फिर गर्दन न आए अपनी गैर मुल्क़ के हाथों में
हो न जाये टुकड़े भारत के बातों ही बातों में
जुदा हुआ गर भाई - भाई खानदान फ़िर रहा कहाँ
जुदा हुए कश्मीर-असम तो हिन्दुस्तां फिर रहा कहाँ
मिल-जुल बीते सफ़र हमारा, ऐसी कोई राह बनाओ
हाथ से हाथ मिला के यारो वतन को चमन बनाओ
ख़ुद अपने ही हाथों से न घर में आग लगाओ
'अलबेला' इस गुलशन में अब अमन के फूल खिलाओ
ख़ुद अपने ही हाथों से न घर में आग लगाओ
Posted by
AlbelaKhatri.com
Thursday, November 12, 2009
Labels: देशभक्ति काव्य











12 comments:
कविता के रूप में एक अति आवश्यक सन्देश!
कोई समझे तब बात बने ना !
आज बहुत जरूरी सन्देश दिया है आपने |
एकता का सन्देश देती हुई कविता के लिए बधाई!
कविता तो बहुत सुन्दर है मगर उलेमाओ और राज ठाकरे को सुनाएगा कौन ?
kis kiss ko samjhayen sab pane apne dhol bajaa rahe hain !!! desh ki fikra chand logon ko hai !!!
बहुत सुन्दर संदेश दिया है आपने बधाई
मिल-जुल बीते सफ़र हमारा, ऐसी कोई राह बनाओ
हाथ से हाथ मिला के यारो वतन को चमन बनाओ
ख़ुद अपने ही हाथों से न घर में आग लगाओ
'अलबेला' इस गुलशन में अब अमन के फूल खिलाओ !
ये पंक्तियाँ खासकर लाजवाब लगा ! हम सब को मिलजुलकर रहना चाहिए ! आपने बिल्कुल सही कहा है और बहुत ही सठिक संदेश दिया है! अत्यन्त सुंदर रचना!
जन्मदिन वाला ब्लॉग आज खामोश क्यों है?
आज मनोज शर्मा कार्टूनिस्ट का जन्मदिन है
उनका ब्लॉग cartoontimes.blogspot है
e mail ID man_oj4u@yahoo.com
आप ने अपनी कविता मै बहुत सुन्दर संदेश दिया... लेकिन इन गुंडो को समझ मै केसे आये...
ab aisi kavitayin bhi man ko sukoon nahi deti....abhi to sirf ek madhukoda mila hai......wo to fas gaya ...shayad kisi mahamahim ko khush nahi kar paya.......It's time to take some action......Anyways aapki rachna sunder hai
" bahut dino baad desh bhakti se bharpur kavita padhne ko mili ...is shandar rachana ke liye aapko badhai ...sunder sandesh..."
---- eksacchai { AAWAZ }
http://eksacchai.blogspot.com
गर लोगों की समझ में ये बात आ जाती तो शायद अब तक ये दुनिया स्वर्ग में तब्दील हो चुकी होती.....
सुन्दर संदेशपरक रचना!!
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