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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

मुझ सी ही नटखट मेरी परछाइयाँ


हाय रे  ये इश्क़ की बेताबियाँ


ले रही हैं ज़िन्दगी अंगड़ाइयां



क्या कहूँ इस से ज़ियादा आप को


मार डालेंगी मुझे तन्हाइयां



आजकल मातम है क्यूँ छाया हुआ


सुनते थे कल तक जहाँ शहनाइयाँ



दौर है ये ज़ोर की आजमाइशों  का


भिड़ रही हैं परवतों से राइयां



चल पड़ा हूँ  मैं निहत्था जंग में


लाज रख लेना तू मेरी साइयां



इक जगह टिकती नहीं हैं  ये कभी


मुझ सी ही नटखट  मेरी परछाइयाँ



इतनी सुन्दर  बीवियां दिखती नहीं


जितनी सुन्दर काम वाली बाइयां



'अलबेला' है मसखरा, शायर नहीं


ढूंढिए मत ग़ज़ल में   गहराइयां 



-अलबेला खत्री 


ग़ज़लनुमा,jai, maa, hinglaj,surat,poery, bhajan


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