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Albela Khatri

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दिल्ली वालो! अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता


सावधान !  ख़बरदार !!   होशियार !!!

दिल्ली के मन्त्रियों को भले ही सुरक्षा की ज़रूरत न हो, परन्तु दिल्ली के अवाम को तो अब अपने और अपने बच्चों के लिए सुरक्षा मांग ही लेनी चाहिए क्योंकि  मज़ाक मज़ाक में उसने ऐसे लोगों को हुक्मरान बना दिया है जिनका कोई भरोसा नहीं कि कब, किस मासूम को खेलने के अपराध में जेल जाना पड़  जाए -

हा हा हा पता नहीं कब किस बाप को इसलिए जेल जाना पड़ जाए कि उसने ऐसी अपराधी औलाद पैदा की कि जो क्रिकेट खेलती है और अपनी गेन्द से मन्त्रीजी की गाड़ी के काँच तिड़का देती है

दिल्ली वालो!  अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता

राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग
दो दिन में दिखला दिया, अपना असली रंग
अपना असली रंग, मुखौटा उतर गया है
आम होगया ख़ास, ज़ेहन तक असर गया है  
पाई पहली बार, कार जब नौ-दस लाखी
भूल गई औक़ात, लाज खूंटी पर राखी  


जय हिन्द !
अलबेला खत्री
राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग







हमने कहा, 'कुछ दिखाई नहीं देता' वो बोले, 'यही तो लोकराज है'


उस रात रेल में

गुजरात मेल में

हमने मौका देख कर एक पैग लगाया


थोड़ा बहुत खाना खाया

अपनी आरक्षित शायिका पर बिस्तर बिछाया

और बत्तीसी पर ब्रश रगड़ कर बन्दा जैसे ही वापस आया

तो पाया

एक ठिगना सा,

मोटा सा गंजा सा,

भद्दा सा

नेतानुमा खादीधारी व्यक्ति

हमारी शायिका पर काबिज़ हो गया है

और हमारे ही बिछाए बिस्तर पर बेधड़क सो गया है

हमने उसे झिंझोड़ कर जगाया और बताया

कि भाया ये शायिका हमारी है

वो बोला, 'शायिका क्या पूरी गाड़ी तुम्हारी है'

हमने कहा, 'हमने इसका पैसा दिया है'

वो बोला, 'तो मुझ पे क्या ऐहसान किया है?'

फिर ख़ुद ही गैंडा छाप सिगरेट का

मुड़ा-तुड़ा पैकेट हमारी तरफ़ बढ़ाते हुए बोला,

'गुस्सा मत कीजिए, लीजिए गैंडा छाप सिगरेट पीजिए'

हमने कहा, 'हम बीड़ी के शौकीन हैं, सिगरेट नहीं पीते'

वो बोला, 'जनाब! एक कश लगा कर तो देखिए,

'ज़िन्दगी रंगीन हो जाएगी'

हमने कहा, 'आप हमें आस्तीन चढ़ाने को मजबूर मत कीजिए'

नेता बोला, 'श्रीमान जी, शान्त हो जाइए

लीजिए मुफ़्त की सिगरेट पीजिए'

यह कह कर नेता ने

हमारी तरफ़ सिगरेट का पैकेट बढ़ा दिया

फोकट में मिलती देख हमारे भी मुंह में

तलब का पानी आ गया

हमने एक सिगरेट निकाल कर अधरों से लगाया सुलगाया

और एक हाहाकारी सुट्टा लगाया तो

हमारा पूरा दिमाग़ बेयरिंग सा घूमने लगा

और शरीर बेवड़े की भांति झूमने लगा

खोपड़ी में प्रलयंकारी चक्कर आने लगे

तो नेता जी हमें देख कर मुस्कुराने लगे

हमने कहा, 'आपको बत्तीसी निकालते हुए शर्म नहीं आती?'

