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Albela Khatri

तुलसीदासजी भी चाय के ज़बरदस्त शौकीन थे


चाहे बरसे नोट ही,

चाहे डॉलर आय


तुलसी वहां जाइए

जहाँ फुल कप मिले चाय



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6 comments:

एस.एम.मासूम October 25, 2010 at 8:21 PM  

यहाँ फुल कप चाए से मतलब है इज्ज़त का. वैसे यह सही है, की चाए का शौक भी ज़ाहिर होता है.

डॉ टी एस दराल October 25, 2010 at 8:53 PM  

बहुत बढ़िया ।

ana October 25, 2010 at 10:55 PM  

wah wah bilkul sahi kaha apne ..........

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" October 25, 2010 at 11:55 PM  

जय हो कलयुगी तुलसीदास की :)

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" October 25, 2010 at 11:56 PM  

भूल सुधार:---
कलयुगी को आधुनिक पढा जाए...

mridula pradhan October 27, 2010 at 2:19 PM  

very good.

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