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Albela Khatri

आपका बहुत बहुत धन्यवाद भारतीय रेल जी !

चूँकि गोंदिया का कवि सम्मेलन अचानक तय हुआ था इसलिए

बनी बनाई सारी रेल टिकटें रद्द करवा के नई बनवानी पड़ीं...........


अब मज़े की बात ये है कि खरगोन में जब मैं टिकट बनवाने गया

गोंदिया से सूरत की तो टिकट खिड़की पर बैठे सज्जन ने कहा कि

8405 पुरी-अहमदाबाद ट्रेन एकदम पैक है ... एसी-2 टायर में 12 और

एसी 3 टायर में 28 waiting है जो कि conform हो ही नहीं सकती,

तो मैंने स्लीपर क्लास में waiting 40 का टिकट निकाल लिया

क्योंकि इसके conform होने के चान्सेस ज़्यादा होते हैं



सुबह पता किया तो conform नहीं हुई थी......... अब रात भर का जागा

हुआ मैं दोपहर एक बजे जब गाड़ी में चढ़ने लगा तो कई दिनों की थकान

असर दिखा रही थी ...भीड़ भी बहुत थी लेकिन मैं चढ़ ही गया s-11 में और

इन्तज़ार करने लगा टिकट चैकर का ताकि मुद्राबाण मार के एक शायिका का

शिकार कर सकूँ ........... लेकिन आधे घंटे तक भी कोई नहीं आया तो मैंने सोचा

क्यों एसी में try किया जाए,



मैंने सामान रखा और बाजू वाले डिब्बे b-1 में गया जहाँ मुझे देखते ही tti

बोले- आओ कविराज ! मैंने कहा - आप जानते हैं मुझे ? बोले- बिल्कुल

जानते हैं और ये भी जानते हैं कि आप इस वक्त सूरत जा रहे हैं ........

मैं हैरान रह गयाजाइए, 50 नंबर पर आराम कीजिये, मैं बाद में आता हूँ

जब tti ने यों कहा तो मेरी बांछें खिल गईं .


चलो काम बन गया, मैं मन ही मन खुश हुआ और अपना सामान वहां से वहां

ला कर आराम से लेट गया...........नागपुर में आँख खुली तो tti मेरे सामने थे

और चाय वाला चाय लिए खडा था.......मैंने चाय पी, लेकिन चाय वाले ने

पैसे नहीं लिए ........खैर मैंने 1000 रूपये का नोट निकाला और टिकट के

साथ tti को थमा दियाtti ने तुरन्त टिकट को टिक किया और 500-500

के दो नोट मुझे पकड़ा दिएमैं हैरानी से उन्हें देखने लगा तो बोले- मज़े करो......

मैंने कहा- डिफ़रेंस तो ले लो श्रीमान ! वो बोले - ज़रूरत नहीं..........



बहुत बाद में उन्होंने बताया कि मेरा टिकट अपग्रेड हो कर एसी में conform

हो गया थाफ़िर तो सफ़र बहुत ही शानदार कटा क्योंकि नींद मेरी उड़ गई थी

उस चेहरे को देख कर जिसे मैंने रात भर बड़े नज़दीक से देखा और खूब बातें

भी कीं



वो चेहरा मैं शायद कभी भूल पाऊं ..........उसकी बातें कभी भूल पाऊं ...लेकिन

मैं चाहता हूँ कि वो मुझे भूल जाए.............क्योंकि वो चेहरा किसी एक के घर की

इज्ज़त है.........और मैं एक आवारा बादल हूँ...........जो जहाँ नमी देखता हूँ,

वहीं बरस जाता हूँ. लेकिन इतना वादा ज़रूर करता हूँ उस चेहरे से कि

तेरा ख्याल सदा मेरे साथ रहेगा.........जो तूने सबकी नज़रों से छिपा कर मुझे

थमा दिया, तेरे मोबाइल नंबर वाला वो गुलाबी रुमाल सदा मेरे साथ रहेगा.....



आपका बहुत बहुत धन्यवाद भारतीय रेल जी ! रेल विभाग जी ! अगर आप

मेरा टिकट अपग्रेड करते तो कल मेरी देह को आराम मिलता और ही

अरमानों को नई उड़ान मिलती..............



रुमाल बहुत प्यारा है .....बहुत प्यारा है

मैं इसे सहेज कर रखूँगा घर में भी.............दिल में भी.......... लेकिन आपको

रुमाल वाले का नाम नहीं बताऊंगा .....हरगिज़ नहीं बताऊंगा.......... वरना आप

गुड्डू कि माँ को बता दोगे ..और वो मेरा ऐसा काव्यपाठ करेगी कि पूरा मोहल्ला

तालियाँ बजायेगा.................हा हा हा हा हा हा हा हा


9 comments:

पी.सी.गोदियाल October 9, 2009 at 9:59 AM  

हा-हा-हा-हा , तकिया के नीचे गिलाफ के अन्दर रखना श्रीमान, कही श्रीमतीजी न देख ले ! एक रोचक प्रसंग के लिए शुक्रिया !

शिवम् मिश्रा October 9, 2009 at 10:48 AM  

एक रोचक प्रसंग के लिए शुक्रिया !

राजीव तनेजा October 9, 2009 at 10:55 AM  

हा...हा...हा... बहुत ही रोचक प्रसंग...

आपके मज़े हैँ...अपुन ने तो जब से डेली पैसैंजरी छोड़ी है...किसी बाला के दर्शन ही नहीं होते..अब तो घर से सीधा काम पर और काम से सीधा घर पर :-(

कसम से!...अब तो पूरा एक साल हो गया है किसी बाला को नज़दीक से देखे हुए...उम्मीद है कि आप मेरी व्यथा को समझते हुए अपनी पूरी सहानुभूति मेरे साथ रखेंगे

Anil Pusadkar October 9, 2009 at 12:50 PM  

लगता है अब रेल मे ही सफ़र करना पड़ेगा।

शरद कोकास October 9, 2009 at 1:22 PM  

चलिये आप सकुशल घर पहुंच गये बधाई । (इन दिनो ऐसा चलन है कि कोई कवि यात्रा से वन पीस लौटकर घर आ जाता है तो उसे बधाई देते है ,हमारे मित्र नीरज पुरी ,और अन्य नही लौट पाये थे )

Murari Pareek October 9, 2009 at 2:19 PM  

हा..हा.. रुमाल वाला बोले तो ... कहीं आप ..... दोस्ताना....नहीं नहीं... भाई ये गड़बड़ झाला है ! वापसी पर आपका जोरदार स्वागत है !!

सुलभ सतरंगी October 9, 2009 at 2:38 PM  

हरगिज़ नहीं बताऊंगा..........हा हा हा हा हा हा हा हा

राज भाटिय़ा October 9, 2009 at 2:53 PM  

बहुत सुंदर लगा, चलिये आप को सीट तो अच्छी मिल गई ओर पडोसी भी....
धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक October 10, 2009 at 7:41 PM  

भइया जी!
अब रेल ममतामयी भी है और
ममतामय भी है।

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tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
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