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Albela Khatri

धन्यवाद समीर लाल जी ! शाबास राजीव तनेजा जी !




रंग आने लगा है धीरे- धीरे,

बहुत अच्छा लग रहा है यह देख कर कि अन्य पाठकों की शुरुआत

के बाद अब ब्लोगर बन्धु भी जागृत हुए हैं और मेरी अपील का

मान रखते हुए स्क्रिप्ट भेजने लगे हैं


श्री समीर लाल समीर जी ने बहुत ही उम्दा स्क्रिप्ट laughter ke

phatke ke लिए भेजी, साथ ही गज़ब की रसधार लिए एक

कहानी भाई राजीव तनेजा जी ने भेजी है ..दोनों ही बहुत जल्द

star one पर दिखाई देंगी, ऐसा मेरा विश्वास है


मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं दोनों के लिए..........


-अलबेला खत्री



10 comments:

राजीव तनेजा January 9, 2010 at 1:09 AM  

:-)

स्वामी भविष्य वक्तानंद January 9, 2010 at 1:09 AM  

बच्चा
तेरा ही भविष्य बेहद सुरक्षित संरक्षित है
बच्चा मेरे मठ में भी पधार कभी

खुशदीप सहगल January 9, 2010 at 3:12 AM  

गुरुदेव समीर जी और राजीव तनेजा भाई को बधाई...

जय हिंद...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक January 9, 2010 at 6:58 AM  

हम भी भेजने की जुगत में लगे हैं जी!

Ratan Singh Shekhawat January 9, 2010 at 7:50 AM  

समीर जी और राजीव तनेजा भाई को बधाई...

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi January 9, 2010 at 9:35 AM  

समीर भाई और राजीव तनेजा जी को एडवांस बधाई!

निर्मला कपिला January 9, 2010 at 11:23 AM  

सब को बधाई आपका ये प्रयास बहुत अच्छा लगा क्या कहानी कारों के लिये भी कुछ आशा है? कहानी कैसे भेजें? धन्यवाद्

संगीता पुरी January 9, 2010 at 12:06 PM  

समीर भाई और राजीव तनेजा जी को एडवांस बधाई! आनेवाले समय में ब्‍लॉग जगत से और आशाएं हैं !!

AlbelaKhatri.com January 9, 2010 at 12:09 PM  

दीदी नमस्कार !

कहानी का काम ज़रा जोख़िम भरा है क्यूंकि कहानी बहुत जल्द चोरी हो जाती है इसलिए यदि फ़िल्म अथवा टी वी के लिए कहानी हो तो सबसे पहले उसे फ़िल्म राईटर्स एसोसिएशन-मुम्बई में पंजीकृत कराना ही श्रेयस्कर है, लेकिन उसके लिए उसका सदस्य होना ज़रूरी है .

पंजीकृत कहानी को अगर कोई चुराले तो भी कोई नुक्सान नहीं, एसोसिएशन बहुत बड़ी और पुरानी ही नहीं बल्कि बड़े फिल्मकारों द्वारा संचालित एक विश्वसनीय संस्था है जो कि लेखक को उसका पूराहक दिलाती है

न सिर्फ़ कहानी बल्कि कथानक और शीर्षक भी पंजीकृत होते हैं

यदि आप रूचि लेंगी तो मैं एसोसिएशन का पता आपको भेज दूंगा . लेकिन बिना पंजीकरण के कहानी किसी को सुनाने की गलती बाद में पछतावे का सबब बन सकती है .

सादर,

-अलबेला खत्री

डॉ महेश सिन्हा January 9, 2010 at 9:23 PM  

बधाई हो सब गुनीजनों कों

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