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Albela Khatri

मित्रता दिवस को समर्पित छह दोहे





सारे रिश्ते देह के, मन का केवल यार


यारी जब से हो गई , जीवन है गुलज़ार




मन ने मन से कर लिया आजीवन अनुबन्ध


तेरी मेरी मित्रता  स्नेहसिक्त सम्बन्ध




मित्र सरीखा कौन है, इस दुनिया में मर्द


बाँट सके जो दर्द को बन कर के हमदर्द




मीत बनो तो यूँ बनो, जैसे शिव और राम


इक दूजे का रात दिन, जपे निरन्तर नाम




मेरी हर शुभकामना, फले तुझे ऐ यार


यश धन बल आरोग्य से, दमके घर संसार




चाहे दुःख का रुदन हो, चाहे सुख के गीत


रहना मेरे साथ में,  हर दम मेरे मीत




-अलबेला खत्री
jai maa hingulaj, hingulaj video, hingol,hingulamata










7 comments:

शारदा अरोरा August 5, 2012 at 5:16 PM  

bahut khoobsoorat...

Ramakant Singh August 5, 2012 at 6:47 PM  

मीत बनो तो यूँ बनो, जैसे शिव और राम
इक दूजे का रात दिन, जपे निरन्तर नाम

चाहे दुःख का रुदन हो, चाहे सुख के गीत
रहना मेरे साथ में, हर दम मेरे मीत

अलबेला सचमुच में अलबेला है कोई संदेह नहीं .
कोई प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) August 5, 2012 at 7:15 PM  

बढ़िया दोहे।
✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮
~~♥ मित्रतादिवस की शुभकामनाएँ ! ♥~~
✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮✿⊱╮
________/)______./¯"""/')
¯¯¯¯¯¯¯¯¯\)¯¯¯¯¯'\_„„„„\)

dheerendra August 6, 2012 at 12:38 AM  

दोस्ती ऐसी हो सदा,जो अपने मन को भाय
कष्ट पड़े में दुःख हरे, सुख में साथ निभाय,,,,

बहुत बढ़िया दोहे,,,,,अलबेला जी,,,,

RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

Rajesh Kumari August 6, 2012 at 12:22 PM  

आपकी इस उत्कृष्ट प्रस्तुति की चर्चा कल मंगलवार ७/८/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है |

रविकर फैजाबादी August 7, 2012 at 8:17 AM  

शुभकामनायें-
मित्रवर ||

फ्रेंड बड़ा सा शिप लिए, रहे सुरक्षित खेय |
चलें नहीं पर शीप सा, यही ट्रेंड है गेय |
यही ट्रेंड है गेय, बिलासी बुद्धि नाखुश |
गलत राह पर जाय, लगाए रविकर अंकुश |
दुःख सुख का नित साथ, संयमित स्नेही भाषा |
एक जान दो देह, यही है फ्रेंड-पिपासा ||

टाँय-टाँय फिस फ्रेड शिप, टैटेनिक दो टूक |
अहम्-शिला से बर्फ की, टकराए हो चूक |
टकराए हो चूक, हूक हिरदय में उठती |
रह जाये गर मूक, सदा मन ही मन कुढती |
इसीलिए हों रोज, सभी विषयों पर चर्चे |
गलती अपनी खोज, गाँठ पड़ जाय अगरचे ||

मित्र सेक्स विपरीत गर, रखो हमेशा ख्याल |
बनों भेड़िया न कभी, नहीं बनो वह व्याल |
नहीं बनो वह व्याल, जहर-जीवन का पी लो |
हो अटूट विश्वास, मित्र बन जीवन जी लो |
एक घरी का स्वार्थ, घरौंदा नहीं उजाड़ो |
बृहन्नला बन पार्थ, वहां मौका मत ताड़ो ||

Anonymous November 17, 2012 at 5:25 PM  


upar likhe sabhi dohe ka kya aarth hai plz likhe

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