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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

इसलिए गर्व से कहते हैं ''हम हिन्दू हैं''

क्योंकि हमारी देह में

कट्टरता का

कलुषित रक्त नहीं है



सीधे-सादे

प्रेम-पुजारी हैं हम

बगुले भक्त नहीं है



कनक-कामिनी की ख़ातिर

हमने

न क़त्ले-आम किया



नहीं लुटेरा बन कर

हमने

कभी, कहीं

क़ोहराम किया



हाथ उठा न कभी हमारा

बेबस पर,

मज़लूमों पर


हमने कभी नहीं अंगारे

बरसाये

मासूमों पर



कभी नहीं कुचला है

हमने

कुसुमों को

कलिकाओं को


शक्ति कहा है

भोग की वस्तु

नहीं कहा

महिलाओं को



बूंद-बूंद में,

कण-कण में,

प्रभु की सत्ता को जाना है



नहीं पराया

गिना किसी को,

सबको अपना माना है


हम नफ़रत के नाले नहीं हैं

स्नेह-क्षीर के सिन्धु हैं



इसलिए

गर्व से कहते हैं

''हम हिन्दू हैं''

8 comments:

Dr. Mahesh Sinha August 25, 2009 at 1:28 PM  

इस धरती को नमन करते इस लिए हिन्दू हैं
धरती को हम माँ कहते इस लिए हिन्दू हैं

Mithilesh dubey August 25, 2009 at 2:00 PM  

बहुत खुब अलबेला जी। लाजवाब

शिवम् मिश्रा August 25, 2009 at 2:28 PM  

'शक्ति कहा है

भोग की वस्तु

नहीं कहा

महिलाओं को'

इसलिए

गर्व से कहते हैं

''हम हिन्दू हैं''

वंदे मातरम |

ओम आर्य August 25, 2009 at 3:02 PM  

bahut hi badhiya bhai.......garv se ham bhi kahate ki ham hindu hai........

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" August 25, 2009 at 4:49 PM  

हम नफ़रत के नाले नहीं हैं
स्नेह-क्षीर के सिन्धु हैं
इसलिए
गर्व से कहते हैं
''हम हिन्दू हैं''।।

वाह्! कितना दुरुस्त फरमाया आपने।।
सत्य वचन्!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक August 25, 2009 at 5:22 PM  

इस सुन्दर रचना के लिए बधाई!

जी.के. अवधिया August 25, 2009 at 6:58 PM  

सुन्दर!

राजीव तनेजा August 26, 2009 at 12:06 AM  

यदि एक शब्द में कहना पड़े तो बस इतना ही कहूँगा...


"ज़बदस्त"

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