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Albela Khatri

नेह करता हूँ तुम्हें पर देह का याचक नहीं हूँ ........

कवि हूँ मैं

कोई कथा वाचक नहीं हूँ


नेह करता हूँ तुम्हें

पर देह का याचक नहीं हूँ


मैं तुम्हारी धमनियों में प्रीत भरना चाहता हूँ

छन्द भरना चाहता हूँ ..गीत भरना चाहता हूँ


चाहता हूँ

मैं तुम्हारी राह के कंटक उठालूं

हर ख़ुशी दे दूँ तुम्हें

और ख़ुद पे सब संकट उठालूं


प्यार से

मनुहार से

शृंगार से

संसार भर दूँ



गीत की

नवगीत की

संगीत की

रसधार भर दूँ


यों तो अपना मिलना जुलना

दुनिया भर को

चुभ रहा है


पर हमारे वास्ते तो

सुखद है और

शुभ रहा है


आओ हम वादा करें

यह दीप जलता ही रहेगा

हो कोई मौसम मगर

यह फूल खिलता ही रहेगा ..................

13 comments:

शरद कोकास September 23, 2009 at 2:11 AM  

नवगीत के शिल्प मे यह प्रेम कविता उदात प्रेम की सम्पूर्ण सम्भावनाओं से भरी है । इस युग के त्वरित प्रेम पर यह एक दिशासूचक काव्यात्मक सन्देश भी है ।

Udan Tashtari September 23, 2009 at 6:17 AM  

अहा!! क्या खूब गीत रचा है अलबेला जी!! छा गये आप तो.

Babli September 23, 2009 at 6:47 AM  

वाह बहुत सुंदर लिखा है आपने ! रचना की हर एक पंक्ति दिल को छू गई ! बढ़िया लगा ! नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक September 23, 2009 at 7:04 AM  

बहुत बढ़िया लिखा है आपने!

लेखनी को नमस्कार।
बधाई

M VERMA September 23, 2009 at 7:09 AM  

यह् फूल खिलता ही रहेगा -
बेहतरीन कहा है

Mithilesh dubey September 23, 2009 at 9:27 AM  

बहुत ही सुन्दर व लाजवाब रचना। बहुत-बहुत बधाई

जी.के. अवधिया September 23, 2009 at 9:37 AM  

अतिसुन्दर प्रस्तुति!

शिवम् मिश्रा September 23, 2009 at 10:52 AM  

"चाहता हूँ

मैं तुम्हारी राह के कंटक उठालूं

हर ख़ुशी दे दूँ तुम्हें

और ख़ुद पे सब संकट उठालूं"


बहुत बढ़िया कविता..बधाई!

शिवम् मिश्रा September 23, 2009 at 11:02 AM  

"चाहता हूँ

मैं तुम्हारी राह के कंटक उठालूं

हर ख़ुशी दे दूँ तुम्हें

और ख़ुद पे सब संकट उठालूं"

बहुत ही सुन्दर व लाजवाब रचना। बहुत-बहुत बधाई |

सतीश सक्सेना September 23, 2009 at 11:52 AM  

शानदार अभिव्यक्ति के लिए शुभकामनायें !!

uthojago September 23, 2009 at 9:14 PM  

love is great and it is in giving

Sudhir (सुधीर) September 26, 2009 at 8:29 AM  

बड़ी प्यारी रचना ! रसिक प्रेम की सात्विक अभिव्यक्ति...

कवि हूँ मैं कोई कथा वाचक नहीं हूँ
नेह करता हूँ तुम्हें पर देह का याचक नहीं हूँ
मैं तुम्हारी धमनियों में प्रीत भरना चाहता हूँ

savan kumar October 16, 2013 at 9:25 PM  

कवि हूँ मैं कोई कथा वाचक नहीं हूँ
नेह करता हूँ तुम्हें पर देह का याचक नहीं हूँ
मैं तुम्हारी धमनियों में प्रीत भरना चाहता हूँ
सच हैं कवि हूँ याचक नहीं ....... आभार

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tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
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