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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

तुझे कवि किसने बनाया भूतनी के.......

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में दो कलमकार रहते हैं । एक शायर

है और दूसरा कवि । दोनों कहने को आपस में दोस्त हैं लेकिन, सच

पूछो तो नस नस में दुश्मनी भरी है इसलिए दोनों इक - दूजे को नीचा

दिखाने की कोशिश करते रहते हैं । उनका एक मज़ेदार किस्सा---




शायर बोला -

कपास को जब काता तो बन गया वो सूत

कवि की माँ भूतनी और बाप इसका भूत



कवि को बड़ा बुरा लगा, उसने विरोध किया तो शायर बोला - मैंने

तुम्हें थोड़े न गाली दी है । मैंने तो शायरी लिखी है । कवि पंचायत

में गया शिकायत ले कर तो पंचों ने भी यही कहा कि शायर साहेब

ने कविराज को माँ-बाप की गाली नहीं दी है बल्कि शायरी लिखी है

जिसका सुबूत है सूत से भूत की तुक का मिलना।



कवि बेचारा मन मसोस कर रह गया । लेकिन अगले दिन जैसे ही

शायर नज़र आया, कवि ने कहा-


रुई की बनाई पुरनी, पुरनी से काता सूत

शायर की माँ चुड़ैल.....


अबके शायर भड़क गया तो कवि बोला - मैंने तुम्हें गाली नहीं दी

है । मैंने तो कविता लिखी है । शायर भी अपनी शिकायत लेकर

पंचायत में गया तो पंचों ने कहा कि शायर ठीक कहता है । कवि

ने जान बूझ कर शायर को माँ की गाली दी है । कवि बोला - गाली

कहाँ ? ये तो कविता है । पंच बोले- कविता है तो तुक क्यों नहीं

मिल रही ? तो कवि बोला तुक तो मिली है लेकिन तुमने पूरी

कविता सुनी नहीं । पंच बोले- ठीक है पूरी सुनाओ ! अगर तुक नहीं

मिली, तो सज़ा मिलेगी......



कवि बोला- पूरी कविता इस प्रकार है :


रुई की बनाई पुरनी, पुरनी से काता सूत

शायर की माँ चुड़ैल और पंचों का बाप भूत .....हा हा हा




4 comments:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" January 22, 2010 at 12:07 PM  

हा-हा-हा-हा-हा, इसे कहते है कवि के दिमाग की खुरापात :)

Murari Pareek January 22, 2010 at 3:05 PM  

ha..ha.. panchon ki watt lagaa di!!!

दिनेशराय द्विवेदी January 22, 2010 at 7:19 PM  

अरे! सारे पंचों का एक ही बाप था?

आचार्य ललित मुनि January 22, 2010 at 8:36 PM  

वो भुत जरुर सरपंच था (पंचों का बाप)

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