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Albela Khatri

जाड़े का मौसम, छोटी रजाई - बांहों में भर ले बलम हरजाई

जाड़े का मौसम, छोटी रजाई

बांहों में भर ले बलम हरजाई



ननद निगौड़ी बाज़ न आए

दरवज्जे पर कान लगाए

सरका दे खटिया,

बिछाले चटाई .............
बांहों में भर ले ...........



तू मेरा राजा, मैं तेरी रानी

अब काहे की आना-कानी

काहे का डर

मैं हूँ तेरी लुगाई .........
बांहों में भर ले ..........



मेरे दिल का दरद न जाने

मैं जो कहूँ तो बात न माने

बाबुल ने ढूँढा है

कैसा जमाई ..................
बांहों में भर ले ............



तेरे ही नाम की बिन्दिया-काजल

झुमका , कंगना,बिछुआ,पायल

तेरे ही नाम की

मेंहदी रचाई ..............
बांहोंमें भर ले ..............



अपना हो के यूँ न सज़ा दे

प्यासी हूँ मैं मेरी प्यास बुझा दे

मर जाऊंगी वरना

राम दुहाई ....................
बांहों में भर ले.................


6 comments:

Mohammed Umar Kairanvi October 28, 2009 at 4:17 PM  

बहुत खूब बांहो में भरने योग्‍य

ब्लॉ.ललित शर्मा October 28, 2009 at 5:14 PM  

मेरी सीळी पड़ी रिजाई, मै टोहुं नणद को भाई
तु कर जा रे मन की चाही, मै होज्जां रोज लुगाई
मेरी सीळी पड़ी रिजाई,
जय हो

Rajeysha October 28, 2009 at 6:14 PM  

और जिन्दगी की, क्या थी सच्चाई
जाड़े का मौसम, छोटी रजाई

जमाना बुरा था, भला मेरा सनम था
जहां तक हुआ था, वफा थी निभाई

सब पढ़ लिया था, बिना खोले लिफाफा
समझ जाते हैं अब वो मेरी लिखाई

वो ब्याही गई तो, हम ले आए लुगाई
हमने वही की, जो तुमने सिखाई

अलबेली रचना थी खत्री जी आपकी
हमने भी अपनी कोशिश आजमाई

Unknown October 28, 2009 at 6:35 PM  

वाह राजे शा जी...............
कमाल कर दिया आपने..........

छा गए
भा गए
आपतो ऐसे उमड़ते हुए आ गए
कि अलबेला पर गज़ब ढा गए

खा गए
खा गए
सारी कि सारी रजाई ही खा गए,,,,,,,,,,,,,,हा हा हा

Kashif Arif October 28, 2009 at 7:54 PM  

ye kya kar dala aapne....

jaade se pehle hi

शिवम् मिश्रा October 28, 2009 at 8:22 PM  

बहुत खूब !

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