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Albela Khatri

सुअर कोई गन्दगी पर जो जा बैठा तो हंगामा.........

कल रात मुझे एक सपना आया ,सपने में देखा..........


पत्रकार ने पूछा

शरद पवार जी ! आपके चेले कलमाड़ी ने राष्ट्र मण्डल खेलों में घपले करके

बहुत सा पैसा खाया ...आपकी क्या प्रतिक्रिया है इस पर ?



शरद पवार बोले

असल में खाना तो मैं चाहता था, मगर मज़बूरी ये है कि अब मेरा मुँह

कुछ खाने लायक नहीं रहा



पत्रकार बोला

मुँह को छोड़िये, मुँह तो खाने क्या, किसी को दिखाने लायक भी नहीं रहा



शरद पवार उवाच

इसीलिए मैंने कलमाड़ी को आँख मार कर कह दिया कि बेटा ..तू खाले

और हमारे लिए रख ले...........कलमाड़ी पर मैं भरोसा इसलिए करता हूँ

क्योंकि ये होशियार आदमी है करता ज़्यादा है बोलता कम है, खाता

ज़्यादा है, ढोलता कम है । अब ये अन्ना फन्ना लगे हैं ढोल बजाने.......

बजाते रहें....मैंने तो एक कविता लिखी है । कहो तो सुनाऊं ?


पत्रकार -

कविता और आप ?



शरद पवार -

अब कवि के सपनों में आया हूँ तो कविता तो करनी ही पड़ेगी न !

सुनो-


सुअर कोई गन्दगी पर जो जा बैठा तो हंगामा

कोई
कुत्ता जो इक हड्डी चबा बैठा तो हंगामा

किये
हैं और भी लोगों ने जम कर ख़ूब घोटाले

मग
कलमाड़ी थोड़ा धन कमा बैठा तो हंगामा


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6 comments:

Ratan Singh Shekhawat May 4, 2011 at 9:09 PM  

ha ha.........

Patali-The-Village May 4, 2011 at 10:42 PM  

हकीकत को बयां करता सपना| धन्यवाद|

राज भाटिय़ा May 5, 2011 at 12:12 AM  

बहुत सुंदर प्रस्‍तुति, धन्यवाद
हा हा हा हा हा हा हा हा हा

एम सिंह May 5, 2011 at 10:03 AM  

दुनाली पर स्वागत है-
‌‌‌ना चाहकर भी

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " May 5, 2011 at 4:15 PM  

अच्छा है अलबेला जी !

डा. अरुणा कपूर. May 5, 2011 at 9:13 PM  

वाह...वाह...मजा आ गया!

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