा और प्रतिज्ञा ही अब बहुसंख्यक वोट उसके खाते में डाल सकती है

आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



दिल्ली वालो! अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता


सावधान !  ख़बरदार !!   होशियार !!!

दिल्ली के मन्त्रियों को भले ही सुरक्षा की ज़रूरत न हो, परन्तु दिल्ली के अवाम को तो अब अपने और अपने बच्चों के लिए सुरक्षा मांग ही लेनी चाहिए क्योंकि  मज़ाक मज़ाक में उसने ऐसे लोगों को हुक्मरान बना दिया है जिनका कोई भरोसा नहीं कि कब, किस मासूम को खेलने के अपराध में जेल जाना पड़  जाए -

हा हा हा पता नहीं कब किस बाप को इसलिए जेल जाना पड़ जाए कि उसने ऐसी अपराधी औलाद पैदा की कि जो क्रिकेट खेलती है और अपनी गेन्द से मन्त्रीजी की गाड़ी के काँच तिड़का देती है

दिल्ली वालो!  अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता

राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग
दो दिन में दिखला दिया, अपना असली रंग
अपना असली रंग, मुखौटा उतर गया है
आम होगया ख़ास, ज़ेहन तक असर गया है  
पाई पहली बार, कार जब नौ-दस लाखी
भूल गई औक़ात, लाज खूंटी पर राखी  


जय हिन्द !
अलबेला खत्री
राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग







अरे हरामखोरो ! तुम्हें फूल ही सूंघना है तो गुलफ़रोश से खरीद कर सूंघ लो, कौन रोकता है ?


जहाँ देखो वहीँ बलात्कारी खड़े हुए हैं,  हर अख़बार, हर चैनल  बलात्कार  के समाचारों से भरा पड़ा है . 

आजकल बलात्कार, विशेष रूप से गैंगरेप  कुछ ज़्यादा  ही होने लगे हैं जो कि  समाज के लिए शर्म और दुःख की बात है .  कहीं नाबालिग के साथ दुष्कर्म हो रहा है तो कहीं नाबालिग के द्वारा दुष्कर्म हो रहा है ..........क्या हो गया है  भाई ?  कहाँ जा रहा है समाज ?

ये इतने सारे स्कूल , कालेज, गुरूकुल, इतने सारे  साधू संतों के प्रवचन,  ये इतने सारे धार्मिक  ग्रन्थ और इतने सारे क़ानून मिल कर भी कोई रोकथाम नहीं कर पा रहे हैं ...........हैरत है !

अरे हरामखोरो ! तुम्हें  फूल ही सूंघना है  तो गुलफ़रोश  से खरीद कर सूंघ लो, कौन रोकता है ?  जगह जगह  एक से बढ़ कर एक दुकान सजी है  फूलों की ..........पैसा फैंकों  और  अपना शौक पूरा कर लो .........ये  ज़बरदस्ती किसी के  बगीचे में  घुस कर  फूल तोड़ने  की ज़रूरत ही क्या है ?

जय हिन्द !

परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार

https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan





लो भाई, आसाराम बापू तक पहुंचा दो इस पोस्ट को ...........



आसाराम अगर लीपापोती न करते और  कानून से मुंह न छिपाते बल्कि  पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज़ कराने का पता चलते ही ख़ुद चल कर पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण कर देते यह कहते हुए कि 

" मेरी पोती समान एक मासूम बच्ची ने मुझ पर देहशोषण का इतना घिनौना आरोप लगाया है कि सिर्फ़  मैं नहीं बल्कि मेरे कारण पूरा संत समाज कलंकित हो गया है इसलिए  मुझे अब संत कहलाने और  संसार में जीवित रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है . लिहाज़ा  मैं स्वयं को कानून के सुपुर्द करते हुए प्रार्थना करता हूँ  कि  मुझे कठोर से कठोर दंड देते हुए कम से कम दो बार फाँसी पर लटकाया जाये, एक बार मेरे तथाकथित अपराध के लिए और दूसरी बार  मेरे करोड़ों जिज्ञासु शिष्यों  को होने वाली आत्मिक पीड़ा  के लिए .......मुझे अपने ऊपर लगे  आरोप पर सफ़ाई में कुछ नहीं कहना है . एक साधु पर इतना बड़ा आरोप लग जाना ही पर्याप्त है .......लिहाज़ा या तो एक महीने के भीतर भीतर कानून अपने  विधिविधान से मेरे प्राण ले ले  अन्यथा  मैं स्वयं ही अपने आश्रम में जीवित समाधि  ले लूँगा . इतना बड़ा बोझ ले कर न मैं अब जी  सकता हूँ और न ही साधना कर सकता हूँ

