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Albela Khatri

जब बरसात आती है, तुम्हारी याद आती है

पवन जब गुनगुनाती है, तुम्हारी याद आती है

घटा घनघोर छाती है, तुम्हारी याद आती है

बर्क़ जब कड़कडाती हैं, तुम्हारी याद आती है

कि जब बरसात आती है, तुम्हारी याद आती है



तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं

मेरी चाहत के मधुबन में हज़ारों फूल खिलते हैं

इन आँखों में कई सपने, कई अरमां मचलते हैं

तुम्हारी याद आती है तो तन के तार हिलते हैं

4 comments:

suresh sharma (cartoonist) August 7, 2009 at 1:44 AM  

बहुत ही खूबसूरती से लिखी गई सुन्दर रचना है, बहुत-बहुत बधाई! अल्बेलाजी, आज आप हमारे ब्लोगर पहचान blog पर नहीं आये??????

Mithilesh dubey August 7, 2009 at 9:54 AM  

बहुत ही खूबसूरती से लिखी गई सुन्दर रचना है, । बधाई

संगीता पुरी August 7, 2009 at 12:07 PM  

बहुत ही खूबसूरत रचना !!

Vijay Kumar Sappatti August 7, 2009 at 9:58 PM  

albela ji , bahut hi sundar kavita ,, sawwn ki boondo ki tarah hai .. man ko choo gayi .. aapko bahut badhai

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