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Albela Khatri

मिटाया था कभी जिसने, उसी ने फिर बनाया है






वो तन में भी समाया है, वो मन में भी समाया है

जिधर देखूं उधर जलवा, उसी का ही नुमाया है

मेरा मुझमे नहीं कुछ भी, जो कुछ भी है उसी का है

मिटाया था कभी जिसने, उसी ने फिर बनाया है

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6 comments:

Er. सत्यम शिवम May 21, 2011 at 3:03 AM  

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (21.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) May 21, 2011 at 6:24 AM  

बहुत सुन्दर!
विध्वंस के बाद ही निर्माण होता है!

ZEAL May 21, 2011 at 10:54 AM  

Beautiful creation Albela ji.

Kailash C Sharma May 21, 2011 at 1:24 PM  

बहुत सच कहा है...

निर्झर'नीर May 21, 2011 at 5:18 PM  

wahhhhhhhhhh albela ji

bahut khoob...laajavab panktiyan

yun hi koi kisi ko pasand nahi karta kuch na kuch to khas hota hai ..jo log khiche chale aate hai aapki taraf

Shah Nawaz May 22, 2011 at 11:50 AM  

वाह...वाह...वाह...बेहतरीन!

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