उसने अपने हाथों में मेहंदी लगा रखी थी
हमने उसकी डोली कन्धे पे उठा रखी थी
मालूम तो था ही कि वो बेवफ़ा निकलनी है
इसलिए बहन उसकी पहले से पटा रखी थी
www.albelakhatri.com
उसने अपने हाथों में मेहंदी लगा रखी थी
हमने उसकी डोली कन्धे पे उठा रखी थी
मालूम तो था ही कि वो बेवफ़ा निकलनी है
इसलिए बहन उसकी पहले से पटा रखी थी
Labels: कवि सम्मेलन , तुकबंदी , मंचीय टोटका , मजाहिया , शायरी
albelakhari.blogspot.com |
32/100 |
Copyright 2009 - Albelakhatri.com
6 comments:
मजा आ गया,एक हमारे लिऐ भी पटा दो गुरु ।
लिखते रहिये,सानदार प्रस्तुती के लिऐ आपका आभार
साहित्यकार व ब्लागर गिरीश पंकज जीका इंटरव्यू पढने के लिऐयहाँ क्लिक करेँ >>>>
एक बार अवश्य पढेँ
भाई जी, भविष्य क्या दूर दर्शन पर देख रखा था !?
हा हा हा
आपके तो सारे जुगाड़ तगड़े हैं
राम राम
आपकी पोस्ट ब्लाग4वार्ता में
विद्यार्थियों को मस्ती से पढाएं-बचपन बचाएं-बचपन बचाएं
हा हा.
बढ़िया.
यह हुई न अलबेला खत्री नुमा बात ! आपकी यह अदा पसंद आयी !
सारे जुगाड पहले से कर रखे थे....:):)
Post a Comment