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Albela Khatri

इसरो एवं भारत के वैज्ञानिकों ने आज देश का मस्तक और ऊंचा कर दिया




इसरो एवं भारत के  वैज्ञानिकों ने आज देश का मस्तक और ऊंचा कर दिया - GSLV -D5 के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत ने पूर्ण स्वाभिमान से यह घोषणा कर दी है कि भारत अब इतना आगे बढ़ गया है कि स्वनिर्मित क्रायोजेनिक इन्जिन से न केवल GSLV जैसे अपने बड़े रॉकेट लॉन्च कर सकता है बल्कि अन्य देशों के लिए भी मदद कर सकता है

इधर चैनल वाले सास बहू  की साज़िशें दिखाते रहे, भाजपा, इनका और आआपा वाले अपने विरोधियों को गरियाते रहे, उधर देश के सुपूत देश की ध्वजा को आकाश में फहराते रहे ,,,

सलामी सलामी सलामी हमारे वैज्ञानिकों को
जय हिन्द !
अलबेला खत्री

अपना सिंहासन डोलता देख, लोमड़ी ने वहाँ के तमाम सियारों को चुपके से डिनर पर बुलाया


 लोमड़ी के राज में जंगल के सभी जानवर त्रस्त थे क्योंकि पड़ोसी जंगल के भेड़िये  जब तब घुस आते और नन्हे जानवरों को खा जाते. ऐसे में एक शक्तिशाली  राजा की ज़रूरत थी जो उन्हें बचा सके .......... जंगल में चारों तरफ़ चर्चा थी कि इस बार शेर को ही जिताएंगे और अपना राजा बनाएंगे हालांकि लोमड़ पार्टी इसका यह कह कर पुरज़ोर विरोध कर रही थी कि शेर तो हिंसक है, गुस्से वाला है अगर वोह राजा बन गया  तो जंगल का विनाश हो जाएगा, लेकिन सभी प्राणी ठान चुके थे कि इस बार शेर को ही शासन सौंपना है

अपना  सिंहासन डोलता देख, लोमड़ी ने वहाँ के तमाम सियारों को चुपके से डिनर पर बुलाया और कहा कि  इस बार मेरी हार निश्चित है लेकिन अगर शेर सिंहासन पर आ गया तो तुम भी मारे जाओगे और मैं भी, इसलिए  तुम तुरत फुरत एक दल बनाओ  और पूरे जंगल में घूम घूम कर  मेरा विरोध करो, मुझे गालियां दो  और मुझे  जेल भेजने की घोषणाएं करो …इससे फायदा यह होगा कि  चुनाव दो तरफ़ा से तीन तरफ़ा हो जाएगा अर्थात  जो लोग मुझसे नाराज़ हो कर शेर को वोट देने वाले हैं,  उनमें से बहुत सारे वोट तुम्हें इसलिए मिल जायेंगे  क्योंकि तुम पर हिंसक होने का कोई ख़ास ठप्पा नहीं है  लिहाज़ा जंगल के सभी धर्मनिरपेक्ष  तुम्हारे साथ हो जायेंगे

आगे यह तय हुआ कि  चुनाव में लोकदिखावे के लिए तो लोमड़दल और सियारदल इक दूजे का पुरज़ोर विरोध करेंगे परन्तु  चुनाव परिणाम  में अगर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो  हम इक दूजे के काम आयेंगे --जैसे भी हो, ये शेर नहीं आना चाहिए

वही हुआ, सीटों के हिसाब से चुनाव परिणाम शेर के पक्ष में होते हुए भी वह राजा नहीं बन सका और जिसे सबने नकार दिया था उसी के  समर्थन से सियारों ने अपनी सरकार बना ली

जंगल के सभी प्राणी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


कम से कम भारतीय जनमानस को ज़लील तो न करते विदेशी भाषा बोल कर - आपको ज़रा भी शर्म नहीं आयी हिंदी का जवाब अंग्रेजी में देते हुए ?





