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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

ये ब्लोगिंग का मंच है कोई सार्वजनिक वाचनालय नहीं है .

पहले तो मैं हँसा, फिर ज़ोरदार ठहाका लगाया  और अंततः खामोश

हो कर बैठ गया . उसने पूछा  - क्या हो गया  तुम्हें ? कभी हँसते हो-


कभी चुपचाप  बैठ जाते हो .



मैंने कहा - तुमने बात ही ऐसी की है भैये !  तुम कहते हो  कि तुम


सबकी पोस्ट पढ़ते हो परन्तु तुम्हारी पोस्ट कोई  नहीं पढता ...


आखिर क्यों ?



तो इसमें  हँसने वाली बात क्या है ? उसने सवाल किया



मैंने कहा - प्यारे भाई !  ये ब्लोगिंग  का मंच है  कोई सार्वजनिक


वाचनालय नहीं है . यहाँ लोग पढ़ने नहीं  बल्कि  अपना लिखा हुआ


पढ़वाने के लिए सक्रिय हैं . लोग अपनी  फ़िल्म ख़ुद लिखते हैं, ख़ुद


बनाते हैं, ख़ुद रिलीज़ करते हैं, ख़ुद उसके पोस्टर चिपकाते हैं, ख़ुद


ही समीक्षा करके और देख-देख कर हिट बनाते हैं  और ख़ुद ही उसका


अवार्ड भी प्राप्त कर लेते  हैं अपने ही कर कमलों द्वारा .........



मतलब ? वह चौंका........



चौंक मत  मित्र !  यहाँ  सब विद्वान हैं . विद्वान का धर्म अपनी  विद्वता


से लोगों को लाभान्वित करना है . यहाँ सब हलवाई हैं.  हलवाई अपनी


मिठाई लोगों को बेचता है - बाज़ार जा कर दूसरे हलवाई की मिठाई नहीं


खाता . या यों समझ कि खैर जाने दे, कोई बुरा मान जायेगा खामख्वाह...



यानी मेरे ब्लॉग पर कोई नहीं आएगा मेरा लिखा बांचने के लिए ?


क्यों नहीं आएगा ..ज़रूर आएगा ..लेकिन इनमे से किसी की शिकायत


मत कर...हाँ तुझे पाठक चाहियें तो  एक काम कर.......



क्या ?



अपनी हर पोस्ट में कहीं कहीं जगह बना कर sex , sexy ,sexy women,

 young  lady, bhabhi ,sali, nude, crime, xxx jokes, gay, nude

dance party , fun   और इससे मिलते जुलते कुछ शब्द अपनी


बुद्धिनुसार  घुसेड़ दिया करो .



इससे क्या होगा ?



तुम करके देखो..तो सही..पाठक कैसे टूट के पड़ते हैं हा हा हा हा हा



मेरी समझ में कुछ नहीं आया



लेकिन मेरी समझ में आगया  है प्यारे कि  google search से  जब


तक लोग नहीं आते, तब तक ब्लॉग पर  पाठकों का अभाव ही  रहेगा .


इसलिए मैंने तो अपना इंतज़ाम कर लिया ...अब तू भी कर ले.


.हा हा हा..


अच्छा मुझे facebook  पर माथा मारी करनी है .फिर मिलते हैं


जय हिन्द !

 
 

9 comments:

महेन्द्र मिश्र July 8, 2011 at 2:27 PM  

bade sateek anubhav hain apke kayal ho gaya hun ...

योगेन्द्र पाल July 8, 2011 at 3:27 PM  

बिल्कुल सही कहा आपने :) :D

संगीता पुरी July 8, 2011 at 4:04 PM  

लेकिन मेरी समझ में आगया है प्यारे कि google search से जब

तक लोग नहीं आते, तब तक ब्लॉग पर पाठकों का अभाव ही रहेगा .

इसलिए मैंने तो अपना इंतज़ाम कर लिया ...अब तू भी कर ले.

.हा हा हा..

नीरज जाट July 8, 2011 at 4:40 PM  

अरे वाह, बढिया तरीका दिया है जी। लेकिन मैं कहां से sexy nude घुसेडूं?

(कुंदन) July 8, 2011 at 6:08 PM  

हा हा हा हा सही कह रहे हैं सर आप

पर मै तो मस्ती में लिखता हूँ कोई पढ़े तो बढ़िया नहीं पढ़े तो उनकी मर्जी

अपन तो लिखते हैं सबका पढते हैं जो पढ़े वो अच्छा जो ना पढ़े उनकी मर्जी

बस खुद को मजा आता है लिखने में तभी लिखता हूँ नहीं तो नहीं लिखता

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) July 8, 2011 at 6:31 PM  

जीँ हाँ 850 रुपये महीना इसका किराया भी तो है!

Ratan Singh Shekhawat July 8, 2011 at 6:45 PM  

:)

राजीव तनेजा July 9, 2011 at 12:20 AM  

सही जुगाड सुझा रहे हो गुरुदेव...

ब्लॉ.ललित शर्मा July 9, 2011 at 8:59 AM  

जुगाड़ कारगर है महाराज
प्रयोग करके पहले ही देख लिया है।

हा हा हा हा

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