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हमारा लक्ष्य गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे


डिस्क्लेमर : इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं तथा इनका किसी भी जीवित अथवा मुर्दा व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है.  

एक गरीब लोकतांत्रिक गाँव में भज्जू और कंगू नाम के दो अमीर पहलवान रहते थे. देश भर में जब भी उनका कहीं मुकाबला होता, हज़ारों लोग टिकट खरीद  उसे देखते और अखाड़े में अपने अपने पसन्दीदा पहलवान का हौसला बढ़ाते. 50 साल तक ये खेल चलता रहा, दोनों पहलवान बूढ़े हो गए लेकिन मुकाबला बंद नहीं किया क्योंकि  अब वे पहलवानी दिखाने के लिए नहीं बल्कि धन कमाने के लिए लड़ते थे . वैसे अंदर की बात यह है कि वे लड़ते तो केवल दिखावे मात्र के लिए थे - अन्दर ही अन्दर दोनों की मिलिभगत थी … एक बार यह जीतेगा  तो दूसरी बार वह

इस बात का पता जब गाँव के एक पुलिस वाले खजलू को लगा कि दोनों मिले हुए हैं  और मुकाबले के बहाने लोगों को चूतिया बना रहे हैं तो उसने इसका लाभ लेने की युक्ति लगाईं . उसने अगले ही दिन पुलिस की नौकरी छोड़ दी और गांव के सभी जेबकतरों को बुला कर बताया कि उन्हें क्या करना है . इसके बाद उसने गाँव के सब निठल्ले और मवाली किस्म के लोगों का ऑडिशन ले कर उनमे से 2  लोगों को चुन लिया व उन्हें अपनी जेब से कुछ रुपये दे कर पहलवानी के गुर सीखने के लिए कहा - साथ ही गांव में पूरी पंचायत के सामने ढिंढोरा पीट दिया कि दोनों पहलवान आपस में मिले हुए हैं और गाँव को बेवकूफ बना रहे है - तब एक पहलवान कंगू ने रोष में आ कर कहा कि खजलू, तुझे ज़यादा खुजली है तो तू मुकाबला कर ले - पता लग जाएगा कि पहलवानी किसे कहते हैं . यह सुन कर खजलू ने चुनौती तो स्वीकार ली और दावा भी किया कि वह और सिस्सू  - विस्सू नाम वाले उसके दो साथी मिल कर इन दोनों को धूल चटा  देंगे लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके लिए मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है, खजलू की बात सुन कर  गाँव वालों ने उसे खूब चंदा  देने की पेशकश की और देखते ही देखते  खूब धन भी जमा हो गया . प्रसन्न मुद्रा में खजलू घर गया और मुकाबले की नियत तारीख का इंतज़ार करने लगा .

मुकाबले  की पूर्व संध्या पर सभी जेबकतरों को बुला कर खजलू ने हिदायत दे दी  कि जैसे ही मुकाबला शुरू हो तथा लोगों  का ध्यान कुश्ती में लग जाए, सभी की जेब काट डालना ................... उधर सिस्सू - विस्सू  को जापानी तेल की दो दो बोतलें थमा कर निर्देश दिया कि कल मुकाबले से पहले पूरे शरीर को चौपड़ लेना

मुकाबला हुआ और खूब हुआ और जापानी तेल की रपटन के चलते खजलू, सिस्सु और विस्सू  के आगे भज्जू और कंगू जैसे पहलवान का एक भी दाव न चला,  लिहाज़ा न कोई जीता, न कोई हारा - मुकाबला बराबरी पर ख़त्म हुआ

शाम को जेबकतरों से उगाही करते हुए खजलू  ने सिस्सू - विस्सू  से कहा कि यह मुकाबला तो केवल बोहनी भर थी.......... हमारा लक्ष्य  गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना  है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे  और सभी जगह के दर्शकों की जेब काटेंगे

सभी ने हर्षध्वनि की और पटाखे छोड़ते हुए  अपने अपने घर कू  चले गए

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
dedicated to gurumaa anandmurti by albela khatri at ambheti
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hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya

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2 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ December 12, 2013 at 3:07 PM  

क्या बात!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक December 13, 2013 at 5:50 AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (13-12-13) को "मजबूरी गाती है" (चर्चा मंच : अंक-1460) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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