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Albela Khatri

शेख साहेब ध्यान से.... बच्ची मेरी नादान है




हुस्न है, मदिरायें है, संगीत है और पान है


बार में  जब आ गया  तो भाड़ में ईमान है 



बाप को चश्मा नहीं और मन्दिरों को दान है


वो समझते हैं इसे, ये स्वर्ग का सोपान है




राज है पाखंडियों का, क़ैद में संविधान है


उन्नति के पथ पे यारो अपना हिन्दुस्तान है



टिड्डियों की भान्ति बढ़ते जा रहे हैं आदमी


खेत से ज़्यादा घरों में पैदा -ए - फ़स्लान है



नोट नकली, दूध नकली, नकली बिकती है दवा


प्यारे नखलिस्तां नहीं है, ये तो नकलिस्तान है



'अन्धा पीसे, कुत्ता खाये' को कहावत मत कहो


यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है



क्यों न अय्याशी करे वह, लॉटरी जब लग गई 


बाप उसका  मर गया, वो बन गया धनवान है



लाज लुटती है तो लुट  जाये, उन्हें  चिन्ता नहीं


काम मिल जाये फ़िलिम में, बस यही अरमान है



हाय रे !  कुछ नोट ले कर, बूढ़े बाबुल ने कहा


शेख साहेब ध्यान से.... बच्ची मेरी नादान है




ठरकी रोगी  सोचता है नर्स तो  पट जाएगी


यह कोई ज्योतिष नहीं है,बस मेरा अनुमान है



उसने जूठन  फेंक दी तो ये उठा कर खा गया


वो भी इक इन्सान था और ये भी इक इन्सान है



दर्द ये  महंगाई का है, बाम क्या काम आएगा ?


इसकी खातिर उस गली में भांग की दूकान है



क्या कहूँ 'अलबेला' अब मैं ग़ज़ल का अनुभव मेरा


बहर में कहना कठिन है, बे-बहर आसान है



जय हिन्द !


-अलबेला खत्री 

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6 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) August 3, 2012 at 6:18 PM  

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (04-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Ramakant Singh August 3, 2012 at 7:20 PM  

सच्ची बातों को सादगी से कहना कोई आपसे सीखे

dheerendra August 4, 2012 at 11:40 AM  

हाय रे !कुछ नोट ले कर, बूढ़े बाबुल ने कहा
शेख साहेब ध्यान से.... बच्ची मेरी नादान है,,,,,

वाह ,,,, बहुत खूब अलबेला जी,,,,,बधाई,,,,,,

RECENT POST काव्यान्जलि ...: रक्षा का बंधन,,,,

Kailash Sharma August 4, 2012 at 3:57 PM  

उसने जूठन फेंक दी तो ये उठा कर खा गया

वो भी इक इन्सान था और ये भी इक इन्सान है

...बेहतरीन गज़ल...हरेक शेर आज की सच्चाई का सटीक चित्रण करता..

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') August 5, 2012 at 1:29 PM  

बहुत खूब...
सादर।

Anonymous August 27, 2012 at 5:02 PM  

खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है
जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है,
स्वरों में कोमल निशाद और बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम इसमें वर्जित
है, पर हमने इसमें अंत में पंचम
का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता
है...

हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
.. वेद जी को अपने
संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों कि चहचाहट से
मिलती है...
Visit my webpage ... हिंदी

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