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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

अभी तक ज़िन्दा है कसाब मेरे देश में...........



आदमी की ज़िन्दगी का 

हाल काहे पूछते हो,

हो चुका है ख़ाना ही ख़राब मेरे देश में


भेडि़ए-सियार-गिद्ध-

चील-कौव्वे घूमते हैं

आदमी का ओढ़ के नक़ाब मेरे देश में


धरमों के नाम पे 

बहाते हैं ये लोग देखो

अपनों के ख़ून का चनाब मेरे देश में



शरम की बात है ये 

देशवासियों के लिए
 
अभी तक ज़िन्दा है कसाब मेरे देश में

kavi albela khatri surat me gujarati deshbhakton ke beech  kavita paath karte hue - is avsar par shaheedon  ke parivarjanon ko samman aur aarthik  sahyog kiya gaya
 

धर्म सम्बन्धी झगड़े सदैव खोखली और असार बातों पर ही होते हैं - स्वामी विवेकानंद



धर्म को लेकर कभी विवाद न करो ।
धर्म सम्बन्धी
सारे विवाद और झगड़े
केवल यही दर्शाते हैं
कि वहां आध्यात्मिकता का अभाव है ।
धर्म सम्बन्धी झगड़े
सदैव
खोखली और असार
बातों
पर ही होते हैं

- स्वामी विवेकानंद

एक मोची,
जो कम से कम समय में
बढ़िया और मजबूत
जूतों की जोड़ी
तैयार कर सकता है,
अपने व्यवसाय में
वह
उस प्राध्यापक की अपेक्षा
कहीं अधिक श्रेष्ठ है
जो दिन भर
थोथी बकवास
ही करता रहता है

- स्वामी विवेकानंद




रोज़ तुम फोटो न बदलो लिबास की तरह, फेस बुक पे मिलो फ़क़त एहसास की तरह




 

तुम्हारी हार में मुझको मेरी ही हार लगती है

तुम्हारे जाने की बातें तेज़ तलवार लगती है


मोहब्बत में  कोई भी गेम निर्णायक नहीं होगा


धड़कने धड़कनों से वस्ल को तैयार लगती है 





ये एहसास-ए-मोहब्बत है, जो दिल वालों को होता है


ये वायरस लग गया जिसको, वो हँसने में भी रोता है


मुझे जाना पड़ेगा पर, मैं जल्दी  लौट आऊंगा


तुम्हारी आँख का आँसू, मेरा दामन भिगोता है






कुछ लोग मिस करेंगे


कुछ लोग किस करेंगे


हम तो चले सफ़र पर


अपना बिजनिस करेंगे



रोज़ तुम फोटो न बदलो लिबास की  तरह


फेस बुक पे मिलो फ़क़त एहसास की तरह


गुलाबों की  तरह मत रंग  दिखलाया करो


ज़िन्दगी में  काम आओ  कपास की तरह 



ख़ुशियाँ मोहताज़ नहीं होतीं किसी हासिल की


तुमने मस्ती नहीं देखी क्या किसी गाफिल की


हम तो सर भी कलम करालें अपना तो क्या है ?


बस तबस्सुम  एक मिल जाये मुझे क़ातिल की



अब तो मैं हद से गुज़र जाऊं तो भी तम नहीं


चाहे जितना दर्द हो, पर आँख होगी नम नहीं


तुमने जब इकरार कर लिया है मोहब्बत का


सफ़र में मर भी गया, तो अब होगा ग़म नहीं



8 को अहमदाबाद, 9  को  धार, 
11 को  जयपुर  और  14 को सागर  विश्व विद्यालय 
के  प्रोग्राम  करने जा रहा हूँ  पर जाते जाते आपके 
लिए  आज की  तुकबन्दियाँ छोड़ के जा रहा हूँ...........
L.P.S. of USA ke sammelan 1999  me sh. c.m.patel,albela khatri, naranji patel aur d.v.patel  san jose cl.USA me albela khatri ki pustak ka lokarpan karte hue


ख़बरदार ! आज की तुकबन्दियाँ केवल वयस्कों के लिए हैं फेसबुकिया मूड में रचित इन मुक्तकों को कच्ची उम्र के लोग न पढ़ें



