Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

छाती से छाती मिली और मिला छेद से छेद .... रगड़मपट्टी होवन लागी, निकला सफ़ेद सफ़ेद

आज कल पहेलियों का मौसम चल रहा हैअनेक गण मान्य ब्लोगर

पहेलियाँ पूछ रहे हैं और जो नहीं पूछ रहे हैं वे बूझ रहे हैंअर्थात समूचा

वातावरण पहेली पहेली हो रहा हैमुझे भी थोड़ी थोड़ी खाज चली इस

रंग में रंगने की और मैं भी ले आया इक पहेली.............



पहेली ये मूलतः राजस्थान से उठाई गई हैउसे सहज हिन्दी

में बनाई गई है ताकि सभी समझ सकें । आप सबसे निवेदन है

कि इसका मतलब बताइये........


लफ्ज़ों के फेर में पड़ कर इसे अश्लील समझियेगा

ये
बड़ी शाकाहारी पहेली है


तो बताइये ये क्या है ?


छाती से छाती मिली

और
मिला छेद से छेद


रगड़पट्टी होवन लागी,

निकला
सफ़ेद सफ़ेद



___जल्दी कीजिये.........उत्तर दीजिये




19 comments:

जी.के. अवधिया November 4, 2009 at 3:26 PM  
This comment has been removed by a blog administrator.
MANOJ KUMAR November 4, 2009 at 4:06 PM  

इस तरह के द्वि-अर्थी पद हम बचपन से सुनते आए हैं, और तब चटखारे ले-ले कर इसका रसा-स्वादन करते-करते सही उत्तर तक पहुंच जाते थे। आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। आपके ब्लॉग पर कई गंभीर रचनाएं पढ़ी, देखी और अपने विचार दिए। मेरा विनम्र निवेदन है इस तरह की अंधी दौड़ में आप भी शामिल न हों। आपका जब बायोडेटा पढ़ता हूं और यह पढ़ता हूं, तो मेल नहीं खाता।

दिगम्बर नासवा November 4, 2009 at 4:09 PM  

Bhai samajh nahi aayee hame to ...

रामकुमार अंकुश November 4, 2009 at 4:17 PM  

यह हाथ से पीसने वाली चक्की है. जिसे क्षेत्रीय भाषा में चखिया बोलते हैं पर अलबेला जी यह पारिवारिक पहेली नहीं है. यह वयस्कों के मध्य पूछी जाने वाली पहेली है.

अजय कुमार November 4, 2009 at 4:30 PM  

गाँव में हाथ से चलने वाली गेहूं पीसनेवाली चक्की

एक विनम्र निवेदन- भाई अलबेलाजी आपके ब्लॉग पर
ऐसी द्विअर्थी पोस्ट की उम्मीद नहीं थी

ललित शर्मा November 4, 2009 at 4:40 PM  

ये क्या हो रहा है भाई - इतना सन्नाटा क्युं हैं-हमने तो ऐसा सोचा ही नही था, लगता है कि पोस्ट लिखने का आपने किसी को ठेका दे दिया है, आपके पास तो समय नही है,फ़िर कुछ भी आने दो-मुझे अफ़सोस है, इसे रखे या मिटाएं आपकी मर्जी,

डा. श्याम गुप्त November 4, 2009 at 6:54 PM  

yah khule aam poochhane waalee pahelee naheen, par aap kee kyaa galatee jab padhaa likhaa ( so called modernised ) tabakaa "GAY" ho rahaa hai to ........

Murari Pareek November 4, 2009 at 8:15 PM  

ab matlab bataa dewen to kalesh mite albelaaji !!!

Anonymous November 5, 2009 at 7:22 AM  

अलबेलाजी मैं कई दिनों से देख रहा हूँ आप इसी अंदाज़ की घटिया सामग्री पोस्ट करते आ रहे हैं. किसी भी व्यक्ति को जो स्वयं को कलाकार कहता हो ये बातें शोभा नहीं देतीं. मैं जानता हूँ आप कहोगे कि मेरे दिमाग में गंदगी भरी है और मैं आपकी पहेली को नहीं समझ पा रहा हूँ.

ab inconvenienti November 5, 2009 at 2:10 PM  

इस द्विआर्थी किस्म के तथाकथित ब्लॉगर उर्फ़ कलाकार उर्फ़ कवि उर्फ़ कलाकार और्फ़ कॉमेडियन उर्फ़ एक्टर उर्फ़ शायर उर्फ़ लेखक....... के ब्लॉग पर इसके बाद भी टिपण्णी करना, ब्लॉग्गिंग का अपमान होगा.

बाकी आप लोगों की मर्ज़ी, मैं तो पहले भी इस द्विआर्थी ब्लॉग पर ज्यादा नहीं टिपियाता था पर यह मेरी आखिरी टिपण्णी है.

इस अश्लील और द्विआर्थी शब्दावली प्रयोग करके पाठक खींचने का प्रयास करने वाले (सो कॉल्ड) ब्लॉगर का बहिष्कार किया जाना चाहिए.

