Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

आओ ना.......इतने नखरे क्यों करती हो ?

मौसम तो देखो.............

मौसम की पुकार तो देखो

पूर्व से आती बयार तो देखो

हमारा प्यार देखो, सही

पर हमारा इन्तेज़ार तो देखो


देखो तो सही

कितने उतावले हैं हम तुम्हारे लिए

अरे यार ! बावले हैं हम तुम्हारे लिए



तुम हो कि नखरैल बनी हो.............


मेरे आँगन में आती ही नहीं हो

मेरा दामन सरसाती ही नहीं हो


माना कि तुम फ़िदा हो अपने ही हुस्न पर

वक्त लगता है तुम्हें दर्पण से हटने में

लेकिन याद रख ___

मौसम तो तुम्हारा गुलाम नहीं है

बरसे बिन तुम्हें भी आराम नहीं है


अपने प्यासों को गर प्यासा ही मार डालोगी

तो क्या करोगी

उस जल का

जो आँचल में भरा है ..............अचार डालोगी ?



अरी घटा...............

अब तो घट जा............

मुझ पर फट जा

धरती से सट जा


तुझसे तो बादल ही भला

जो उमड़-घुमड़ आता है

और झट से बरस जाता है...............


आजा आजा ...नाटक मत कर..........

बन्द अपना फाटक मत कर


बरस जा...............

बरस जा...........

बरस जा.............


वरना गीतकार गीत लिखना बन्द कर देंगे तुझ पर

तोड़ कर फैंक देंगे

-काली घटा छाई प्रेम रुत आई वाला कैसेट



आजा मेरी जान आजा

अपने नाम की लाज बचाने के लिए आजा

धरती के सौन्दर्य को सजाने के लिए आजा

हम प्यासों की प्यास बुझाने के लिए आजा

आजा

आजा

आजा ...................................

काली घटा आजा.............................




9 comments:

संगीता पुरी July 24, 2009 at 2:50 PM  

अब तो आ ही जाएगी !!

Murari Pareek July 24, 2009 at 4:05 PM  

वाह बरसात के इन्तेजार में इतनी अच्छी पंक्तिया आपने लिख डाली अब तो बरसात आनी ही है !!

ओम आर्य July 24, 2009 at 4:08 PM  

बहुत ही सुन्दर भाव लिये हुये कविता ......कमाल करते हो भाई ..

Nirmla Kapila July 24, 2009 at 5:14 PM  

haa haa haa ye badiyaa tareeka hai aab sun legee

Udan Tashtari July 24, 2009 at 5:50 PM  

आई की नहीं..अभी तक?

‘नज़र’ July 24, 2009 at 7:23 PM  

बहुत लल्लन-टॉप रचना है ;)
---
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

ताऊ रामपुरिया July 24, 2009 at 8:22 PM  

भाई आपकी पुकार सुन ये दो दिन पहले हमारे यहां फ़ट गई और आज सुना है पोरबंदर और जूनागढ मे फ़ट गई.:)

रामराम.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" July 25, 2009 at 12:56 PM  

शायद ये आपकी पुकार का ही असर है कि हमारे यहाँ तो पिछले दो घंटों से मूसलाधार बरस रही है:)

manaskhatri July 17, 2010 at 12:27 PM  

"आजा आजा ...नाटक मत कर..........

बन्द अपना फाटक मत कर"....बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ अलबेला जी...क्या बात है भाई.४ पंक्तियाँ मेरी भी सुनते जैयेया-
"मेघ..इतना बरसो की धरती खिल-खिल जाये,
और मेघ..इतना भी न बरसो,
की हर कोई हिल जाये.."!!!

Post a Comment

My Blog List

Google+ Followers

About Me

My photo

tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
WebRep
Overall rating
 
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

विजेट आपके ब्लॉग पर

Blog Archive