प्रति,
श्री श्री डॉ मनमोहन सिंहजी,
माननीय प्रधानमन्त्री,
भारत सरकार  

प्रसंग   : हार्दिक शर्म व आत्मिक दुःख की अभिव्यक्ति
सन्दर्भ :  आज का आपका संवाददाता  सम्मेलन

महोदय,
एक भारतीय होने के नाते मेरे लिए अत्यन्त शर्म एवं गहरी पीड़ा का विषय है कि आप जैसा झूठा और बनावटी व्यक्ति मेरे देश का प्रधानमंत्री है.  बचपन से ही सरदारों के मोहल्ले में रहने के कारण मैं भली भान्ति जानता हूँ कि सरदार कितने सच्चे, दिलेर और देशभक्त होते हैं  लेकिन आपने तो सरदारों के वैश्विक यश को ही  दाव पर लगा दिया सरदारजी ! आपने दिल्ली में कांग्रेसियों द्वारा कराये गए सिखों के क़त्लेआम पर आज गर्व से कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए बहुत कुछ किया गया है और उनसे माफ़ी भी मांग ली गयी है. 

हुज़ूर, और किस किस से माफ़ी मांग ली है आपने ?  भोपाल गैस काण्ड  के लाखों पीड़ितों  से मांग ली  या  उसके लिए ज़िम्मेदार  यूनियन कार्बाइड  से मांग ली ?  मुम्बई पर पाकिस्तानी हमले में मारे गए लोगों से मांग ली  या मुजफ्फरनगर  में घर से बेघर हुए दंगापीड़ितों  से मांग ली ?  सरहद पर जिनका सर काट कर लोग पाकिस्तान ले गए उनके परिवारों से मांग ली  या रोज़ाना लाखों की  संख्या में काटे जा रहे गौवंश  से माफ़ी मांग ली ? और जनाब,  क्या माफ़ी मांग लेने से पीड़ित परिवारों के कलेजे की जलन शांत हो गयी होगी ? माना कि आप प्रधानमन्त्री हैं  लेकिन कुछ तो इन्सानियत आप में भी होगी, आज थोड़ा  उसका प्रदर्शन भी कर देते

आप से जो सवाल हिन्दी में पूछे गए, उनके भी जवाब आपने अंग्रेज़ी में दिए - इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गुलाम की अपनी कोई भाषा नहीं होती - जैसा सिखाया जाता है वैसा ही बोलना पड़ता है - अरे हिन्दी नहीं आती तो उर्दू में दे देते, पंजाबी में दे देते, कम से कम भारतीय जनमानस को ज़लील तो न करते विदेशी भाषा बोल कर - आपको ज़रा भी शर्म नहीं आयी हिंदी का जवाब अंग्रेजी में देते हुए ? अफ़सोस  है,  बहुत अफ़सोस है,  एक तरफ अटल बिहारी वाजपेयी संयुक्त राष्ट्र संघ में भी हिन्दी भाषी रहे और एक तरफ आप …शेम शेम शेम

आपने प्रलाप किया कि नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमन्त्री बन गए तो देश का विनाश हो जायेगा ---बहुत अच्छे -- क्या कहने ! जिस मुख्यमन्त्री ने अपने शासन में  विकास और उन्नति के गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित कर दिए उसके प्रधानमन्त्री बनने से देश का विनाश हो जाएगा  और आप व आप जैसे अन्य लोगों ने भ्रष्टाचार, अनाचार, महंगाई व अमानवीय कृत्यों के जो गंदे नाले बहाये हैं उससे देश का विकास होगा ?

नरेन्द्र मोदी कोई सगे सम्बन्धी नहीं है मेरे, जो उनका गौरवगान करूँ  लेकिन मैंने उनके राज में गुजरात को बदलते हुए देखा है इसलिए डंके की चोट पर कह सकता हूँ  कि  वो अगर एक बार प्रधानमन्त्री बन गए तो पूरा देश चमक उठेगा - चहक उठेगा

आप गाय से ज़यादा गे के अधिकारों की चिन्ता  करते हैं, आपको महंगाई घटाने के बजाय सेंसेक्स को बढ़ाने की फिक्र लगी रहती है - ये अच्छी बात नहीं है

आपने जनता को रुलाया है सरदारजी, अगर देश की रोती-बिलखती जनता की बददुआओं में ज़रा भी असर हुआ तो ऊपर वाला आपको रुलाएगा और ऐसा रुलाएगा कि आंसू पोंछने वाला भी कोई न होगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है : अलबेला खत्री