एक उम्र का साथ नहीं, ये जनम - जनम का साथ है

हम और तुम जो मिले हैं इसमें भी कुदरत का हाथ है


ये अनुपम सम्बन्ध हमारा दुनिया में मिसाल बनेगा


अपनी मोहब्बत, अपनी चाहत, ईश्वर  की  सौगात है 




ये बिन्दू बिन्दू  दीप सजाये लगते हैं


मुझको ये  सब तेरे ही साये लगते हैं


लफ्ज़ जहाँ पर चुप्पी साध लिया करते


वहाँ आपने  अधर हिलाये लगते हैं


ये तड़प स्वयं बतलाती है, तुम  उतर चुकी हो सागर में


तुम मीरा से कान्हा बन कर आई हो नेह  की गागर में


तुम देह नहीं हो देह्तर हो, तुम नाद हो बंशी वाले का 



दुनिया उसकी दीवानी है, जो दीवाना  उस ग्वाले का 




काम भले कितना  मुश्किल हो, किन्तु सरल हो जाएगा


तुम चाहो तो शाम को मिलना भी पोसिबल  हो जायेगा


तुम कहती धूप - छाँव  तक मुँह से कुछ  नहीं  कहती है


मैं कहता हूँ, कह कर देखो, हर लफ़्ज़  ग़ज़ल हो जायेगा



ख्याले यार में गुम वो जानेमन रहता  क्यों नहीं है


मेरी तरह  मस्ती के दरिया  में बहता क्यों नहीं है


हया कैसी मोहब्बत में उसे, डर कैसा बदनामी का


वो मुझसे प्यार करता है तो फिर कहता क्यों नहीं है 




नख से ले शिख तक तुम  प्रेम में पगी हो


इसलिए हे नेहवती ! तुम सबकी  सगी हो


कृष्ण तुम्हारे, तुम कृष्णा की जग जाहिर है 



जब भी देखा मैंने तुमको मीरा सी ही लगी हो 




ह्रदय समर्पित कर तुमको  मैंने नन्हा  उपहार दिया


भला करे भगवान आपका, तुमने इसे स्वीकार किया


कौन पूछता है जग में, किसने किसको कितना चाहा


पर एक बात तो पक्की है कि मैंने तुम से प्यार किया


_____सुप्रभात


_____उर्जस्वित दिवस .......


जय हिन्द !



Rajkot me albela khatri ke audio NAMAN MAHIMA  ka lokarpan samaroh


मैं सभी से ऊब जाना चाहता हूँ, और तुझमे डूब जाना चाहता हूँ, जिस जगह सब जा नहीं सकते, मैं वहाँ पर ख़ूब जाना चाहता हूँ





 कल मैंने एक पोस्ट लगाई थी जिसमे फेसबुक पर की गई चैटिंग 
के दौरान  जो तुकबन्दियाँ  बनी, उन्हें जस का तस  दे दिया था . 
कमाल ये हुआ कि उन्हें प्यारे  दोस्तों ने ख़ूब पढ़ा  और पसन्द भी किया 
इसलिए आज फिर मैं  वही कर रहा  हूँ - कल फेसबुक  पर chat के दौरा 
जो पंक्तियाँ बनी...आज उनका आनन्द लीजिये.........



ख्वाब तुम्हारा पूरा होगा,  मै ये वादा करता हूँ 

तुम पे भरोसा  मैं ख़ुद से भी ज़्यादा  करता हूँ 


जब भी फ़ुर्सत मिले, मुझे मेरे चुम्बन लौटा देना  


जल्दी  क्या है, मैं कब, कहाँ तकादा  करता हूँ ?



