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Albela Khatri

दिल के अन्दर तू ही है

मस्ती का मदहोश समन्दर तू ही है
अखिल भुवन में सबसे सुन्दर तू ही है
आँखों में तो  लोग  बहुत से रहते हैं
लेकिन मेरे दिल के अन्दर तू ही है

-अलबेला खत्री

4 comments:

MAYUR May 22, 2009 at 8:05 PM  

बहुत पवित्र है, एक दम सूफी,मेरी नज़र से
मयूर

स्वप्न मञ्जूषा May 23, 2009 at 12:10 AM  

अलबेला जी,
बहुत सुन्दर लिखा है आपने | हमारी ओर से बधाई
स्वप्न मंजूषा

स्वप्न मञ्जूषा May 23, 2009 at 12:10 AM  

अलबेला जी,
बहुत सुन्दर लिखा है आपने | हमारी ओर से बधाई
स्वप्न मंजूषा

Udan Tashtari May 23, 2009 at 6:00 AM  

अभी ठीक से दो महिने भी नहीं बीते हैं और शतक!! गजब भाई, ये आपके ही बस का है..लग रहा है कि साल खत्म होते तो हजारा नजर आयेगा..यही चाहत भी है..बधाई के साथ साथ शुभकामनाऐं. जमाये रहिये.

:)

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