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Albela Khatri

आत्मघात कर रही हैं................

पत्तियाँ

गुलाब

की

कुछ

यूँ

झर

रही

हैं

मानो

कमसिन

किशोरियां

अपनी

लाज

बचाने

के

लिए

आत्मघात

कर

रही

हैं

4 comments:

geetashree July 15, 2009 at 10:33 AM  

बहुत खूब...कहते रहिए..क्रूर सच्चाईयों पर प्रहार करते रहिए। सूरत बदले ना बदले, आवाज उठाते रहिए.

Anil Pusadkar July 15, 2009 at 10:42 AM  

बहुत खूब्।

Murari Pareek July 15, 2009 at 12:57 PM  

aah ati vishisht !!

ताऊ रामपुरिया July 15, 2009 at 2:03 PM  

गजब की रचना है. बधाई.

रामराम.

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