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Albela Khatri

बहनें ले कर चल पड़ी, तिलक,मिठाई,डोर

रक्षा-बन्धन के दोहे........

अधरों पर मुस्कान है, आँखों में उन्माद


रक्षा बन्धन आ गया, लेकर नव आह्लाद



आजा बहना बाँध दे, लाल गुलाबी  डोर


तिलक लगा कर पेश कर, मुँह में मीठा कोर



राखी के त्यौहार का,  आया दिवस महान


इस उत्सव की देश में, सबसे आला शान



गदगद हैं  माता-पिता, बच्चों में उत्साह  


सम्बन्धों में स्नेह का, धागा बना गवाह



राखी बँधी कलाइयाँ, चमक रहीं चहुँ ओर


इस निर्मल आनन्द का, नहीं मिलेगा छोर



छोटी बहना बोलती,  तुतले तुतले बोल


भैया मेले तू नहीं, जाना मुझको छोल



बहना तेरे प्यार का, बन्धन मेरी शान


नहीं भुलाऊंगा कभी, मैं राखी की आन 



प्रतीक्षा पूरी हुई, निकली अनुपम भोर


बहनें ले कर चल पड़ी, तिलक,मिठाई,डोर 



सभी भाइयों और सभी बहनों को  अलबेला खत्री  की ओर से 

राखी के त्यौहार पर  लाख लाख बधाइयां और अभिनन्दन !


-अलबेला खत्री 


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3 comments:

शिवम् मिश्रा August 2, 2012 at 9:50 AM  

ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सभी को रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाये | आपके इस खूबसूरत पोस्ट का एक कतरा हमने सहेज लिया है, एक आध्यात्मिक बंधन :- रक्षाबंधन - ब्लॉग बुलेटिन, के लिए, पाठक आपकी पोस्टों तक पहुंचें और आप उनकी पोस्टों तक, यही उद्देश्य है हमारा, उम्मीद है आपको निराशा नहीं होगी, टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें … धन्यवाद !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) August 2, 2012 at 3:57 PM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
श्रावणी पर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh August 2, 2012 at 9:29 PM  

दोहे बढ़िया बन पड़े हैं.
रक्षा बंधन की शुभकामनाएँ...

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