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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

पल में सौ बल खाती जाए, गीत वो मेरे गाती जाए




एक गोरी सांवरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गई
एक छोरी बावरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गई

पनघट जाती-जाती गाए
जल भर लाती-लाती गाए

आती गाए, जाती गाए
सखियों से बतियाती जाए

पल में सौ बल खाती जाए
गीत वो मेरे गाती जाए

कितनी बेचैन हो गई, कितनी बेचैन हो गई ...
रे मेरे गीतों की ....


उसकी छैल छबीली आँखें
चंचल आँखें , कटीली आँखें

बिजली सी चमकीली आँखें
मोटी-मोटी मछीली आँखें

नीली और नशीली आँखें
आबे-हया से गीली आँखें

तीर्थ उज्जैन हो गईं, तीर्थ उज्जैन हो गईं ...
रे मेरे गीतों की ...


जब जब मेरी याद सताये
उसकी मोहब्बत अश्क़ बहाये

तन घबराये, मन घबराये
उसका अखिल यौवन घबराये

जग-जग सारी रैन बिताये
पल दो पल भी नींद न आये

रातें कुनैन हो गईं, उसकी रातें कुनैन हो गईं
रे मेरे गीतों की ...



3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) May 17, 2012 at 8:15 PM  

बहुत बढ़िया...!

Shahnawaz Siddiqui May 17, 2012 at 9:33 PM  

वाह! क्या बात है.... ज़बरदस्त भाईजान!

M VERMA May 17, 2012 at 9:42 PM  

बहुत सुन्दर रचना

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