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Albela Khatri

मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी, आने वाला है ज़माना प्यार का



सांस  में सुर सनसनाना प्यार का

ज़िन्दगी है  ताना बाना  प्यार का


मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी

आने वाला है  ज़माना  प्यार का


यों तो हर मौसम का अपना रंग है

पर लगे मौसम सुहाना प्यार का


उफ़ जवानी का ये आलम जानेमन

और उस पर उमड़ आना  प्यार का


चीज  है अनमोल, पर बाज़ार में

नहीं मिलेगा चार आना प्यार का


बैठे ठाले यों ही कुछ कुछ लिख दिया

ख़ुद-ब-ख़ुद बन बैठा गाना प्यार का 


है मुकद्दरमन्द जिसको मिल गया

ज़िन्दगी में गुनगुनाना प्यार का


उस घड़ी मत रोकना "अलबेला" को

जब लबों पर हो तराना प्यार का


जय हिन्द !
gayika  Sadhna Sargam, Sangeetkar Arnab aur geetkar Albela Khatri

7 comments:

nilesh mathur May 31, 2012 at 3:45 PM  

बहुत सुंदर, बेहतरीन।

dr.mahendrag May 31, 2012 at 5:51 PM  

यों तो हर मौसम का अपना रंग है

पर लगे मौसम सुहाना प्यार का

Sundar rachna

Shah Nawaz June 1, 2012 at 9:17 AM  

वाह! बहुत ही बेहतरीन अलबेला जी.... ज़बरदस्त!!!

आशा जोगळेकर June 1, 2012 at 7:20 PM  

वाह पसंद आया आपका
ये तराना प्यार का ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) June 1, 2012 at 10:36 PM  

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

udaya veer singh June 2, 2012 at 7:38 AM  

एक तस्वीर ही उकेर देते मुसव्विर ,
देख लेते जमाना प्यार का ...
बुरा न माने रोचक लगीं गजल .. सुखद अनुभूति बधाईयाँ जी /

महेन्द्र मिश्र June 2, 2012 at 11:11 AM  

सांस में सुर सनसनाना प्यार का

ज़िन्दगी है ताना बाना प्यार का


बेहतरीन प्रस्तुति...आभार

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