पूछते हैं आप तो
बताऊंगा ज़रूर बन्धु
आज़ादी के बाद जो है हाल मेरे देश में
वोटरों के पेट पीछे
पिचके चले हैं और
लीडरों के फूले- फले गाल मेरे देश में
नीला नीला गगन भी
लगता सियाह आज
धरा हुई शोणित से लाल मेरे देश में
गद्दारों की भीड़ बढती
ही चली जा रही है
खुद्दारों का पड़ा है अकाल मेरे देश में
आज़ादी के बाद जो है हाल मेरे देश में
Posted by
AlbelaKhatri.com
Sunday, November 8, 2009
Labels: छन्द घनाक्षरी कवित्त










7 comments:
सही कह रहे हो भाई।
सियासती फकीर ही तो फल-फूल रहे हैं।
बात तो सौ फिसदी आपने सही लिखा हैं , गद्दारों की भीड बढ ही रही है और सही व्यक्ति की यदि देश में टोटा पडता रहे तो ,क्या हर डाल में उल्लू की बात सच साबित होगा ? हमें तो कुछ करना ही पडेगा ....
लाजवाब तरिके से आपने सच्चाई को सामने रखा है।
बढ़िया है जी, लगे रहिये !
गद्दारों की भीड़ बढती
ही चली जा रही है
खुद्दारों का पड़ा है अकाल मेरे देश में
क्या बात है जी बहुत सुंदर इर सच लिखा....
सही कहा आपने....पुरी तरह सहमत
सत्य वचन
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