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Albela Khatri

समीर लाल जी , शराब और गधा ......

हम सब के चहेते समीर लाल जी अपने परिवार सहित

उड़न तश्तरी में यात्रा कर रहे थे । यों ही मज़ाक के मूड में

भाभीजी ने पूछा - क्योंजी, एक बात तो बताइये...

समीरजी - पूछिए ...

भाभीजी - कल्पना करो.... कि गधे के सामने पानी भी है

और शराब भी...बताओ वो क्या पीयेगा ?

समीरजी - इसमे कल्पना करने की क्या ज़रूरत है,

अलबेला खत्री के सामने रख के ही देख लो ...वो पानी पीयेगा ....

गधा है न , गधा ही रहेगा......हा हा हा हा हा हा हा

19 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi June 28, 2009 at 11:59 AM  

जो खुद पर नहीं हँस सकता वह औरों को नहीं हँसा सकता। आप इसी लिए हास्य व्यंग्य कलाकार हैं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक June 28, 2009 at 12:01 PM  

बहुत खूब........
हा..हा...हा...

cartoonist anurag June 28, 2009 at 12:19 PM  

ye kya kiya khud ki tulna gadhe se...
aap khud doosron ko gadha bana dete hain...
vishwas nahi ho to kabhi dekh lijiyega... jo log aapki rachna padte hain...uske baad has-haskar gadhe ki tarah lot lagate hain...
ek batt aour albela ji
agli baar sigret par koi cartoon banaooga to chehra aapka hi hoga.... ye mera vada hai....

संगीता पुरी June 28, 2009 at 12:21 PM  

बढिया .. अपने उपर भी व्‍यंग्‍य !!

PN Subramanian June 28, 2009 at 12:43 PM  

बहुत सुन्दर. आभार.

ताऊ रामपुरिया June 28, 2009 at 12:53 PM  

छा गये गुरु.:)

रामराम.

Ratan Singh Shekhawat June 28, 2009 at 1:14 PM  

वाह हास्य गुरु खुद को भी नहीं बख्शा ! हा..हा..हा..हा ................................

M Verma June 28, 2009 at 1:27 PM  

पर ये तो बता दीजिए खत्री जी क्या पीयेंगे? बात गोल क्यो कर रहे है. ह -- हा

रंजन June 28, 2009 at 1:32 PM  

:)

राज भाटिय़ा June 28, 2009 at 1:42 PM  

भाई बहुत सुंदर, मजा आ गया..........

दीपक भारतदीप June 28, 2009 at 2:01 PM  

हा..हा..हा..सच बात तो यह है कि हास्य व्यंगकार वही है जो स्वयं पर हंस सकता है.
दीपक भारतदीप

कौतुक रमण June 28, 2009 at 2:17 PM  

आपको टी० वी० पर भी देखा था, यहाँ भी पढ़ता हूँ. मुझे लगता है आप को कविता की समझ हास्य से ज्यादा है.

Shefali Pande June 28, 2009 at 5:36 PM  

wah jee wah....

Murari Pareek June 28, 2009 at 6:29 PM  

अपने ऊपर हंसकर जग को हँसाने वाला ही असली हास्य कवि है !!

परमजीत बाली June 28, 2009 at 7:24 PM  

क्या बात है अलबेला जी!!
बहुत बढिया!!
लेकिन शराब और पानी मे से हमें भी कुछ चुनना पड़ता तो हम भी आपके साथ ही खडे़ नजर आते........यहाँ और भी बहुत होगें......जो हमारी तरह ही हैं....।;))

अजय कुमार झा June 28, 2009 at 8:16 PM  

लल्लो कल्लो बात..गोया इस हिसास से तो हम भी गधे हुए...वाह अलबेला जी..इस हिसाब से भी हुए न भाई भाई...

Anil Pusadkar June 28, 2009 at 9:07 PM  

अच्छा अलबेला जी,समीर जी और आप कौन सी भाषा बोल रहे है आजकल जिसमे शराब को पानी और पानी को शराब कहा जाता है।

Udan Tashtari June 28, 2009 at 9:46 PM  

अरे, ये क्या हुआ..कल फ्लाईट में तो अलबेला की जगह कुछ और ही पढ़ा था..खैर, गुरु पानी पिओ..हम तो अपना गिलास बनाते हैं. हा हा!!

अनिल कान्त : June 29, 2009 at 8:40 AM  

हा हा हा हा

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