मोहब्बत में अन्धेरे  और उजाले का  हिसाब रखा नहीं  जाता 


ये  मन्दिर है, मुक़द्दस है, यहाँ जूता -जुराब   रखा नहीं  जाता  


काँटे भी आयें राह में तो कबूल कर लिए  जाते  हैं हँसते हँसते 


खार हटा कर, निज आँचल में  केवल गुलाब रखा नहीं  जाता 



ख़ुशियाँ  सारे जहान  की  मैं ला सकता हूँ 


गीत  ऐसा भी मैं गा कर  सुना सकता हूँ 


इतनी हिम्मत है  मुझमे  मेरी जान  कि मैं 


तुम्हारे लिए  इक नई  दुनिया बसा सकता हूँ 




धडकनें  अब धडकनों से मिल रही हैं 


कलियाँ मोहब्बत की यों खिल रही हैं 


जुदा होने का इलज़ाम मुझपे झूठा है 


मेरी तो साँसें तेरी साँसों से चल रही हैं 



उम्मीद तो रखनी ही होगी और साथ भी चलना ही होगा 


हिम्मत  बनाए तुम रक्खो, मौसम को बदलना ही होगा 


चाँदनी चाँद की  बेगम है, अम्बर  है शौहर  धरती का 


तन्हाई  का गर आलम है तो  यार से  मिलना ही होगा 




मैं सभी से ऊब जाना चाहता हूँ 


और तुझमे डूब जाना चाहता हूँ 


जिस जगह सब जा नहीं सकते 


मैं वहाँ पर ख़ूब जाना चाहता हूँ 



माना कि फ़ुर्सत नहीं होगी  मुलाकात के लिए


कुछ लम्हे तो निकाल सकते हो बात के लिए 


डूबना आँखों में  सबकी तकदीर में नहीं होता 


इक पल ही लुटा दो, बयाने-जज़्बात के लिए  



फासलों से भी गुज़र कर देखेंगे 


प्यार को भी समझ कर  देखेंगे 


देखें चाहे इक नज़र या उम्रभर 


पर तुझे हम  जी भर कर देखेंगे 



ये अलग बात है कि राख में आग दिखाई नहीं देती 


ताप तो  उसमें भी  लेकिन  भरपूर  होता है 


कोई कितना ही बचाना चाहे दामन  मगर याद रखो 


आशिक की  दुआ का  असर ज़रूर होता है





मुस्कुराना क्या होता है, मैं सिखलाऊंगा

तुमको कोई सब्जबाग नहीं दिखलाऊंगा 


दूरियां भी दूरियां  सी न लगेंगी  आपको 


हुनर मोहब्बत का ऐसा मैं देकर जाऊँगा 




मानस खत्री से मेरा तो बस इतना  लिंक  जुड़ा है 


वो भी मेरी तरह फेस बुक पर रचना लिए खड़ा है 


मानस है तो भला ही होगा, चाहे मेरा सगा नहीं है 


लेकिन  मेरी नज़रों में  वो मुझ से  बहुत बड़ा है 

     


आशु होना अलग बात, पर धांसू लगता प्यारा 


जो धांसू कवि होते हैं, उनका ही होता  पौ बारा 


सरस्वती की अनुकम्पा से मैं भी कोशिश कर लेता 


कभी कभी जब बह जाती है आँखों से अमृतधारा 



शुरूआत में ही कद है जिसका इतना ऊँचा 


वक्त आते आते तो  क़ुतुब मीनार हो जाएगा 


मेरी दुआ है  तुम्हारा  यश फैले चारों तरफ़ 


नाम तुम्हारा एक दिन  शाहकार हो जायेगा 



बात का मौका मिला है तो आँचल में भर ही लेना 


ग़ज़लों पर  अपनी  कुछ और शबाब  धर  ही लेना 


ये अलग बात है कि   टी वी पर भी दिख जाते हैं 


दीदार मगर  fb पर हो तो दोस्त मेरे कर ही लेना 



albela khatri ki pstak SAGAR ME BHI SOOKHA HAI MAN ke lokarpan samaroh me sh. Anand Rathi, kripashankar singh, mahavir adhikari, R.N.G.saraf aur Albela khatri aadi












तुरन्त फुरन्त में रची वे फुटकर तुकबन्दियाँ ...जो विभिन्न ब्लोग्स पर की गईं आज उनकी ही पोस्ट लगा देता हूँ ताकि ब्लॉग अपडेट रहे हा हा हा



तुम गुल बनके आओगे तो गुलाब दूंगा 

गिन गिन के नहीं दूंगा,  बेहिसाब दूंगा 


तुम ताल में आओ तो मैं सुर बन जाऊं 


पर सवाल करते रहोगे तो  जवाब दूंगा 






मैं तो चाहता  हूँ कि कोई  मुझ पर भारी पड़े 


पर जब भी पड़े भारी  तो  नर नहीं नारी पड़े 




बेताबी इधर भी है मगर फरियाद  नहीं करेंगे


मुन्तज़िर  तो हम भी हैं  पर  याद नहीं करेंगे 


_अरे भई क्यों करें ? 


भुलाया ही कब था ?




जो बात छुपा कर रखी है,  वो बात न मुझसे पूछो तुम.........


कितनी आहें कितने आंसू,  हालात न मुझसे पूछो तुम..........




नाम काटना क्या ज़रूरी है ? 


आखिर... क्या मज़बूरी है ?


दिल तो दिल से जुड़ा हुआ है 


बस कहने की दूरी है 



singer dilip pandey, kavi albela khatri, musician shekhar desh pande & singer pronita deshpande in finix  arizona USA



एक कविता उस महबूब यार के लिए, उस जानेजिगर के लिए ...जिसने अपनी मोहब्बत में बाँध कर मेरी रातों की नींद और दिन का चैन उजाड़ रखा है लेकिन बावजूद इसके मुझे उससे बेपनाह इश्क़ है ......


आज की रात जीना चाहता हूँ

आबे - हयात पीना चाहता हूँ




इससे पहले


कि मैं तुम्हारे हुस्न के झूले में झूल जाऊं


इससे पहले


कि मैं अपने मुर्शिद की दरगाह भूल जाऊं


हटालो निगाह मुझसे.................



ज़ख्म पहले ही बहुत गहरे है ज़िन्दगानी में


आज एक घाव सीना चाहता हूँ


आज की रात जीना चाहता हूँ




सिलवटें बिस्तर की पड़ी रहने दो..........


दुनियादारी की खाट खड़ी रहने दो


क्या ख़ाक मोहब्बत है, क्या राख जवानी है


लम्हों की कहानी है,  हर शै यहाँ फ़ानी है


फ़ानी को पाना क्या


फ़ानी को खोना क्या


फ़ानी पर हँसना क्या


फ़ानी पर रोना क्या


जो चढ़के न उतरे


वो जाम मयस्सर है


महबूब ने जो भेजा


पैग़ाम मयस्सर है


न सुराही, न मीना चाहता हूँ



आज की रात जीना चाहता हूँ

      
आज की रात जीना चाहता हूँ


hasyakavi albela khatri  in portu rico  ice land usa  at house  of mr.sunil lula
 

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