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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

मन एक चुम्बन को तरसता रह गया.............

आँख से आँसू बरसता रह गया

तन-बदन यौवन झुलसता रह गया

मिल गया तन को समर्पण और मन

एक चुम्बन को तरसता रह गया

2 comments:

राजीव तनेजा August 21, 2009 at 6:08 PM  

बात तो सही है बड़ी खुशियाँ मिल जाती है और हम छोटी-छोटी नेमतों को तरसते रह जाते हैँ

Dhiraj Shah August 21, 2009 at 8:41 PM  

vah khubsurat kavita

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