मेरी मृत्यु के समय  मेरे तमाम शिष्य पूरी तरह शांति बनाये रखें और हरी ॐ का जाप करते रहें . भगवान् उन भले लोगों का भी भला ही करे जिन्होंने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के लिए मुझ पर  यह कालिख पोतने में सफलता प्राप्त कर ली . हमेशा की तरह मैं उनका यह अपराध क्षमा भी करता हूँ  साथ ही  उस नन्ही बिटिया को उसके सुखी जीवन की कामना करते हुए अपनी ओर से सवा करोड़ रूपये की रकम भी भेंट करने का आदेश  अपने आश्रम के  प्रबंधकों को देता हूँ  ....हरी ॐ  हरी ॐ  हरी ॐ "

अन्य  नौटंकी करने के बजाय आसाराम ऐसा करते तो  न केवल शिष्यों और साधु समाज की बल्कि आम जनता और पुलिस की भी पूर्ण सहानुभूति उन्हें मिल जाती .  क्योंकि  हमारा देश पढ़े लिखे गंवारों का देश है  जहाँ  किसी के समर्थन या विरोध में भीड़ इकठ्ठा होते हुए देर नहीं लगती .

जय राम जी की बोलना पड़ेगा .

परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार
https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan?ref=hl

albela khatri on aasaram bapu

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अनिल पुसदकर और ललित शर्मा जी ! क्षमा करना ..रायपुर में मैंने जो देखा वो द्रवित करने वाला तो था ही क्रोधित भी कर गया




दर्द के मारे वह तड़प रही थी. आँखों से  लगातार  आंसू बह रहे  थे  

और चीत्कार  ऐसे कर रही थी मानो...आसमान फाड़ डालेगी . उसकी 

वह पीड़ा व  करुण क्रन्दन मुझसे  नहीं देखे जा रहे थे तो वह स्वयं 

कैसे बर्दाश्त कर रही होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है . 

पहली बार  मैंने  उस दिन भगवान  को कोसा कि  हे भगवान ! तू ऐसे 

बेघर, भूखे-प्यासे  और  समाज के ठुकराए हुए, पहले से ही महादुखी  

इन मासूम गरीबों को इतना दुःख क्यों देता है  कि देखने वालों की  

आँखों से भी लोहू टपक पड़े...........