सियासत एक की दुल्हन नहीं कइयों की रानी है

ये है बदनामी मुन्नी की तो शीला की जवानी है

सियासी लोगों की आँखों में जो घड़ियाली आँसू हैं

इलेक्शन में तो मोती है, पर उसके बाद पानी है


शरम से दूर हो तुम भी, शरम से दूर हैं हम भी

नशे में चूर हो तुम भी, नशे में चूर हैं हम भी

तमाशातूर हो तुम भी, तमाशातूर हैं हम भी

अतः लंगूर हो तुम भी, अतः लंगूर हैं हम भी



सुअर कोई गन्दगी पर जो जा बैठा तो हंगामा

कुकुर कोई जो हड्डी को चबा बैठा तो हंगामा

था जिसके पास बरसों ताज दिल्ली की सियासत का

उसी पंजे को मैं झाड़ू थमा बैठा तो हंगामा



कोई चालाक कहता है, कोई आड़ू समझता है

मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है

वो उसके साथ कैसी है, वो उसके संग कैसा है ?

ये तो जिह्वा समझती है या बस लाड़ू समझता है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
 







झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें, आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ


साहित्यिक वेबसाइट ओपन बुक्स ऑन लाइन के
 तरही  मुशायरा में प्रस्तुत मेरी ताज़ा ग़ज़ल


अश्क़ आँखों से निकला, रवाना हुआ
दर्दे-दिल का मुकम्मल तराना हुआ

ज़ुल्फ़ उसने जो खोली, घटा छा गई
मुस्कुराई तो मौसम सुहाना हुआ

हुस्न दुख्तर पे जब से है आने लगा
हाय दुश्मन ये सारा ज़माना हुआ

तब से दुनिया हमारी बड़ी हो गई
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ

चल पड़ा हूँ ठिकाना नया खोजने 
ख़त्म अपना यहाँ आबोदाना हुआ

ज़ख्म हमदर्दियों से न भर पाएंगे
फैंक दो अब ये मरहम पुराना हुआ

झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें
आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ

रूह प्यासी थी 'अलबेला' प्यासी रही
जिस्म का सारा पीना पिलाना हुआ

-अलबेला खत्री 








विनाशकाले विपरीत बुद्धि या खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे


अपना अन्त निकट देख कर भीतर ही भीतर भयभीत  कांग्रेस पार्टी 

इन दिनों जिस तरह की हरकतें कर रही है उसे क्या कहना ठीक रहेगा ?  

 "विनाशकाले विपरीत बुद्धि"  या "खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे"

जय हिन्द !



उस गरीब ग्रामीण महिला ने तो न कोई नाभिदर्शना साड़ी बाँधी होगी, न ही वक्षदर्शना ब्लाउज़ पहना होगा



शर्म ! शर्म !! शर्म !!!

"मध्य प्रदेश में हरदा के पास किसी गांव में 5 लोगों ने एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया तथा उसके जिस्म को लाइटर से जला जला कर ठहाके भी लगाये"  यह समाचार  पढ़ते समय आजतक चैनल की  तेज़ समाचार वाचिका के चेहरे पर कोई विषादभाव या दुःख  इसलिए नहीं था क्योंकि  उसके लिए तो ऐसी घटना  पर बोलना रोज़मर्रा की बात होगी परन्तु  मैं दुखी हूँ , आहत हूँ  और शर्मिन्दा भी हूँ  क्योंकि मैं भी उसी पुरुष समाज का हिस्सा हूँ  जो महिलाओं  के सम्मान और संरक्षण की बात तो करता है परन्तु  अपनी कामपिपासा के तुष्टि के  लिए  दरिन्दा बन कर किसी महिला के साथ अमानवीय अत्याचार भी करता है

उस गरीब ग्रामीण महिला ने तो न कोई  नाभिदर्शना साड़ी बाँधी होगी,  न ही वक्षदर्शना  ब्लाउज़ पहना होगा और न ही टांग दिखाऊ स्कर्ट पहनी होगी  - फिर  उस पर क्यों टूट  पड़े वे 5 राक्षस ?

यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म से डूब मरने की  बात है कि कठोरतम कानूनों के बावजूद उसके लोग इतने हिंसक और अत्याचारी हो जाएँ 


क्या इसकी रोकथाम का कोई उपाय नहीं ? 


क्या महिलाओं की रक्षा की बातें करने वाली सरकार कोई कड़े कदम उठाएगी ? 


जयहिन्द !
-अलबेला खत्री 

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