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पुरुलिया में मौलिक व बेहतरीन कवितायें प्रस्तुत हुईं, घटिया चुटकुलों व जुमलों का रायता नहीं फैलाया गया



कौन कहता है कि आजकल मंच पर अच्छी कवितायें सुनाई नहीं जातीं  या सुनी नहीं जातीं ,,,,पुरुलिया (WB) में तो रोटरी क्लब ऑफ़ पुरुलिया द्वारा आयोजित हास्यकवि सम्मेलन ने इस बार सफलता के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, पाठकों को यही बात बताने के लिए मैं  मरा जा रहा हूँ  क्योंकि  मैं बहुत प्रसन्न हूँ, आनंद में हूँ  और आप सभी मित्रों को भी अपनी ख़ुशी में शामिल करना चाहता हूँ . भले ही  इस समय रात के 2  बजे हैं तथा अभी अभी  बहुत लम्बी यात्रा से लौटा हूँ - भले ही यात्रा से टूटी हुई देह तो कह रही है कि सोजा बेटा ! कल सुबह देखेंगे, लेकिन दिल है कि मानता नहीं .इसलिए अभी के अभी लिख रहा हूँ

व्यंग्य सम्राट माणिक वर्मा,  ओजस्वी कवि कर्नल (डॉ) वी पी सिंह,  हास्यमूर्ति सुरेन्द्र यादवेन्द्र, व्यंग्य गीतकार सुदीप भोला, कवयित्री काव्या मिश्रा और मंच संचालक अलबेला खत्री ने अपनी साढ़े 5 घण्टे  की ज़बरदस्त प्रस्तुति से पुरुलिया वासियों को आनंद के रस से कितना सराबोर कर दिया इसका अन्दाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  6 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम अधिकतम साढ़े 10  बजे तक चलना था  परन्तु साढ़े 11 बजे भी लोग उठ कर घर जाने को तैयार नहीं थे ………………और सबसे उत्तम बात तो ये है कि  पूरे कवि सम्मेलन में सिर्फ़ और सिर्फ़  मौलिक व बेहतरीन कवितायें प्रस्तुत हुईं, घटिया चुटकुलों व जुमलों का रायता नहीं फैलाया गया

यह  एक सुखद घटना  है और इसके लिए मैं आयोजन  समिति व अपनी टीम के तमाम कवियों का हृदय से आभारी हूँ

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
hasya kavi sammelan by rotary club of puruliya WB with albela khatri



3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक December 24, 2013 at 6:34 AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (24-12-13) को मंगलवारीय चर्चा 1471 --"सुधरेंगे बिगड़े हुए हाल" पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय December 24, 2013 at 11:48 AM  

सफल आयोजन की ढेरों बधाइयाँ

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ December 24, 2013 at 3:24 PM  

क्या बात वाह! बहुत ख़ूब!

अरे! मैं कैसे नहीं हूँ ख़ास?

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