वो बोले, 'हमें तो मज़ा आ रहा है,

हमारी सिगरेट में मिला गांजा रंग ला रहा है

अब आप रात भर परेशान होते रहेंगे

और हम तुम्हारी बर्थ पर गदहे बेच कर सोते रहेंगे'

हमने कहा, 'तुमने छल किया है'

वो बोला, 'इस देश का नेता और करता ही क्या है?

अब जो हो रहा है होने दो हमें चुपचाप सोने दो'

हमने कहा, 'हमारे भेजे में कुछ अटक रहा है'

वो बोले, 'गांजे का धुआं है,

जो अबु सलेम की तरह बाहर निकलने को भटक रहा है'

हमने कहा, 'तबीयत घबरा रही है'

वो बोले, 'डरो मत, सोनिया एंड पार्टी रूपया गिरा रही है'

हमने कहा, 'दम घुट रहा है'

वो बोले, 'देश लुट रहा है'

हमने कहा, 'चित्त परेशान है'

वो बोले, मनमोहन महान है'

हमने कहा, 'जान पे बन आई है'

वो बोले, 'ये कांग्रेस आई है'

हमने कहा, 'दर्द बढ़ता ही जा रहा है'

वो बोले, 'मतदान का दिन नज़दीक आ रहा है'

हमने कहा, 'यमदूत नज़र आ रहे हैं'

वो बोले, 'नीतिश कुमार के दिन ख़राब आ रहे हैं'

हमने कहा, 'मौत का खटका है'

वो बोले, 'ये नरेन्द्र मोदी का झटका है'

हमने कहा, 'हम मर जाएंगे'

वो बोले, 'मंदिर वहीं बनाएंगे'

हमने कहा, 'बाल-बच्चे क्या खाएंगे?'

वो बोले, 'ये लालू यादव बताएंगे'

हमने कहा, 'कुछ सुनाई नहीं देता'

वो बोले, 'ये जनता की आवाज़ है'

हमने कहा, 'कुछ दिखाई नहीं देता'

वो बोले, 'यही तो लोकराज है'

जय हिन्द !


अलबेला खत्री

pravin b. nanavati & hasyakavi albela khatri

रक्षाबन्धन पर हास्यकवि अलबेला खत्री के दोहे

रक्षाबन्धन पर हास्यकवि अलबेला खत्री के दोहे

रक्षाबन्धन पर हास्यकवि अलबेला खत्री के दोहे

रक्षाबन्धन पर हास्यकवि अलबेला खत्री के दोहे

रक्षाबन्धन पर हास्यकवि अलबेला खत्री के दोहे

बहनें ले कर चल पड़ी, तिलक,मिठाई,डोर

रक्षा-बन्धन के दोहे........

अधरों पर मुस्कान है, आँखों में उन्माद


रक्षा बन्धन आ गया, लेकर नव आह्लाद



आजा बहना बाँध दे, लाल गुलाबी  डोर


तिलक लगा कर पेश कर, मुँह में मीठा कोर



राखी के त्यौहार का,  आया दिवस महान


इस उत्सव की देश में, सबसे आला शान



गदगद हैं  माता-पिता, बच्चों में उत्साह  


सम्बन्धों में स्नेह का, धागा बना गवाह



राखी बँधी कलाइयाँ, चमक रहीं चहुँ ओर


इस निर्मल आनन्द का, नहीं मिलेगा छोर



छोटी बहना बोलती,  तुतले तुतले बोल


भैया मेले तू नहीं, जाना मुझको छोल



बहना तेरे प्यार का, बन्धन मेरी शान


नहीं भुलाऊंगा कभी, मैं राखी की आन 



प्रतीक्षा पूरी हुई, निकली अनुपम भोर


बहनें ले कर चल पड़ी, तिलक,मिठाई,डोर 



सभी भाइयों और सभी बहनों को  अलबेला खत्री  की ओर से 

राखी के त्यौहार पर  लाख लाख बधाइयां और अभिनन्दन !


-अलबेला खत्री 


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