AlbelaKhatri.com November 5, 2009 at 2:45 PM  

waah ji waah shrimaan (ab inconvenienti)!

aap toh kamaal karte hain .....tippani bhi karte hain aur tippani karana bloging ka apmaan bhi bataa rahe hain.

aisaa kyon kar rahe ho ji ?

kyon apmaan kar rahe ho bloging ka ?



aur koun se maine aapko peele chaaval bhijvaaye the ki aao ...tippani kar do !

mujhe ye hi samajh nahin aataa ki aap meri prashnsaa kar rahe ho ki nindaa ?

agar main paathak kheenchne ka pryaas kar raha tha toh pyaare bhai, main apne shadyantra me safal rahaa ...aap jaise kai graahak aaye aur meri dukaan jam gayi.. kyonki main yahaan bloging par sirf saahitya ki sevaa ke liye apnaa samay aur paisaa kharch nahin kar raha ..main toh apni TRP badhaane ke liye apni dukaan me sab tarah kaa mal rakhtaa honn ..ab ye aapkaa durbhaagya hai ki aapko kuchh achha maal nazar hi nahin aaya.. yahi gandi dwiarthi paheli hi aapko samajh aayi..ismen aap mujhe kyon doshi thaharaa rahe hain

ye toh mera talant hai ki aap jaise log bhi jhaanse me aa gaye aur naa naa karte bhi tipiyaa gaye .... aapko stareeya maal dikhaa hi nahin, bistareeya hi nazar aaya..ha ha ha ha

aur haan ...........mere blog par tipiyaane se bloging kaa apman hogaa ya nahin hoga ye anya log svyam soch lenge lekin galat hindi likhne se hindi ka apmaan zaroor hotaa hai ye yaad rakhen...........

aapne jo 7 panktiyaan likhi hain unmen 6 galtiyaan hain ..kripyaa post karne se pahle aap- padh liya karen ki apne likha kya hai ?

jaise laghushankaa karne ke baad chaik karnaa padtaa hai ki patloon ki zip band hui ya khuli hai isee tarah tippani karne ke baad dekh lenaa chaahiye ki kahin koi chook toh nahin ho rahi..

sadbhaavnaa sahit,

aapki is do koudi ki tippani ke liye binaa kisi kritagyataa ke

-albela khatri

mahashakti November 5, 2009 at 2:45 PM  

आपका भाव गलत नही है पर भाषा की द‍ृष्टि से आपकी यह पोस्‍ट थोड़ी कम अच्‍छी है, ये कहावते लगभग उत्‍तरी भारत मे मिलती है।

इस दुनिया में सब जायज है, जब आपके पाठक ऐसा ठीक नही समझ रहे है तो थोड़ा परहेज ही ठीक है। माफ़ कीजियेगा ज्‍यादा कहने जायक तो नही हूँ।

अवधिया चाचा November 5, 2009 at 2:57 PM  

अलबेला जी यह Ab अपना पुराना वाकिफ है, अलबेला है यह भी, इसे समझने के लिये इनका 6 अक्‍तूबर का लेख ''एक मेरी भी स्वीकारोक्ति'' देखें,

सिग्रेट शराब पर ऐसी नसीहतें देगा आपको अच्‍छी कविता का मेटर मिल जायेगा,
इन्‍हें देख के यकीन करना पडता है के, एक हमीं मक्‍कार नहीं ब्लागिंग में

अवधिया चाचा
जो कभी अवध ना गया

Vineet Tomar November 9, 2009 at 7:03 PM  

आपको और संजय बेगानी को समझना या तो मुश्किल हे या आपलोगों को शायद लिखाना सीखना चाहीये जो सभी को समाज आये , बाते बेमानी ज्यादा होती मतलब कम हल हो पाटा हे यह आदत वो हे बस लिखना हे और लेखक कहलाय , वाही वाही लेने की कोशिश करते हे. अगर गलत हो तो माफ़ केर दे. धन्यबाद.

गिरीश बिल्लोरे September 19, 2010 at 1:39 PM  

kheeraa yani kakaDee

Markand Dave March 19, 2011 at 8:29 PM  

प्रिय श्रीअलबेलाजी,

पता नहीं कीसी चित्रकार की न्यूड पैइन्टिंग हज़ारों -लाखोंमें बिकती है ।
और कीसी कलाकार को अपमानित किया जाता है । पता नहीं क्यों?

खैर,आपको होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ ।

गुमसुदा बीवी का इश्तहार देने मैं गया ।
" अरी.!! क्या तुम अब भी खुश नहीं हो?
अखबार वाले ने मुझ से पूछा, मैंने कहा,
"कैसे रहूँ, मेरा पायजामा जो साथ गया..!!

mktvfilms.

Anonymous July 3, 2011 at 3:48 PM  

aata pesna ke chakki

Anonymous July 14, 2011 at 12:01 AM  

chutya sala

Monu saini May 31, 2017 at 11:58 PM  

जो भी है ठीक है 2009 से किसी ने comment नहीँ किया now2017

Post a Comment

My Blog List

Google+ Followers

About Me

My photo

tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
WebRep
Overall rating
 
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

विजेट आपके ब्लॉग पर

Blog Archive