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Albela Khatri

कमाल का शहर है लखनऊ ...............

कमाल का शहर है भाई लखनऊ भी...........

जैसे ही चार बाग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से बाहर

मैंने एक आदमी से पूछा - बाहर जाने का रास्ता किधर है ?

वो बोला- बाहर जा के पूछलो ...................


मैंने एक पुलिस वाले से पूछा

- सर, बाहर जाने का रास्ता किधर है?

वो बोला- ये बात तुम किसी आदमी से क्यों नहीं पूछते ?



मैं क्या कहता, लेकिन प्यास भी लगी थी...मैं पानी ढूंढ रहा था ।

तभी मैंने एक बोर्ड देखा । लिखा था 'पीने का पानी अन्दर है'

उसके ठीक नीचे लिखा था 'अन्दर आना मना है'


अभी तो ये शुरुआत है ...........देखिये आगे आगे होता है क्या ....

हा हा हा हा हा हा हा

10 comments:

Anonymous July 1, 2009 at 12:11 PM  

Kya Albela ji Lakhnow saher to Nawabo ka sahar hai waha Mehmano ki Izzat ki jatii hai app ke saath aisa kyoun hua yeh bahut dhook ki baat hai

Tarkeshwar Giri July 1, 2009 at 12:14 PM  

Lucknow Nababo ka hai, pl take care

अनिल कान्त : July 1, 2009 at 12:20 PM  

ha ha ha ha

रंजन July 1, 2009 at 12:30 PM  

कमाल है भाई..

yuva July 1, 2009 at 12:53 PM  

Majedaar. ha ha ha

नीरज बधवार July 1, 2009 at 1:07 PM  

मज़ेदार है। हो सकता है फिर आप बाहर के रास्ते की पूछताछ के लिए पूछताछ खिड़की जाएं। वहां पहुंचे तो वो शख़्स न मिलें। फिर लोगों से पूछताछ खिड़की पर बैठे उस शख़्स की पूछताछ करें। और वो कहें मुझसे क्यों पूछते हो जाओ पूछताछ खिड़की पर पूछो..और तब शायद आप खुद से पूछें कि मैं लखनऊ क्यों आ गया।

ताऊ रामपुरिया July 1, 2009 at 1:25 PM  

कहीं नखलेऊ तो नही पहुंच गये गल्ती से? पता करके बताईये.:)

रामराम.

राज भाटिय़ा July 1, 2009 at 3:33 PM  

अजीब माजरा है,

Udan Tashtari July 1, 2009 at 4:54 PM  

हा ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हा..सही जगह पहुँचे हो आप!!

मेरी रचना मेरा संग्रह July 5, 2009 at 11:42 AM  

Its only happen in India ....

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