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Albela Khatri

चिट्ठाजगत के नाम अलबेला खत्री का विनम्र प्रणाम साथ ही खुल्लमखुल्ला पैगाम !

आदरणीय चिट्ठाजगत जी !

विनम्र प्रणाम

आपके कारण और आपकी कृपा के कारण मेरे बहुत से ब्लॉग और

बहुत सारे लोगों के बहुतायत में ब्लॉग अनेकानेक लोगों तक पहुँच

कर संप्रेषण को बल दे रहे हैं हम चिट्ठाकार आपकी छत्रछाया

में प्रसिद्धि भी पा रहे हैं और आत्मतुष्टि भी



आपको हार्दिक धन्यवाद


परन्तु एक बात कहनी है आपसे.............


वो क्या है कि हर शाम आपके यहाँ से एक मेल मिलता है जिस पर

नये चिट्ठाकारों का स्वागत करने के लिए कहा जाता है - ये बहुत

ही बढ़िया व्यवस्था है इसका लाभ मुझे भी मिला था परन्तु मैंने

नोट किया है कि कई बार आप जिन्हें नया कह कर प्रस्तावित

करते हैं वो चिट्ठे नये होते नहीं...........


आज ही की बात करलें तो आज कुल 12 चिट्ठों को जानकारी

आपने नये ब्लोग्स के रूप में दी है लेकिन उनमे से केवल एक ही

चिट्ठा नया है बाकी तो पहले से है, ऐसा उनके ब्लॉग देख कर

ही पता चल जाता है


इसमें और कोई समस्या तो नहीं है लेकिन जो पुराने ब्लोगर सिर्फ़

आपके कहने पर इन्हें टिपियाते हैं और अपनी आदतानुसार

बिना पढ़े टिपियाते हैं उन्हें बड़ी दिक्कत होती होगी क्योंकि वे तो

केवल एक ही वाक्य लिखते हैं " ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है "


अब जिसका स्वागत पहले ही हो चुका हो, उसका बार बार स्वागत

हो, ये हम ईर्ष्यालु लोग कैसे सहन करें ? सो या तो हमारा भी बार

-बार स्वागत कराओ या फिर लोगों का भी एक ही बार कराया करो


धन्यवाद !


सच पूछो तो इससे मुझे भी कोई परेशानी नहीं है मैंने तो केवल

इसलिए लिख दिया ये सब कि आपके नाम के सहारे मुझे ख़ूब सारी

टिप्पणियां मिल जाएँगी...........हा हा हा हा हा


बुरा मानो सनडे है

सनडे है तो फ़नडे है


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13 comments:

शिवम् मिश्रा September 5, 2010 at 11:54 PM  

भले ही बात का अंत आपने मजाकिया अंदाज़ में किया हो पर बात में दम है !

डा० अमर कुमार September 6, 2010 at 1:19 AM  


लो भई, ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है !

डा० अमर कुमार September 6, 2010 at 1:24 AM  


अच्छा.. तो अब स्वागतें भी ऍप्रूव होने लगीं ?
यह कोई रिश्वत तो है नहीं, कि धनराशि गिनने के बाद ही स्वीकार की जायेंगी ।
हमारे यहाँ तो कटे फटे गँदे लिसड़े सभी नोट स्वीकार किये जाते हैं ।

Unknown September 6, 2010 at 1:36 AM  

@ amar kumar ji

आपकी शैली का कोई जवाब नहीं श्रीमान !

आपके स्वागत का गर्मजोशी से स्वागत है

Gyan Darpan September 6, 2010 at 7:52 AM  

लो जी एक बार फिर स्वागत कर देते है :)
भाई जी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' September 6, 2010 at 8:08 AM  

हम तो चिट्ठाजगत को प्रणाम नहीं करेंगे!
--
बस निवेदन ही करेंगे कि इतनी "चर्चा मंच" सारी टिप्पणी रोज-रोज पाने पर यह चिट्ठाजगत की हॉट लिस्ट में दिखाई देने लगे!
--
अभी तक तो "चिट्ठा जगत" ने हमारी शिकायत पर
संज्ञान तक भी नही लिया है!

ब्लॉ.ललित शर्मा September 6, 2010 at 8:38 AM  


क्या अंदाज है भाई जी
राम राम

पढिए-चतुरा नाऊ भोकवा पांड़े

Urmi September 6, 2010 at 10:32 AM  

बहुत सुन्दर और शानदार प्रस्तुती!
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

Majaal September 6, 2010 at 10:37 AM  

हम तो सोचते है की हमारी comments से आपके ब्लॉग का कुछ traffic आएगा, पर वो कमबख्त भी moderation में अटक जाती है !

समयचक्र September 6, 2010 at 11:02 AM  

क्या बात है ... बहुत बढ़िया ... भैय्या सम्मानित भी करवा दो... ..

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" September 6, 2010 at 12:14 PM  

भई बात तो आपने एकदम चोखी कही :)

Udan Tashtari September 6, 2010 at 5:38 PM  

स्वागत तो कर ही देते हैं आपका...


चिट्ठाजगत पर कब कौन रजिस्टर हुआ, वो आधार है इस पत्र का न कि ब्लॉग कब खोला. :)

स्वप्न मञ्जूषा September 6, 2010 at 9:36 PM  

ऐसा मुझे भी लगा था...लेकिन समीर जी ने खुलासा कर दिया है..
धन्यवाद..!

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