आदरणीय अन्ना जी !
जिस महान मकसद के लिए आपने कदम उठाया, वह लगभग हासिल
हो चुका है . भले ही अभी काम पूरा नहीं हुआ लेकिन जितना हुआ है वह
ऐतिहासिक है और अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है . वह कोई कम नहीं है .
सारी पार्टियाँ, सारे दल एक ही मुद्दे पर संसद में चर्चा करते हुए जिस
प्रकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपकी जंग को समर्थन दे रहे थे उसे देख
कर मेरी पीढ़ी के लोगों को गर्व हो रहा था कि भले ही हमने गांधी को
अंग्रेजों से लड़ते हुए नहीं देखा, परन्तु हम अन्ना को भ्रष्टाचार के
खिलाफ लड़ते हुए न केवल देख रहे हैं अपितु यथाशक्ति अपना साथ
भी दे रहे हैं
अब आप अनशन तोड़ दीजिये प्रभु ! अब और जिद्द मत कीजिये .
आपका हठ अब तक हमें प्रेरित कर रहा था परन्तु अब हमें चिंतित
और परेशान करने लगा है .
12 दिन से आपने कुछ खाया नहीं है सिवाय लोकसमर्थन के, जिससे
बाकी सारे काम भले ही हो जाएँ पर पेट नहीं भरता और ज़िन्दा रहने
के लिए पेट भरना ज़रूरी है
देश के लिए मरना कोई बड़ी बात नहीं है ...देश के लिए जीना बड़ी बात
है . क्योंकि मरते तो लोग रोज़ हैं यहाँ ..कौन पूछ रहा है उनके बारे
में ? वो हेमंत करकरे, वो संदीप उन्नीकृष्णन और हज़ारों हज़ार
फौजी जो सरहद पर मर मिट गये देश के लिए.. देश ने कहाँ याद
रखा किसी को, लेकिन जो लोग देश के लिए जिए ऐसे अन्ना हज़ारे
को, किरण बेदी को, बाबा रामदेव को, नरेन्द्र मोदी को, सोनिया गांधी
को, कपिल देव को, सचिन तेंदुलकर को, बिड़ला को, टाटा को और
अमिताभ बच्चन को पूरा देश जानता, पहचानता और मानता है .
आप रहेंगे तो सब होगा, सबके सपने पूरे होंगे. अगर आप ही अनशन
पर डटे रहे, तो............हम सब चिन्तित हैं अन्ना !
देश के लिए मरना नहीं, बल्कि देश की तमाम बुराइयों को मारना है,
देश के दुश्मनों को मारना है, मारते-मारते मरना और मरते मरते भी
मारना है, ख़त्म करना है उन तिलचट्टों को जो देश को चट कर रहे हैं
ये पोस्ट बहुत लम्बी होती जा रही है और इत्ती लम्बी पोस्ट कोई
पढता नहीं है इसलिए मेरी कर बद्ध प्रार्थना है ..कृपया कुछ अन्न
ग्रहण कर लीजिये .
जय हिन्द !








