Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

धर्म सम्बन्धी झगड़े सदैव खोखली और असार बातों पर ही होते हैं - स्वामी विवेकानंद



धर्म को लेकर कभी विवाद न करो ।
धर्म सम्बन्धी
सारे विवाद और झगड़े
केवल यही दर्शाते हैं
कि वहां आध्यात्मिकता का अभाव है ।
धर्म सम्बन्धी झगड़े
सदैव
खोखली और असार
बातों
पर ही होते हैं

- स्वामी विवेकानंद

एक मोची,
जो कम से कम समय में
बढ़िया और मजबूत
जूतों की जोड़ी
तैयार कर सकता है,
अपने व्यवसाय में
वह
उस प्राध्यापक की अपेक्षा
कहीं अधिक श्रेष्ठ है
जो दिन भर
थोथी बकवास
ही करता रहता है

- स्वामी विवेकानंद




6 comments:

DR. ANWER JAMAL January 12, 2012 at 10:48 PM  

आप सही कहते हैं। अज्ञानता ही सारे विवाद का मूल है।
लेकिन जब सत्य पर आरोप लगने लगें और यह कहने लगें कि दुनिया में सारे फ़साद की जड़ ही यह है तो उसके समर्थन में बोलना मजबूरी भी बन जाती है और तब यह सत्य असत्य का संघर्ष बन जाता है और सारी आध्यात्मिकता इसी संघर्ष में निहित हो जाती है। गीता एक आध्यात्मिक उन्नति का ग्रंथ मानी जाती है और वह युद्ध का ही उपदेश है।
अतः संघर्ष और युद्ध सदैव आध्यात्मिकता की कमी से ही नहीं होते बल्कि कभी कभी सत्य और न्याय की रक्षा के लिए भी होते हैं।
ऐसा ही एक दृश्य आप इस लिंक पर देख सकते हैं-
http://kalyugeenarad.blogspot.com/2012/01/blog-post.html

DR. ANWER JAMAL January 12, 2012 at 10:49 PM  

अलबेला खत्री जी ! आप सही कहते हैं। अज्ञानता ही सारे विवाद का मूल है।
लेकिन जब सत्य पर आरोप लगने लगें और यह कहा जाने लगे कि दुनिया में सारे फ़साद की जड़ ही यह है तो उसके समर्थन में बोलना मजबूरी भी बन जाती है और तब यह सत्य असत्य का संघर्ष बन जाता है और सारी आध्यात्मिकता इसी संघर्ष में निहित हो जाती है। गीता एक आध्यात्मिक उन्नति का ग्रंथ मानी जाती है और वह युद्ध का ही उपदेश है।
अतः संघर्ष और युद्ध सदैव आध्यात्मिकता की कमी से ही नहीं होते बल्कि कभी कभी सत्य और न्याय की रक्षा के लिए भी होते हैं।
ऐसा ही एक दृश्य आप इस लिंक पर देख सकते हैं-
http://kalyugeenarad.blogspot.com/2012/01/blog-post.html

DR. ANWER JAMAL January 13, 2012 at 11:40 AM  

हरेक आस्तिक अपने पैदा करने वाले को किसी न किसी नाम से याद करता ही है। जो जिस ज़बान को जानता है, उसी में उसका नाम लेता है। हरेक ज़बान में उसके सैकड़ों-हज़ारों नाम हैं। उसका हरेक नाम सुंदर और रमणीय है। ‘रमणीय‘ को ही संस्कृत में राम कहते हैं। ईश्वर से बढ़कर रमणीय कोई भी नहीं है। कोई उसका नाम ‘राम राम‘ जपता है तो कोई ‘अल्लाह अल्लाह‘ कहता है। अलग अलग ज़बानों में लोग अलग अलग नाम लेते हैं। योगी भी नाम लेता है और सूफ़ी भी नाम लेता है।
http://vedquran.blogspot.com/2012/01/sufi-silsila-e-naqshbandiya.html

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) January 13, 2012 at 5:54 PM  

वाह!
बहुत बढ़िया!
लोहड़ी पर्व के साथ-साथ उत्तरायणी की भी बधाई और शुभकामनाएँ!

शिवम् मिश्रा January 14, 2012 at 12:08 AM  

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - लोहडी़ और मकर सक्रांति की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाये - ब्लॉग बुलेटिन

SHIVLOK January 14, 2012 at 9:29 AM  

अगर इस दुनिया में
कोई हिन्दू न होता ,
कोई मुस्लमान न होता ,
कोई इसाई न होता ,
कोई धर्म न होता ,
केवल मानव होता ,
केवल इंसान होता ,
इंसानियत होती ,
मानवता होती ,
तो कैसा लगता ,
सोचो सोचो सोचो

Post a Comment

My Blog List

Google+ Followers

About Me

My photo

tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
WebRep
Overall rating
 
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

विजेट आपके ब्लॉग पर

Blog Archive