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Albela Khatri

आशीष खण्डेलवालजी, ये अच्छी बात नहीं है ......

देखो भाई इसमें मेरी कोई गलती नहीं है ।

मेरा दिमाग़ तो संजय बेंगाणी, अविनाश वाचस्पति और पवन चन्दन

ने ख़राब किया था । मैं तो इस क्षेत्र में एकदम नया नया हूँ ।

मुझे तो इन्हीं तीन महारथियों ने कहा था कि आशीषजी बहुत महान

टाइप के आदमी हैं । विद्वान होने के साथ साथ कोआपरेटिव भी बहुत हैं ।

तुम्हारी कोई भी समस्या हो तो उनसे ज़रूर कहना, वे सही सलाह

देंगे और तुम्हारी तकलीफ मिट जायेगी । अब मैं ठहरा सीधा आदमी,

इनकी बातों में आगया ।

कल चूँकि टिप्पणियां वगैरह खूब मिल गईं थीं इसलिए खुशी के मारे

रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी । मैंने सारे प्रयास कर लिए ।

नि:शब्द जैसी फ़िल्म भी देख डाली, लेकिन सब बेकार ...तभी मुझे

ध्यान आया कि आशीषजी से पूछ लूँ । क्योंकि उनके ही पास हम जैसे

ब्लोगरों की समस्या का हल मिलता है । तो भाई मैंने लगाया फोन और

बताई अपनी समस्या । आशीषजी ने बड़ी सहानुभूति पूर्वक मेरी बात

सुनी और बोले - कोई प्रॉब्लम नहीं , तुम एक काम करो, बाज़ार से

चार गोलियां ले आओ सल्फांस की । दो तो रात को सोते समय खा लेना

और दो सुबह उठ जाओ ........तो खा लेना ................ha ha ha ha ha ha

___आशीषजी ये अच्छी बात नहीं है .........हा हा हा हा

11 comments:

Shefali Pande June 27, 2009 at 5:44 PM  

haan ....jee,,ye baaat to theek nahi...
aapke paas hain itne khoobsurat alfaaz
aap kyun ?aapke dushman khhyen salfaaaz..

Murari Pareek June 27, 2009 at 5:52 PM  

लेकिन आपने अशिस जी की दुर्शिस नहीं मानी और जग ही गए,खेर आदमी से एक बार गलती हो जाती है,पर आपने उठने के बाद भी उनकी कुसलाह को नहीं माना !!!

रंजन June 27, 2009 at 6:08 PM  

ये तो साजिश है... सरासर साजिश है.. वैसे आप सलाह मान रहे है न.. आशिष गलत बात नहीं करते कभी..:)

Abhishek Mishra June 27, 2009 at 8:58 PM  

bahut badhiya !

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" June 27, 2009 at 9:15 PM  

आपने उनकी कीमती सलाह मानी या नहीं?

Ashish June 27, 2009 at 9:36 PM  

Bilkul galat baat hai, chaaron raat mein khaani chaahiye ;-)

Ratan Singh Shekhawat June 27, 2009 at 11:21 PM  

ऐसी सलाह तो आशीष जी नहीं दे सकते | उनके किसी डुप्लीकेट ने दे दी होगी ..............

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif June 28, 2009 at 9:07 AM  

वैसे आशीष जी, सलाह इतनी भी बुरी नही है।

विवेक सिंह June 28, 2009 at 3:19 PM  

पहली खुराक लेके बता रहे हैं क्या :)

MAYUR June 28, 2009 at 4:55 PM  

सही कह रहे हैं आशीष जी , सल्फास का आईडिया बुरा नहीं है , लेकिन ढूंढ के ओरिजनल लाना,डुप्लीकेट रेअच्शन कर जाएगी

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) July 22, 2009 at 10:53 AM  

थैंक गॉड खत्री जी, मेरा संदेह वाकई सही निकला.. इस देश में मिलावट कुछ ज्यादा ही हो रही है.. सेल्फॉस भी शुद्ध नहीं.. शुद्ध के लिए युद्ध करना ही होगा..

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