बात रायपुर रेलवे स्टेशन की  है जहाँ कुछ दिन पहले  बंधुवर अनिल 

पुसदकर  और ललित शर्मा जी मुझे छोड़ गए थे  परन्तु मेरी ट्रेन चार 

घंटे लेट होने की  वजह से मैं टाइमपासू  प्रक्रिया में स्टेशन के मुख्य 

द्वार के पास ही  बाहर एक ऐसी जगह खड़ा सिगरेट फूंक रहा था  जहाँ 

बहुत से  यात्री, भिखारी, कुली, पुलिस वाले इत्यादि  जमा थे . यह 

चिल्लाने और रोने वाली महिला  लगभग 30  वर्षीय फटेहाल भिखारन 

थी  जिसके  पाँव  का एक पंजा  ज़ख़्मी था  बल्कि पूरी तरह से सडा 

हुआ था   यों लग रहा था मानो उसके ऊपर से कोई  वाहन गुज़र गया 

हो . वह बार बार  अपने पंजे को हाथ में लेती  और रोती ......फिर इधर

उधर देखती कि शायद  कोई  मदद कर दे.....मेरा मन किया  कि उसे 

किसी  डाक्टर के पास  ले जाऊं.......लेकिन संभव नहीं था क्योंकि मेरे 

पास बहुत सा लगेज  था ..फिर सोचा  मेरे पास जित्ती दर्द निवारक है  

दे दूँ...मगर अगर कोई गोली  उसे  रिएक्शन कर गयी तो ?  खैर  मैंने  

सबसे सही तरीका अपनाया  और जेब से पाँच पाँच सौ  के दो नोट 

निकाल कर  देने लगा . तभी  मैंने देखा कि  एक और मैला कुचैला  सा 

गरीब भिखारी  उसके पास आ कर बैठ गया और बतियाने लगा . वह 

नशे में लग रहा था . उसने अपने थैले में से  एक  बोतल निकाली और 

एक घूँट भरके उस  रोती हुई महिला को दे दी...महिला एक ही सांस  

में पूरी बोतल खाली कर गयी .........फिर उसने अपने झोले में हाथ  

डाल कर कुछ निकाला  जिनमे  कुछ वेफर थे, दो पैकेट नमकीन 

काजू के थे  एक पार्ले जी  था और एक आलू वडा था . मैं कौतुहल 

से देखने लगा . पुरुष भिखारी ने दो बीड़ियाँ एक साथ सुलगायीं 

जिनमे से  एक महिला को थमा दी . महिला ने हाहाकारी सुट्टा 

लगाया  और चार - पाँच " वो वाली गालियाँ " दे कर  शांत हो गयी . 

हालांकि पाँव से उसकी पीड़ा अब भी कम नहीं हुई थी  ये उसका 

चेहरा बता रहा था . 


तभी वहां एक और भिखारीनुमा  शख्स आया  जिसे देख कर दोनों 

की  आँखें चमक उठीं .  उनहोंने जल्दी जल्दी अपने झोलों में  हाथ 

डाला और  ये सब सामान निकाला -  एक नयी लुंगी, एक तौलिया,  

एक प्लेट पीतल की,  चार पाँच ब्लाउज पीस, एक साड़ी और  एक 

जोड़ी नयी हवाई चप्पल ..........नए भिखारी ने  सब सामान देखा 

और उन्हें इशारा किया ...थोडा मोल भाव जैसा कुछ हुआ  और 

अंततः  महिला ने  अपने झोले में से एक पीतल का बड़ा सा  गिलास 

निकाला  और नए भिखारी ने  अपने झोले में से  एक लीटर वाली 

थम्सअप  की बोतल निकाली  जिसमे  कच्ची शराब भरी हुई थी......

...ऐसा मैं इसलिए कह सकता हूँ कि कोई भी शराब इत्ती बदबू नहीं 

मारती..जित्ती वो मार रही थी...........ऐन उसी वक्त एक पुलिस सब 

इन्स्पेक्टर  और कुछ सिपाही  वहां  से गुज़रे और उन्होंने  सब देखा 

भी...........परन्तु   चुपचाप निकल लिए .........



फिर सारे सामान देकर शराब खरीदी गयी, पी गयी,  उबले अंडे मंगा 

कर खाए गए यानि कि  पार्टी हो गयी...ये देख कर  मेरा मन वितृष्णा 

से भर गया ......और मैंने  अपने रूपये  वापिस में पर्स में रख कर 

भगवान से माफ़ी मांगी उसे कोसने के लिए और  नयी सिगरेट सुलगा

कर  वहां से  दूर हट गया  तो देखा दो कम उम्र के लड़के, एक बूढ़ा 

और एक जवान महिला  बैठे ब्राउन  सुगर  पी रहे थे ......हे राम !  

क्या यही छत्तीसगढ़ का रायपुर  स्टेशन है  जहाँ  यात्री  धूम्रपान 

नहीं कर सकता और  भिखारी ड्रग्स ले रहे हैं  ...क्यों अनिल पुसदकर 

जी...क्यों ललित शर्मा जी ?  कभी ध्यान दो भाई इस बुराई पर भी.....

क्षमा करना ..रायपुर में मैंने जो देखा वो द्रवित करने वाला तो था ही 

क्रोधित भी कर गया 


श्रीगंगानगर में जगजीतसिंह नाईट के अवसर पर अलबेला खत्री का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय कला मंदिर के आयोजकश्री, इस समारोह में जगजीतसिंह, फिल्मकार योगेश छाबड़ा  और अलबेला खत्री  तीनों को उनकी जन्मभूमि  पर सम्मानित किया गया था .












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