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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

आपने अपने लोहू से जो लिखा पैगम्बरो ! आपकी औलाद ...उलटा पढ़ रही है देखिये

चश्म पर परतें भरम की चढ़ रही हैं देखिये


देखिये, दर्पण से चिड़िया लड़ रही है देखिये



आपने अपने लोहू से जो लिखा पैगम्बरो !


आपकी औलाद ...उलटा पढ़ रही है देखिये



याद है कि आपने अमृत दिया था, याद है


पर हमारी लाश ....नीली पड़ रही है देखिये



एक दुनिया एक दुनिया को बसाने के लिए


किस तरह से रातदिन उजड़ रही है देखिये



आज क़ौमी एकता के दिवस हैं मनने लगे


बात ये भी याद रखनी पड़ रही है देखिये

9 comments:

Ratan Singh Shekhawat August 29, 2009 at 7:46 AM  

कम शब्दों में आपने बहुत ही सटीक बात कह डाली |

संगीता पुरी August 29, 2009 at 7:52 AM  

वाह!!
बहुत सुदर रचना !!

Sudhir (सुधीर) August 29, 2009 at 7:57 AM  

एक दुनिया एक दुनिया को बसाने के लिए
किस तरह से रात दिन उजड़ रही है

क्या सुन्दर अभिव्यक्ति ! साधू!!

गिरिजेश राव August 29, 2009 at 10:38 AM  

जमा दिए हुजूर!
वाहवाही तो बहुत कॉमन हो गई है
सो
बाह बाह।
जीय रजा जीयSS|

चंदन कुमार झा August 29, 2009 at 10:51 AM  

वाह वाह !!!!!!!!! बहुत सुन्दर.

राजीव तनेजा August 29, 2009 at 11:20 AM  

कम शब्द...सटीक बातें

दीपक भारतदीप August 29, 2009 at 12:38 PM  

क्या बात है! बढ़िया.
दीपक भारतदीप

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" August 29, 2009 at 1:58 PM  

बिल्कुल सच कहा!!
बढिया!

Murari Pareek August 31, 2009 at 10:37 AM  

zabardast rachanaa hai ji||

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